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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shravan Ashtami fair started in Himachal, thousands of devotees returned due to lack of covid negative report, hangama in Naina Devi

हिमाचल में श्रावण अष्टमी मेले शुरू, कोविड रिपोर्ट न होने पर लौटाए हजारों श्रद्धालु, श्री नयना देवी में जमकर हंगामा

Mon, 09 Aug 2021 08:23 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, श्री नयना देवी जी/धर्मशाला/ऊना
अमर उजाला नेटवर्क, श्री नयना देवी जी/धर्मशाला/ऊना Published by: Krishan Singh Updated Mon, 09 Aug 2021 08:23 PM IST
सार

दरअसल, राज्य सरकार ने बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए कोरोना की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट या वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने का प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य किया है। प्रमाणपत्र न होने पर इन श्रद्धालुओं को बिलासपुर में पंजाब और हिमाचल सीमा पर कोलावालां टोबा में रोककर लौटने के लिए कहा गया।

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Shravan Ashtami fair started in Himachal, thousands of devotees returned due to lack of covid negative report, hangama in Naina Devi
श्री नयना देवी जी में जमकर हंगामा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोविड के बढ़ते मामलों के बीच देवभूमि हिमाचल प्रदेश में सोमवार से श्रावण अष्टमी मेले शुरू हो गए हैं। लेकिन पहले ही दिन शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी के दर्शन न होने से नाराज श्रद्धालुओं ने हंगामा कर दिया। दरअसल, राज्य सरकार ने बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए कोरोना की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट या वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने का प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य किया है। प्रमाणपत्र न होने पर इन श्रद्धालुओं को बिलासपुर में पंजाब और हिमाचल सीमा पर कोलावालां टोबा में रोककर लौटने के लिए कहा गया।

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इससे नाराज श्रद्धालु आनंदपुर साहिब-नयनादेवी मार्ग पर बैठ गए और जमकर हंगामा किया। प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, बाद में उपायुक्त पंकज राय ने पंजाब के रोपड़ प्रशासन से बात की। इसके बाद कोलावालां टोबा में पंजाब ने छह जबकि हिमाचल ने एक काउंटर लगाकर कोविड रैपिड टेस्ट शुरू किए। टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 50-50 के जत्थों में श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए भेजा गया। शाम तक एक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई जबकि 10781 श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए। 
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बिलासपुर से 15 हजार, मैहतपुर नाके से लौटाए चार हजार श्रद्धालु  
आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट या वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने का प्रमाणपत्र न होने पर बिलासपुर के कोलावालां टोबा से 15 हजार जबकि ऊना के मैहतपुर नाके से चार हजार श्रद्धालुओं को लौटा दिया गया। कांगड़ा जिला में दस्तावेज जांचने के लिए प्रवेश द्वारों के बजाय मंदिरों के बाहर बैरिकेड्स लगाकर काउंटर लगाए गए। यहां भी कई लोगों को लौटा दिया गया। श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई कि वे मंदिर तक पहुंच गए थे, लौटाना ही था तो नाकों पर बता देते। बता दें कि बीते दिन 65 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने शक्तिपीठों में माथा टेका था। 
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चार बजे खुले मंदिरों के कपाट
सूबे की शक्तिपीठों के कपाट सोमवार सुबह चार बजे दर्शनों के लिए खोल दिए गए। मां ज्वालाजी मंदिर में 8000, मां चामुंडा देवी में 3000 और मां बज्रेश्वरी मंदिर में 700 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। चिंतपूर्णी में 7 हजार ने माथा टेका। श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनकर ही पर्ची सिस्टम से प्रवेश करने दिया गया। मंदिर में शस्त्र, नारियल व ढोल-नगाड़े लेकर प्रवेश पर रोक रही। लंगर और हवन-यज्ञ पर भी रोक रही। 

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