लाखों विद्यार्थियों की स्मार्ट वर्दी पर मचा घमासान, शिक्षा विभाग पर फोड़ा ठीकरा
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 8.55 लाख विद्यार्थियों को दी जाने वाली स्मार्ट वर्दी को लेकर घमासान मच गया है। वर्दी की खरीद में देरी होने का स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन ने शिक्षा विभाग पर ठीकरा फोड़ दिया है। कारपोरेशन ने टेंडर प्रक्रिया की सभी औपचारिकता पूरी कर लेने का दावा करते हुए शिक्षा विभाग के पास बीते ढाई माह से अंतिम अनुमोदन की फाइल फंसी होने की बात कही है।
उधर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि हमारे पास कोई फाइल नहीं है। हमसे मंजूरी लेने का क्या मतलब है। हमें तो वर्दी चाहिए है, जिसकी एवज में विभाग बजट जारी करेगा। शिक्षा विभाग के स्तर पर कोई देरी नहीं हो रही है। स्मार्ट वर्दी की टेंडर प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को लेकर सिविल सप्लाई कारपोरेशन के कार्यकारी निदेशक ने स्थित स्पष्ट करते हुए बताया है कि 18 मई को ई निविदाएं आमंत्रित की गई थीं।
इसमें छह कंपनियां शामिल हुईं। निविदा में सभी प्रतिभागी पार्टियों द्वारा जमा करवाए गए सैंपलों की जांच मान्यता प्राप्त लैब से करवाए गए। सभी सैंपल निर्धारित मानकों पर सही पाए गए। 16 जुलाई को वित्तीय निविदा खोली गई। वित्तीय निविदा में मैसर्ज मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की दरें सबसे कम पाई गईं। इम्पावर्ड कमेटी के दिशा निर्देशों के अनुसार निगम द्वारा एल वन पार्टी के नेगोशिएशन की गई।
नेगोशिएशन के बाद जो दरें प्राप्त हुईं, उन्हें पहली अगस्त को शिक्षा सचिव को स्वीकृति के लिए भेजा गया। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि निगम ने पारदर्शी तरीके से निविदा की सभी औपचारिकताएं पूरी की हैं। अंतिम अनुमोदन के लिए मामला शिक्षा विभाग को प्रेक्षित किया गया है, जिस पर निर्णय अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितताएं नहीं बरती गई हैं।