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ऑनलाइन, कैशलेस मार्केट से आई दवा उद्योगों में मंदी

Wed, 04 Sep 2019 12:58 PM IST
अरविन्द ठाकुर संतोष कुमार/एसडी शर्मा, अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)/मैहतपुर (ऊना)
संतोष कुमार/एसडी शर्मा, अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)/मैहतपुर (ऊना) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 04 Sep 2019 12:58 PM IST
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slowdown in  pharmaceutical industry in Nalagarh Solan Baddi Himachal pradesh
medicine - फोटो : फाइल फोटो

घरेलू सकल उत्पाद (जीडीपी) की दर में देश में 3 फीसदी गिरावट आने से उद्योग मंदी की मार झेल रहे हैं। लोगों के स्वास्थ्य के लिए सबसे आवश्यक एवं मूलभूत फार्मा सेक्टर भी मंदी की मार झेल रहा है। वर्ष 2008-09 में अंतरराष्ट्रीय मंदी छाने के बावजूद फार्मा उद्योगों को कोई फर्क नहीं पड़ा था, लेकिन इस बार फार्मा उद्योग स्वयं बीमार होकर रह गए हैं। प्रदेश में करीब 750 फार्मा उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहे हैं।

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फार्मा उद्योगों की स्थापना के बाद एशिया में सर्वाधिक 40 फीसदी दवाओं का निर्यात करने में हिमाचल ने अलग पहचान बनाई है। फार्मा हब होने के बावजूद आज उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। इसका मुख्य कारण मार्केट में कैशफ्लो कम होना, नामी ऑनलाइन कंपनियों से कैशलेस ऑर्डर प्लेस करना, औद्योगिक पैकेज खत्म होना, फार्मा सेक्टर को बैंकों से आर्थिक मदद न मिलना है। हिमाचल दवा निर्माता संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेश गुप्ता का कहना है कि पिछले एक साल से फार्मा उद्योग मंदी के हालात से जूझ रहे हैं। फार्मा उद्योगों सहित एमएसएमई उद्योगों पर भी मंदी की मार पड़ रही है। 
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हिमाचल दवा निर्माता संघ के सलाहकार एचएन सिंगला का कहना है कि राष्ट्रीय उपभोग (नेशनल कंजप्शन) कम होने से खपत में कमी आने से मंदी छा गई है। ऑनलाइन कंपनियों के पीछे लोग भाग रहे हैं। कैशफ्लो कम हो गया है। कैशलेस सुविधा होने से बड़ी कंपनियों के पीछे लोग भाग रहे हैं।
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बड़ी कंपनियों से उत्पाद लेने के कारण यहां जा रहा पैसा बाहर जा रहा है। ऑनलाइन खरीद को बढ़ावा मिलने के कारण उद्योगों में मंदी छा गई है। बीबीएनएआई के पूर्व अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल का कहना है कि दवा तो व्यक्ति की सबसे अधिक जरूरत है, लेकिन हैरत की बात है कि इस बार फार्मा उद्योगों में भी मंदी छाई है, टैक्सटाइल, ऑटोमोबाइल सहित अन्य सभी क्षेत्रों में मंदी का दौर चल रहा है।

ऊना जिले में मंदी ने तोड़ी उद्योगों की कमर

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Industry

बाजार में छाई मंदी का असर ऊना जिला के उद्योगों के साथ साथ अन्य व्यापारिक संस्थानों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। बाजार में तैयार माल की मांग घट गई है। उद्योगों में तैयार माल को मार्केट नहीं मिल रही, जिसके चलते ज्यादातर उद्योगों में उत्पादन तकरीबन 60 फीसदी तक घट गया है। स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र में कुछेक उद्योगों में तो पिछले तीन चार माह से तैयार माल बिक ही नहीं रहा, जिससे अस्थाई श्रमिकों की छंटनी तक ही नौबत आ गई है। 

मैहतपुर के एक व्यवसायी ने तो अपने कर्मियों की छंटनी करते हुए अपने चार कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। मैहतपुर के एक शराब उद्योग में पिछले चार माह से तैयार माल न बिकने से उत्पादन लगभग ठप हो चुका है। कारोबारी मंदी की प्रमुख वजह नोटबंदी के बाद पैदा हुए हालात को मान रहे हैं। 50 हजार अथवा इससे ज्यादा की नकद रकम के लेन-देन पर लगे सरकारी पहरे की वजह भी मंदी का दूसरा बड़ा कारण बताया जा रहा है।

चेक बाऊंस होने की स्थिति में तुरंत कोई पुख्ता कार्रवाई का न होना भी मंदी की तीसरी वजह है। ऊना जिला में एक हजार से ज्यादा अतिलघु, लघु तथा कुछेक मझोले उद्योग हैं, जिनमें से ज्यादातर के उत्पादन में भारी गिरावट आ चुकी है। मंदी का असर कारोबारियों से लेकर मजदूर वर्ग तक पर पड़ा है। मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, कारोबारियों का माल नहीं बिक रहा और नये निवेश से भी परहेज किया जा रहा है।

इंडस्ट्री एसोसिएशन जिला ऊना के अध्यक्ष प्रो. भोलानाथ कश्यप ने माना कि 60 फीसदी तक उद्योग मंदी के चपेट में हैं। उत्पादन गिर चुका है। पहले से तैयार माल बिक नहीं रहा है। मैहतपुर उद्योग संघ के पूर्व उपाध्यक्ष बलतेज इंद्रसिंह कहते हैं कि मंदी से कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। बाजार सुस्त पड़ा हुआ है। बाजार में माल की मांग ही नहीं है। 

उद्योग संघ मैहतपुर के पूर्व अध्यक्ष बलराम चंदेल ने कहा कि फार्मा उद्योग, प्लास्टिक उद्योग से लेकर अन्य छोटे उद्योगों पर मंदी का असर पड़ा है। तैयार माल गोदामों में भरा पड़ा है, बिक्री ठप पड़ी है, ऐसे में छंटनी के हालात पैदा हो गए हैं। 

मैहतपुर के प्रसिद्ध गोल्ड व्यवसायी राजीव सोनी ने कहा कि चेक बाऊंस पर सरकार का कड़ा कानून न होने से कारोबारी चेक लेने से डर रहे हैं। चेक का रिस्क कोई लेना नहीं चाहता, इससे भी बिक्री पर असर पड़ा है। केंद्र सरकार चेक बाऊंस होने की स्थिति पर फौरी कार्यवाई का प्रावधान करे, तो बाजार में तैयार माल की बिक्री बढ़ सकती है और मंदी काफी हद तक दूर हो सकती है।

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