बर्फबारी से खिले किसानों-बागवानों के चेहरे
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हिमाचल में बर्फबारी और बारिश से किसानों-बागवानों के चेहरे खिल गए हैं। सेब और गेहूं की फसल के लिए यह अच्छी है। जहां पिछले कुछ महीनों से हिमाचल में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई थी, वहीं दो दिन तक बर्फबारी और बारिश से अब मिट्टी में नमी लौट आई है। सेब के पौधों से युक्त क्षेत्रों में हिमपात होने से इन क्षेत्रों में अगले सीजन में अच्छी फसल होने की नींव पड़ गई है। इससे सेब के पौधों के लिए वांछित चिलिंग ऑवर्स जल्दी पूरे हो जाएंगे। सर्दियों में नए पौधरोपण के लिए बागवान अब गड्ढे बनाने का काम शुरू कर पाएंगे।
इसके अलावा पुराने बगीचों में भी अब तौलिये बनाने का काम और अन्य खुदाई भी हो पाएगी। निचले हिमाचल में इस बार सूखे के कारण गेहूं की आधी-अधूरी बुआई हो पाई है। अब बारिश होने के कारण बोई जा चुकी गेहूं की फसल अंकुरित हो पाएगी। जहां अंकुरण हो गया है, वहां पौधे तेजी से पनप सकेंगे। रबी की सभी फसलों के लिए यह वर्षा अच्छी है। राष्ट्रीय पादप आनुवांशिकी ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जेसी राणा ने भी इस बर्फबारी और बारिश को तमाम बागवानी एवं कृषि फसलों के लिए अच्छा माना है।
दिसंबर की बर्फबारी से मई, जून में फायदा
हिमाचल प्रदेश में दिसंबर में हुई भारी बर्फबारी का लाभ मई और जून में नजर आएगा। प्रदेश की 10 हजार मेगावाट क्षमता की पनबिजली परियोजनाएं अपनी पूरी क्षमता से बिजली का उत्पादन करेंगी, जिससे न केवल प्रदेश बल्कि देश के दूसरे राज्यों को भी रोशन करने में आसानी होगी। जानकारों का कहना है कि दिसंबर में पड़ने वाली बर्फ ही लंबे समय तक ग्लेशियरों पर टिकी रहती है।
राज्य पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसएस रंधावा कहते हैं कि ऊपर वाले क्षेत्रों में तो अक्तूबर से ही बर्फ पड़नी शुरू हो जाती है, लेकिन दिसंबर में पड़ने वाली बर्फ ही ग्लेशियर के लिए सबसे अधिक लाभदायक होती है। इसका कारण यह है कि दिसंबर वाली बर्फ में पानी कम होता है। इसके कारण यह टिकाऊ होती है, जोकि ग्लेशियर को बनाए रखने में मदद करती है।
प्रदेश के पनबिजली विशेषज्ञ इंजीनियर आरएल जस्टा का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में दिसंबर में जो बर्फबारी होती है, उसी का लाभ मई और जून में देखने को मिलता है। यह बर्फ लंबे समय तक टिकी रहती है। मई और जून में जैसे ही सूर्य की तेज रोशनी पड़ती है। प्रदेश की नदियों में जल स्तर बढ़ जाता है, जिससे प्रदेश में स्थित पावर प्रोजेक्ट अपनी क्षमता के अनुसार पूरी बिजली का उत्पादन करते हैं।
बर्फबारी ने खोली सरकारी प्रबंधों की पोल
हिमाचल में बर्फबारी ने सरकारी प्रबंधों की पोल खोल दी है। न तो इसके लिए लोक निर्माण विभाग और न ही परिवहन विभाग खास सतर्क नजर आया। राज्य लोेक निर्माण विभाग के अधिकारियों के पास रविवार शाम तक यह जानकारी नहीं थी कि कितनी सड़कें बंद हैं?
यही स्थिति परिवहन विभाग के अधिकारियों की रहीं। उन्हें भी यह मालूम नहीं था कि राज्य में एचआरटीसी के कितने रूट बंद हैं? हालांकि, अधिकारी ये मानने को भी तैयार नहीं थे कि वे सतर्क नहीं हैं। न ही वे बंद मार्गों या रूटों की जानकारी दे पा रहे थे।