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सावधान: हिमाचल प्रदेश में लंपी वायरस की दस्तक, सोलन में 40 पशु संक्रमित, सिरमौर में 1039 में लक्षण; जानें
Mon, 24 Aug 2026 12:28 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 24 Aug 2026 12:28 PM IST
सार
Lumpy Skin Disease: हिमाचल प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। सोलन के नालागढ़ और कुनिहार में करीब 40 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं सिरमौर में एक सप्ताह में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या बढ़कर 1039 हो गई है और 19 पशुओं की मौत हुई है। दोनों जिलों में टीकाकरण, निगरानी और संक्रमित पशुओं को अलग रखने पर जोर दिया जा रहा है।
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धारटीधार के एक गांव में गोवंश में मिले लंपी वायरस के लक्षण।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में पशुओं को प्रभावित करने वाले लंपी स्किन डिजीज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सोलन जिले के नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि सिरमौर में एक सप्ताह के भीतर लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 पहुंच गई है। सिरमौर में 19 पशुओं की मौत भी हो चुकी है। दोनों जिलों में पशुपालन विभाग ने निगरानी, टीकाकरण और संक्रमण रोकने के उपाय तेज कर दिए हैं।
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सोलन में 40 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि
सोलन जिले में नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई है। पंजाब और हरियाणा से सटे होने के कारण जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही पर पहले से निगरानी रखी जा रही थी। संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी और बढ़ा दी गई है।
पशुपालन विभाग ने सोलन में लंपी से बचाव के लिए 90,500 वैक्सीन डोज मंगवाई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पशुओं का टीकाकरण करवाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का जोर संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और बीमारी के प्रसार को शुरुआती स्तर पर रोकने पर है।
सोलन जिले में नालागढ़ और कुनिहार क्षेत्र में करीब 40 पशुओं में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई है। पंजाब और हरियाणा से सटे होने के कारण जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही पर पहले से निगरानी रखी जा रही थी। संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी और बढ़ा दी गई है।
पशुपालन विभाग ने सोलन में लंपी से बचाव के लिए 90,500 वैक्सीन डोज मंगवाई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पशुओं का टीकाकरण करवाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का जोर संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और बीमारी के प्रसार को शुरुआती स्तर पर रोकने पर है।
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सिरमौर में एक सप्ताह में दोगुने हुए मामले
सिरमौर में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक सप्ताह पहले की तुलना में ऐसे पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 हो गई है। इनमें 513 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 507 पशुओं का उपचार चल रहा है। बीमारी के संभावित प्रकोप के बीच 19 पशुओं की मौत की सूचना है। शुरुआत में पांवटा साहिब, माजरा, धौलाकुआं और कालाअंब क्षेत्र में लंपी जैसे लक्षण वाले पशु सामने आए थे। अब धारटीधार क्षेत्र के कुछ गांवों में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार बाहरी राज्यों से पशुओं की आवाजाही के दौरान संक्रमण जिले में पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सिरमौर में 60 हजार वैक्सीन उपलब्ध
लंपी के खतरे को देखते हुए सिरमौर में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया गया है। अब तक करीब 3000 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि विभाग को 60 हजार वैक्सीन डोज उपलब्ध हो गई हैं। विभाग ने उन क्षेत्रों में भी टीकाकरण शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जहां अभी तक लंपी जैसे लक्षण सामने नहीं आए हैं।
सिरमौर में लंपी जैसे लक्षण वाले पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक सप्ताह पहले की तुलना में ऐसे पशुओं की संख्या दोगुनी होकर 1039 हो गई है। इनमें 513 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 507 पशुओं का उपचार चल रहा है। बीमारी के संभावित प्रकोप के बीच 19 पशुओं की मौत की सूचना है। शुरुआत में पांवटा साहिब, माजरा, धौलाकुआं और कालाअंब क्षेत्र में लंपी जैसे लक्षण वाले पशु सामने आए थे। अब धारटीधार क्षेत्र के कुछ गांवों में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार बाहरी राज्यों से पशुओं की आवाजाही के दौरान संक्रमण जिले में पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सिरमौर में 60 हजार वैक्सीन उपलब्ध
लंपी के खतरे को देखते हुए सिरमौर में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया गया है। अब तक करीब 3000 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि विभाग को 60 हजार वैक्सीन डोज उपलब्ध हो गई हैं। विभाग ने उन क्षेत्रों में भी टीकाकरण शुरू करने के निर्देश दिए हैं, जहां अभी तक लंपी जैसे लक्षण सामने नहीं आए हैं।
गोशालाओं को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए सैनिटाइजेशन की तैयारी की जा रही है। 1962 एंबुलेंस योजना से जुड़ी टीमों को गोशालाओं में जाकर पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और सावधानियों के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाहरी राज्यों से पशु खरीदने से बचने की सलाह
दोनों जिलों में पशुओं की आवाजाही को संक्रमण के संभावित जोखिम से जोड़कर देखा जा रहा है। सिरमौर पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से फिलहाल बाहरी राज्यों से पशु खरीदने से बचने की अपील की है। यदि बाहर से पशु खरीदना जरूरी हो तो उसकी स्वास्थ्य जांच करवाने और कुछ समय तक उसे अन्य पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को यह भी कहा गया है कि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सक को सूचना दें। खुद से उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेने पर जोर दिया गया है।
बाहरी राज्यों से पशु खरीदने से बचने की सलाह
दोनों जिलों में पशुओं की आवाजाही को संक्रमण के संभावित जोखिम से जोड़कर देखा जा रहा है। सिरमौर पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से फिलहाल बाहरी राज्यों से पशु खरीदने से बचने की अपील की है। यदि बाहर से पशु खरीदना जरूरी हो तो उसकी स्वास्थ्य जांच करवाने और कुछ समय तक उसे अन्य पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को यह भी कहा गया है कि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सक को सूचना दें। खुद से उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेने पर जोर दिया गया है।
उपनिदेशक पशुपालन विभाग सिरमौर डॉ. राजीव वालिया ने बताया कि लंपी रोग के खतरे को देखते हुए विभाग अलर्ट मोड पर है। जिले में अब तक करीब तीन हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है और 60 हजार वैक्सीन उपलब्ध हो चुकी हैं। उन्होंने पशुपालकों से विभाग की ओर से जारी सावधानियों का पालन करने और संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की।
क्या है लंपी वायरस?
लंपी स्किन डिजीज पशुओं में होने वाली एक वायरल बीमारी है। इसका कारण Lumpy Skin Disease Virus (LSDV) है, जो Capripoxvirus समूह से संबंधित है। यह मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करता है। विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के अनुसार यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती, यानी यह जूनोटिक बीमारी नहीं है। इस बीमारी की सबसे खास पहचान पशु की त्वचा पर गांठें या उभरे हुए गोल घाव बनना है। इसके साथ बुखार, लिम्फ नोड्स में सूजन, आंख और नाक से स्राव, कमजोरी तथा दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर मामलों में पशु की हालत बिगड़ सकती है।
क्या है लंपी वायरस?
लंपी स्किन डिजीज पशुओं में होने वाली एक वायरल बीमारी है। इसका कारण Lumpy Skin Disease Virus (LSDV) है, जो Capripoxvirus समूह से संबंधित है। यह मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करता है। विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के अनुसार यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती, यानी यह जूनोटिक बीमारी नहीं है। इस बीमारी की सबसे खास पहचान पशु की त्वचा पर गांठें या उभरे हुए गोल घाव बनना है। इसके साथ बुखार, लिम्फ नोड्स में सूजन, आंख और नाक से स्राव, कमजोरी तथा दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर मामलों में पशु की हालत बिगड़ सकती है।
कैसे फैलता है लंपी?
लंपी वायरस का प्रसार मुख्य रूप से खून चूसने वाले कीड़ों, जैसे मक्खियों, मच्छरों और कुछ टिक के जरिए होता है। संक्रमित पशुओं की आवाजाही भी बीमारी को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है। गर्म और नम मौसम में वायरस फैलाने वाले कीड़ों की सक्रियता बढ़ सकती है। इसी वजह से पशुओं को संक्रमित या संदिग्ध पशुओं से अलग रखना, पशुओं की आवाजाही पर निगरानी, साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण बीमारी के नियंत्रण में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। टीकाकरण बीमारी के प्रसार को रोकने की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है।
क्या इंसानों को इससे खतरा है?
नहीं। लंपी स्किन डिजीज इंसानों में संक्रमण पैदा करने वाली बीमारी नहीं है। विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमित पशु के सीधे संपर्क या प्रभावित पशु से मिलने वाले मांस और दूध के सेवन से भी मनुष्यों में लंपी संक्रमण का खतरा नहीं माना जाता। हालांकि पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर इसका आर्थिक असर गंभीर हो सकता है।
लंपी वायरस का प्रसार मुख्य रूप से खून चूसने वाले कीड़ों, जैसे मक्खियों, मच्छरों और कुछ टिक के जरिए होता है। संक्रमित पशुओं की आवाजाही भी बीमारी को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है। गर्म और नम मौसम में वायरस फैलाने वाले कीड़ों की सक्रियता बढ़ सकती है। इसी वजह से पशुओं को संक्रमित या संदिग्ध पशुओं से अलग रखना, पशुओं की आवाजाही पर निगरानी, साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण बीमारी के नियंत्रण में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। टीकाकरण बीमारी के प्रसार को रोकने की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है।
क्या इंसानों को इससे खतरा है?
नहीं। लंपी स्किन डिजीज इंसानों में संक्रमण पैदा करने वाली बीमारी नहीं है। विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमित पशु के सीधे संपर्क या प्रभावित पशु से मिलने वाले मांस और दूध के सेवन से भी मनुष्यों में लंपी संक्रमण का खतरा नहीं माना जाता। हालांकि पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर इसका आर्थिक असर गंभीर हो सकता है।
पशुपालक क्या सावधानी बरतें?
- संक्रमित या संदिग्ध पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
- पशु में त्वचा पर गांठ, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
- बिना विशेषज्ञ की सलाह के उपचार न करें।
- बाहरी राज्यों से पशु लाने पर स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं।
- नए पशु को कुछ समय तक अन्य पशुओं से अलग रखने की सलाह का पालन करें।
- गोशाला और पशुओं के आसपास साफ-सफाई रखें।
- विभाग की ओर से चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में पशुओं का टीकाकरण करवाएं।