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नवंबर की बर्फबारी से ठंड, सेब के पेड़ों के लिए मिलेगी अच्छी खुराक

Fri, 20 Nov 2020 12:17 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 20 Nov 2020 12:17 PM IST
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snowfall is good for apple crop in himachal pradesh
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में नवंबर में हुई बर्फबारी सेब बागवानी के लिए अच्छी मानी जाती है। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि कड़ाके की ठंड सेब के पेड़ों के लिए अच्छे सीजन की बुनियाद होती है। नवंबर की बर्फ बगीचों में पनपने वाले खतरनाक कीटों से सेब के पेड़ों को निजात दिलाती है। ब

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गीचों में इन दिनों 10 घंटे तक सूर्य की रोशनी मिलती है। बर्फबारी के बाद तापमान काफी नीचे चला गया है। इससे सेब के पेड़ों को लंबे समय तक नमी मिलेगी। मौसम विज्ञान केंद्र ने 21 और 22 नवंबर को फिर से बर्फबारी का पूर्वानुमान लगाया है। एक बार फिर बर्फबारी होती है तो बगीचों को और ज्यादा नमी मिलेगी। 
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दिसंबर तक तौलिए बनाने से बचें
बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि अभी फिर से बर्फबारी होने आसार हैं। ऐसे में बागवानों को बगीचों में तौलिए बनाने से परहेज करना चाहिए। सेब के पेड़ अभी सुप्तावस्था में नहीं गए हैं। सेब के पेड़ों की काट छांट का कार्य भी नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में सेब के पेड़ों की कटिंग की जाती है तो इससे पेड़ों पर कीटों के हमलों की आशंका बनी रहती है।
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बगीचों में बर्फ ज्यादा समय तक रहना लाभकारी 
बगीचों में लंबे समय तक बर्फ टिकी रहती है तो यह सेब पैदावार के लिए अच्छी रहती है। सेब के पेड़ों पर बीमारियां नहीं लगती हैं और पेड़ स्वस्थ भी रहते हैं। स्वस्थ पेड़ों पर फल अच्छे लगते हैं। 


क्या कहते हैं बागवानी विशेषज्ञ
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि नवंबर की बर्फ से सेब की अच्छी पैदावार की बुनियाद पड़ती है। नवंबर में बगीचों में तौलिए बनाने की जल्दबाजी न करें। पेड़ों की काट छांट का काम न करें, क्योंकि पेड़ अभी सुप्तावस्था में नहीं हैं। ऐसे में काट छांट से बीमारियों और कीटों की मार ज्यादा पड़ती है। दिसंबर में तौलिए बनाने उचित रहते हैं।

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