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एसएमसी शिक्षकों से जुड़ी अहम खबर, सीएम ने किया खुलासा

Thu, 22 Dec 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, तपोवन (कांगड़ा)
ब्यूरो/अमर उजाला, तपोवन (कांगड़ा) Updated Thu, 22 Dec 2016 12:06 AM IST
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SMC teachers will not be regularised by himachal govt: cm virbhadra singh
मुख्यमंत्री वीरभ्रद सिंह

प्रदेश भर के विभिन्न स्कूलों में एसएमसी के माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे करीब तीन हजार अध्यापक नियमित नहीं होंगे। इनके नियमितीकरण पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है। चुराह के विधायक हंसराज के प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के स्कूलों में एसएमसी योजना में 30 नवंबर, 2016 तक विभिन्न श्रेणियों के 2715 अध्यापकों की भर्ती की है।

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बिलासपुर में 49, चंबा 595, हमीरपुर 20, कांगड़ा 260, किन्नौर 176, कुल्लू 117, लाहौल-स्पीति 141, मंडी 258, शिमला 416, सिरमौर 541, सोलन 91 और ऊना में 51 अध्यापकों के पद विभिन्न श्रेणियों में एसएमसी योजना के तहत भरे गए हैं। योजना के
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तहत कुल 1022 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के श्रेणियों के लोगों को पाठशालाओं में भर्ती किया गया। सीएम ने बताया कि एसएमसी के माध्यम से नियुक्त अध्यापकों की नियमित करने का सरकार का कोई विचार नहीं है। 
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दूध और इससे बने उत्पादों के 31 सैंपल फेल
पिछले एक वर्ष में प्रदेश में 31 दूध और दूध से बने उत्पादों के सैंपल फेल हुए हैं। चार व्यापारियों के खिलाफ कोर्ट में मामला दायर किया है, जबकि अन्यों को नोटिस जारी किए हैं। सरकाघाट के विधायक इंद्र सिंह के लिखित प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर

कौल सिंह ने बताया कि कृषि उपज मंडी समिति के माध्यम से संचालित चैक पोस्टों पर बाहर से आ रही इन्हीं मदों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। दर्ज आंकड़ों के अनुसार औसतन 624 क्विंटल दूध और इससे बने उत्पाद प्रदेश के अंदर आ रहे हैं। 

फंड की उपलब्धता पर दिया जाता है पेंशनरों को लाभ      
हिमाचल परिवहन निगम के रिटायर्ड कर्मियों को फंड की उपलब्धता पर लाभ दिया जाएगा। सुजानपुर के विधायक नरेंद्र ठाकुर के प्रश्न के लिखित जवाब में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने बताया कि इस साल 85.14 करोड़ पेंशन और 23.32 करोड़ रुपये डीसीआरजी के तहत सेवानिवृत्त कर्मियों को प्रदान किए हैं। 

निगम ने सितंबर 2016 तक पेंशन धारकों को पेंशन का भुगतान किया है। केवल दो माह की पेंशन की अदायगी ही अब निगम को करनी बची है। डीसीआरजी मामलों में 15 अगस्त 2015 तक फाइनल मामलों में भुगतान किया है। फंड की उपलब्धता पर सेवानिवृत्त कर्मियों को लाभ दिया जाता है। 

318 सड़कों, 16 पुलों की डीपीआर केंद्र को भेजी     
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 318 सड़कों और 16 पुलों की डीपीआर बनाकर केंद्र सरकार को भेजी है। धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह, जोगिंद्रनगर गुलाब सिंह, सरकाघाट इंद्र सिंह, जसवां-प्रागपुर के विक्रम सिंह और नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा के प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि पिछले एक साल में नाबार्ड के तहत 546.53 करोड़ की 140 स्कीमें स्वीकृति को भेजी गई थीं। 

इनमें 101 स्कीमों की नाबार्ड से 393.59 करोड़ की राशि मंजूर हो चुकी है। केंद्रीय भूतल मंत्री के घोषित 61 नए राष्ट्रीय उच्च मार्गों की डीपीआर बनाने को केंद्रीय मंत्रालय नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के अनुसार सलाहकार की नियुक्त का कार्य प्रगति पर है। इनमें अभी कोई कार्य आवंटित नहीं किया गया है। 30 नवंबर तक केंद्र से भूमि अधिग्रहण (राष्ट्रीय उच्च मार्ग के लिए) को 20714.65 लाख मिले हैं। 

शोर-शराबे में महज बीस मिनट तक हुआ प्रश्नकाल
प्रदेश विधानसभा के तीसरे दिन प्रश्नकाल महज 20 मिनट के लिए ही हो पाया। बुधवार को प्रश्नकाल शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने के बाद करीब 40 मिनट तक शोर-शराबा होता रहा। इस बीच, विपक्ष नारेबाजी करता रहा। 11 बजकर 40 मिनट के बाद प्रश्नकाल शुरू हो पाया और 12 बजे खत्म हो गया। 

मंगलवार की तरह बुधवार को भी विपक्ष के सदस्यों वेल में जाकर चेयर का लंबे समय तक घेराव किया और नारेबाजी की। फिर आसन के चारों ओर खडे़ होकर नारेबाजी करते रहे। विपक्षी भाजपा के सदस्य इस बात पर अडे़ रहे कि नोटबंदी पर चर्चा समेत मंगलवार का सारा बिजनेस बुधवार को भी रिपीट किया गया है, जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। 

कहा कि भाजपा के नोटिस पर नोटबंदी पर चर्चा वीरवार को गैर सरकारी सदस्य पर भी रखी गई है। इसे एक दिन में ही रखा जाए। विधानसभा अध्यक्ष बुटेल ने कहा कि कांग्रेस ने नोटबंदी से लोगों को हो रही असुविधा पर नोटिस दिया है, जबकि भाजपा का नोटिस अलग है। ऐसे में ये अलग-अलग मामले हैं। इस बीच, सदन में दोनों पक्षों में खूब नोकझोंक होती रही। विपक्ष ने स्पीकर के

बिजनेस रिपीट करने के फैसले पर ही उंगलियां उठा दीं। इसके बाद स्पीकर ने सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित कर अपने चैंबर में बुलाकर इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बातचीत की, मगर ये सिरे नहीं चढ़ी। दूसरी बार सदन की बैठक पौने एक बजे जब शुरू हुई तो उससे पहले सदन में अजीबोगरीब स्थिति बनी नजर आई, जब भाजपा के मुख्य सचेतक स्पीकर की कुर्सी पर बैठ गए। 

सदन के पटल पर रखे गए पांच विधेयक
सदन के पटल पर बुधवार को पांच विधेयक रखे गए। इनमें एक भूमि अंतरण विधेयक, दूसरा विद्युत शुल्क विधेयक, तीसरा नगर निगम अधिनियम, चैथा एंट्री टैक्स संशोधन विधेयक और पांचवां मूल्य वर्द्धित कर संशोधन से संबंधित हैं। मंत्री सुधीर शर्मा के सदन में नहीं होने की स्थिति में ये विधेयक सदन के पटल पर मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रकाश चौधरी के नहीं होने पर मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने ये विधेयक सदन के पटल पर रखे। नगर निगम नियम संशोधन विधेयक पारित होने के बाद नगर

निगम शिमला के वार्ड बढ़ जाएंगे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बुधवार को राज्यपाल की ओर से मंजूर किए गए विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें प्रदेश में माल के प्रवेश पर कर संशोधन विधेयक, नगरपालिका विधेयक, नगर निगम विधेयक, कृषि उपज विपणन विधेयक, विधानसभा सदस्यों के भत्ते एवं संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय विधेयक, तंबाकू नियंत्रण विधेयक

और उद्यान विश्वविद्यालय विधेयक हैं। दो अध्यादेशों को भी सदन के पटल पर रखा गया। रैली की तैयारियों में व्यस्त रहे बाली, सुधीर सदन में बैठक शुरू होने के वक्त परिवहन मंत्री जीएस बाली और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा सदन से बाहर धर्मशाला में 24 दिसंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की प्रस्तावित रैली में व्यस्त रहे। बाद में दोनों सदन में लौट आए। 

आवारा पशुओं को गौसदन में छोड़कर आने के लोनिवि को दिए हैं आदेश      
प्रदेश भर में सांडों के हमलों से छह लोगों की मौत हुई है। साल 2014, 15 और 30 नवंबर 2016 तक ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर में 12 मामले आवारा पशुओं के हमलों के सामने आए हैं। इनमें से छह मामलों में मृत्यु और छह मामलों में लोग घायल हुए हैं।

कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने मुआवजे और उपचार के रुप में प्रभावितों सहित उनके आश्रितों को 12 लाख 50 हजार रुपये दिए हैं। पिछले दो सालों में ऊना में वर्ष 2014 की तुलना में सांडो के हमलों में वृद्धि हुई है। हमीरपुर और बिलासपुर में वर्ष 2015 और 2016 में अभी तक दो-दो मामले सामने आए।

मंडी के बल्ह में ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। सांडों के नियंत्रण को सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इन्हें पकड़कर गौसदन भिजवाया गया है। साथ ही सरकार ने नियमों के तहत पशुओं के पंजीकरण और इनको आवारा छोडने वालों पर जुर्माना करने का भी प्रावधान किया है। लोक निर्माण विभाग को सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को गौसदनों में छोडने को कहा है। 

फॉरेस्ट क्लीयरेंस के पेच में फंसे 1259 प्रोजेक्ट      
राज्य के 1259 प्रोजेक्ट फॉरेस्ट क्लीयरेंस के पेच में फंसे हुए हैं। फॉरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण इन प्रोजेक्टों का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इसमें 136 एफसीए भारत सरकार, 11 प्रदेश सरकार, 1066 यूजर एजेंसी और 46 वन विभाग के पास लंबित पड़ी हैं। चिंतपूर्णी के विधायक कुलदीप कुमार के प्रश्न पर वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने बताया कि एफसीए के कई मामलों में यूजर एजेंसियां एवं आवेदकों के आवेदन में कमियों के कारण इसे स्वीकृति नहीं मिल पाती है।

विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि एफसीए क्लीयरेंस न मिलने से विकास कार्यों में ब्रेक रही है। इसलिए इसका उचित समाधान होना चाहिए। इस पर मंत्री बोले - हर वन मंडल स्तर की हर माह पांच तारीख को अरण्यपाल की अध्यक्षता में बैठक होती है। इसमें एफसीए के मामलों पर चर्चा होती है। बैठक में यूजर एजेंसी के प्रतिनिधि भाग लेकर आवेदन में कर्मियों की जानकारी ले सकते हैं। प्रदेश के अधिकतर एफसीए क्लीयरेंस में मामले यूजर एजेंसी के पास ही लंबित हैं।

सरकार अपने स्तर पर जांच कर स्वीकृति के लिए केस वन मंत्रालय को भेज देती है। वहीं से स्वीकृति आने के बाद सरकार केस को स्वीकृति देती है। बताया कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने से शिमला में सर्वाधिक 273 विकास कार्य रुके हैं। मंडी में 233, बिलासपुर 60, चंबा 204, हमीरपुर 44, कांगड़ा 105, किन्नौर 39, कुल्लू 147 और लाहौल-स्पीति के 39 मामले हैं। 

उद्योगों को रोजगार दफ्तरों के माध्यम से करनी होंगी भर्तियां
प्रदेश के जिन भी छोटे-बड़े उद्योगों में 25 कर्मचारी कार्य करेंगे, उनमें कर्मचारियों की नियुक्ति औद्योगिक प्रबंधक अपने स्तर पर नहीं कर सकते हैं। इन उद्योगों में कर्मचारियों की नियुक्ति रोजगार कार्यालय के माध्यम से ही हो सकती है। दून के विधायक रामकुमार के प्रश्न पर उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि अर्थ एवं सांख्यिकीय विभाग के माध्यम से सरकार ने 2013-14 में सर्वे करवाया है।

इसमें उद्योगों में हिमाचलियों और गैर हिमाचलियों की संख्या का पता लगाया है। सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में स्थापित औद्योगिक इकाइयों में रोजगार कार्यालय नालागढ़, कसौली और सोलन के माध्यम से 2013, 14 और 2015 में कुल 4365 भर्तियां विभिन्न पदों पर की गई हैं।


इनमें सोलन रोजगार कार्यालय के माध्यम से 2013 में 267, 2014 में 318 और 2015 में 172 भर्तियां की गईं, जबकि नालागढ़ रोजगार कार्यालय के माध्यम से 2013 में 720, 2014 में 1206 और 2015 में 500 कर्मचारियों की भर्ती की गई हैं। कसौली रोजगार कार्यालय के माध्यम से 2013 में 324, 2014 में 367 और 2015 में 491 भर्तियां की गईं।

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