हिमाचल में बनी 6 दवाओं समेत देशभर में 20 सैंपल फेल, मार्केट से हटाने के निर्देश
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एशिया की 45 फीसदी दवा निर्यात करने वाले हिमाचल के फार्मा उद्योगों की दवाएं केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन (सीडीएससीओ) के ड्रग अलर्ट में फेल हो रही हैं। सीडीएससीओ के जून के ड्रग अलर्ट में देशभर के फेल 20 दवा सैंपलों में हिमाचल की 6 दवाएं शामिल हैं। इनमें बीबीएन की 4, कांगड़ा और ऊना के एक-एक उद्योग की दवा के सैंपल फेल हुए हैं। ये दवाएं बैक्टीरिया के कारण यूटीआई को ठीक करने और फेफड़े की सूजन कम करने, उल्टी व पेट खराब होने के उपचार, मेटाबोलिज्म कंट्रोल करने, हार्ट व डाईजेस्टिव ट्रैक्ट को दुरुस्त बनाने, एंटीबायोटिक, कैलशियम और हड्डियों में विटामिन डी की कमी दूर करने के उपचार में काम में लाई जाती हैं।
सहायक राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि सैंपल फेल होने वाले उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए हैं। फेल होने वाली दवाओं में मैसर्ज स्वीस गार्नियर बायोटेक मैहतपुर की निट्रोबेक्ट-100, मैसर्ज रचिल फार्मा फेस-1 इंडस्ट्रियल एरिया संसारपुर टैरेस कांगड़ा की ऑडिशन-एमडी 8, मैसर्ज लाइफ विजन हेल्थकेयर प्लॉट नंबर-140 ईपीआईपी फेस-1 झाड़माजरी की थायरोक्सीन सोडियम-500, मैसर्ज अष्टम हेल्थकेयर गांव ठेडा नालागढ़ की एमोक्सीसिलीन एंड पोटाशियम कलवनेट, मैसर्ज विंग्स बायोटेक एचपीएसआईडीसी इंडस्ट्रियल एरिया बद्दी की कैलशियम एंड विटामिन डी-3 के दो बैच शामिल हैं।
छह महीने में हिमाचल की 58 दवाइयों के सैंपल फेल
समूचा विश्व कोरोना की दवा बनाने में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर देश में बनने वाली दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। इसमें एशिया की 45 फीसदी दवा निर्यात करने वाला हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इस वर्ष जनवरी से जून के छह माह में 58 दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतरी हैं। इससे पहले जनवरी माह में देशभर में लिए गए सैंपलों में से फेल हुई 34 दवाओं में सूबे के उद्योगों की चार और फरवरी माह में 38 में से 6 दवाएं, मार्च माह में 46 में से 13, अप्रैल माह में 59 में से 23, मई माह में 25 में से 6 और जून माह में 20 में से 6 दवाएं फेल हुई हैं।
इससे पहले 2019 में सूबे के उद्योगों की 100 दवाएं, जबकि 2018 में भी 100 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। प्रदेश भर में करीब 750 फार्मा उद्योग हैं। सरकार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले ही फटकार लगा चुकी है, जिसके बाद उद्योग भी हरकत में आए। इसके लिए दवा नियंत्रक प्राधिकरण के पांच जोन भी गठित किए गए हैं, बावजूद दवाओं के सैंपल फेल हो रहे हैं। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाहा ने कहा कि दवाओं के फेल होने में वातावरण का भी असर रहता है और बददी में जल्द ही ड्रग टेस्टिंग लैब खुल जाएगी। उन्होंने कहा कि जारी हुए ड्रग अलर्ट के बाद दवा निरीक्षकों को इन पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।