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Shimla News: लालपानी में ईटीपी तैयार करने के निर्देश, स्लॉटर हाउस के पास ट्रीट होगा अपशिष्ट
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अमर उजाला असर...
राजधानी के स्लॉटर हाउस से अब बिना ट्रीट किए नहीं छोड़ा जाएगा अपशिष्ट, निगम ने डीपीआर तैयार करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के स्लॉटर हाउस से अपशिष्ट अब बिना उपचार (ट्रीटमेंट) के नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए स्लॉटर हाउस के पास ही लालपानी में इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट यानी ईटीपी तैयार किया जाएगा।
नगर निगम प्रशासन ने यहां ईटीपी तैयार करने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इसका निर्माण किया जाएगा। मौके पर अभी जो पुराना प्लांट है, उसे भी दुरुस्त कर संचालित करने के विकल्प को देखा जाएगा। फिलहाल जो पुराना प्लांट है, उसी में ट्रीटमेंट करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर निगम का कहना है कि ईटीपी निर्माण के लिए बजट की कमी नहीं है। यह मामला पर्यावरण से भी जुड़ा है, ऐसे में इसके निर्माण में देरी नहीं होगी। हाल ही में मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट (एमएसयू) के डॉक्टरों की टीम ने स्लॉटर हाउस का निरीक्षण किया था। जांच में सामने आया कि अपशिष्ट के उपचार के लिए परिसर में एक टैंक तो है, लेकिन उसे संचालित करने के लिए कोई प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात नहीं है। केवल रखरखाव के लिए एक कर्मचारी नियुक्त है। नियमानुसार प्रत्येक स्लॉटर हाउस में इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का होना अनिवार्य है। इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मी होने चाहिए जो रसायनों की मदद से अपशिष्ट का उपचार करें और डिस्चार्ज से पहले उसकी सैंपलिंग भी सुनिश्चित करें। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि ईटीपी की डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसे तैयार किया जाएगा।
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साल 2023 में ढह गया था स्लॉटर हाउस
लालपानी में 28 करोड़ रुपये की लागत से बने स्लॉटर हाउस में आधुनिक ईटीपी भी स्थापित था। इसके संचालन की जिम्मेदारी एक विशेषज्ञ कंपनी को सौंपी गई थी। साल 2023 में भूस्खलन के कारण स्लॉटर हाउस क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे ईटीपी भी प्रभावित हुआ। इसके बाद संबंधित कंपनी ने ईटीपी का संचालन बंद कर दिया। निगम ने कारोबार से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए अस्थायी स्लॉटर हाउस तो शुरू कर दिया लेकिन ईटीपी को दोबारा चालू करने की दिशा में काम नहीं हुआ। एमएसयू की रिपोर्ट में यहां तत्काल तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति कर अपशिष्ट का उपचार सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
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राजधानी के स्लॉटर हाउस से अब बिना ट्रीट किए नहीं छोड़ा जाएगा अपशिष्ट, निगम ने डीपीआर तैयार करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के स्लॉटर हाउस से अपशिष्ट अब बिना उपचार (ट्रीटमेंट) के नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए स्लॉटर हाउस के पास ही लालपानी में इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट यानी ईटीपी तैयार किया जाएगा।
नगर निगम प्रशासन ने यहां ईटीपी तैयार करने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इसका निर्माण किया जाएगा। मौके पर अभी जो पुराना प्लांट है, उसे भी दुरुस्त कर संचालित करने के विकल्प को देखा जाएगा। फिलहाल जो पुराना प्लांट है, उसी में ट्रीटमेंट करने के निर्देश दिए गए हैं।
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नगर निगम का कहना है कि ईटीपी निर्माण के लिए बजट की कमी नहीं है। यह मामला पर्यावरण से भी जुड़ा है, ऐसे में इसके निर्माण में देरी नहीं होगी। हाल ही में मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट (एमएसयू) के डॉक्टरों की टीम ने स्लॉटर हाउस का निरीक्षण किया था। जांच में सामने आया कि अपशिष्ट के उपचार के लिए परिसर में एक टैंक तो है, लेकिन उसे संचालित करने के लिए कोई प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात नहीं है। केवल रखरखाव के लिए एक कर्मचारी नियुक्त है। नियमानुसार प्रत्येक स्लॉटर हाउस में इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का होना अनिवार्य है। इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मी होने चाहिए जो रसायनों की मदद से अपशिष्ट का उपचार करें और डिस्चार्ज से पहले उसकी सैंपलिंग भी सुनिश्चित करें। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि ईटीपी की डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसे तैयार किया जाएगा।
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साल 2023 में ढह गया था स्लॉटर हाउस
लालपानी में 28 करोड़ रुपये की लागत से बने स्लॉटर हाउस में आधुनिक ईटीपी भी स्थापित था। इसके संचालन की जिम्मेदारी एक विशेषज्ञ कंपनी को सौंपी गई थी। साल 2023 में भूस्खलन के कारण स्लॉटर हाउस क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे ईटीपी भी प्रभावित हुआ। इसके बाद संबंधित कंपनी ने ईटीपी का संचालन बंद कर दिया। निगम ने कारोबार से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए अस्थायी स्लॉटर हाउस तो शुरू कर दिया लेकिन ईटीपी को दोबारा चालू करने की दिशा में काम नहीं हुआ। एमएसयू की रिपोर्ट में यहां तत्काल तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति कर अपशिष्ट का उपचार सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।