हिमाचल हाईकोर्ट: विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन की चयन प्रक्रिया रद्द करना असांविधानिक
पंकज राय की याचिका मंजूर करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार वैधानिक चयन समिति के फैसले पर अपीलीय प्राधिकारी की तरह काम नहीं कर सकती। चयन समिति ने 14 सितंबर 2025 को पैनल में पंकज राय और राजीव सूद के नाम की सिफारिश की थी।
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हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष पद की चयन प्रक्रिया रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को असांविधानिक करार दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की खंडपीठ ने सरकार की 30 सितंबर 2025 की अधिसूचना रद्द करते हुए 10 नवंबर तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। पंकज राय की याचिका मंजूर करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार वैधानिक चयन समिति के फैसले पर अपीलीय प्राधिकारी की तरह काम नहीं कर सकती। चयन समिति ने 14 सितंबर 2025 को पैनल में पंकज राय और राजीव सूद के नाम की सिफारिश की थी। अदालत ने कहा कि सरकार को इन दोनों में से किसी एक उम्मीदवार का चयन करने का अधिकार है, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने किसी उम्मीदवार की सीधे नियुक्ति करने के बजाय सरकार को निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने अगस्त 2025 में आयोग के अध्यक्ष पद के लिए आवेदन मांगे थे। इस पद के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पूर्व मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह और संजय गुप्ता समेत कई अधिकारी दौड़ में थे। सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 12 आवेदकों के साक्षात्कार के बाद सर्वसम्मति से पंकज राय और राजीव सूद के नामों का पैनल सरकार को भेजा था। राज्य सरकार ने 16 सितंबर 2025 को पैनल नामंजूर करते हुए तर्क दिया था कि अनुशंसित उम्मीदवार वरिष्ठता और अनुभव के लिहाज से अन्य अधिकारियों से पीछे हैं और चयन प्रक्रिया में प्रक्रियागत खामियां थीं। इसके बाद 30 सितंबर को पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी गई। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत चयन समिति की भूमिका निर्धारित है और सरकार उसके ऊपर अपीलीय संस्था की तरह काम नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि चूंकि आवेदन करने वाले खुद मुख्य सचिव चयन समिति द्वारा शॉर्टलिस्ट नहीं हो पाए, इसलिए कनिष्ठता का बहाना बनाकर पूरी प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता या अनुभव के आधार पर चयन समिति की सिफारिश को खारिज नहीं किया जा सकता।
मनाली के डीएसपी विक्रांत बोंसरा के तबादले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली के सब डिवीजनल पुलिस ऑफिसर डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस विक्रांत बोंसरा के अचानक किए गए तबादले पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत की यह रोक याचिकाकर्ता और उनकी जगह लाए जा रहे अधिकारी दोनों पर लागू रहेगी।मामले पर अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। अदालत ने यह आदेश विक्रांत बोंसरा की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। याचिकाकर्ता विक्रांत बोंसरा को अगस्त 2026 में मनाली में तैनात किया गया था। इसके बाद, 22 अक्टूबर को ही राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर उन्हें पुलिस मुख्यालय शिमला में डीएसपी (लीव रिजर्व) के पद पर ट्रांसफर कर दिया और उनकी जगह प्रतिवादी नंबर 4 को तैनात कर दिया गया।याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसे मनाली में पोस्टिंग के बाद अपना उचित कार्यकाल भी पूरा नहीं करने दिया गया। केवल 2 महीने की सेवा के बाद उन्हें हटाने का कोई ठोस प्रशासनिक कारण या सार्वजनिक हित का आधार नहीं दिखाया गया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिका दायर होने तक याचिकाकर्ता को उनके पद से रिलीव नहीं किया गया था।