आयुष ग्राम योजनाः हिमाचल के ये जिले बनेंगे आयुर्वेद के मॉडल
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आयुर्वेद को अपनाकर दिनचर्या और रहन-सहन में बदलाव लाने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश के सोलन और सिरमौर जिलों का आयुष ग्राम योजना के लिए चयन हुआ है। सिरमौर जिले की चार पंचायतें चयनित हुई हैं।
सोलन में भी इतनी ही पंचायतों का चयन हुआ है। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा प्रोजेक्ट स्वीकृत हो गया है। सिरमौर को पहली किस्त के रूप में दस लाख रुपये मिले हैं।
इनसे चारों पंचायतों में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के साथ औषधीय और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। आयुर्वेद के अनुसार रहन-सहन में बदलाव के लिए भी पंचायतों के लोग जागरूक किए जाएंगे।
आयुर्वेद विभाग ने निदेशक के माध्यम से केंद्र सरकार को आयुष ग्राम योजना का प्रोजेक्ट मंजूरी को भेजा था। प्रोजेक्ट में सिरमौर की आमवाला-सैनवाला, सलानी-कटोला, बर्मा-पापड़ी और कौलांवालाभूड को शामिल किया गया है। हाल ही में आयुष मंत्रालय से इसकी मंजूरी का पत्र मिला है।
क्या होंगे योजना के फायदे
पहले चरण में सिरमौर और सोलन जिले की चार-चार पंचायतों का चयन हुआ है। पहली किस्त के रूप में आयुष मंत्रालय ने सिरमौर को दस लाख की धनराशि उपलब्ध करवाई है। इससे लोगों को आयुष की विभिन्न क्रियाओं और गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ रहने पर जोर दिया जाएगा।
संबंधित पंचायतों के लोगों को औषधीय गुणों से युक्त पौधों की खेती करवाई जाएगी। इन औषधीय पौधों को लोगों की दिनचर्या में शामिल किया जाएगा। स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए दवाइयों की बजाय औषधीय पौधों से उपचार करने के तरीके बताए जाएंगे।
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. केआर मोगटा ने कहा कि इन पंचायतों में विशेषज्ञ समय-समय पर दौरा करेंगे। यहां के लोगों को नवीनतम कार्यप्रणालियों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
योजना के तहत औषधीय पौधों की खेती करने के बाद चारों पंचायतें औषधीय पौधों के लिए जानी जाएंगी। आर्थिक तौर पर मजबूती के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इलाके के लोग अंग्रेजी दवाइयों पर निर्भर नहीं रहेंगे।
तुलसी, करेला, अंजीर, आंवला, हरड़ आदि औषधीय पौधों से उपचार के तरीके बताए जाएंगे। हिमाचल ही नहीं, दूसरे राज्यों के लोग भी इन पंचायतों में होने वाली आयुर्वेदिक खेती को देखने यहां पहुंचेंगे। इससे पर्यटन कारोबार भी बढ़ने की उम्मीद है।