Himachal News: शिव प्रताप शुक्ला ने संस्कृत में ली शपथ, बने हिमाचल के 29वें राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल देवभूमि है और यहां नशे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह बुराई तेजी से हमारी युवा पीढ़ी, देश के भविष्य को अपने शिकंजे में ले रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शिव प्रताप शुक्ला ने शनिवार को राजभवन में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में हिमाचल प्रदेश के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सबीना ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शिव प्रताप शुक्ला ने संस्कृत भाषा में शपथ ली। शपथ लेने से पहले उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ यज्ञ किया। शपथ के बाद प्रदेश की सुक्खू सरकार के साथ समन्वय से कार्य करने की बात कहते शुक्ला ने कहा कि राज्यपाल संविधान का एक उच्च पद है।
शुक्ला संस्कृत भाषा में शपथ लेने वाले प्रदेश के तीसरे राज्यपाल हैं। इनसे पहले विष्णुकांत शास्त्री और आचार्य देवव्रत ने भी संस्कृत भाषा में शपथ ली थी। इस बाबत शुक्ला ने कहा कि मैंने राज्यसभा में भी संस्कृत में शपथ ली थी। संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए प्रदेश में काम करूंगा। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। देवभूमि में देवभाषा में शपथ लेकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के लिए उन्होंने राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला भी उपस्थित रहीं। राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने नियुक्ति पत्र पढ़कर सुनाया। शपथ ग्रहण समारोह में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सभी मंत्री, मुख्य संसदीय सचिव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सहित कई गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने पदभार ग्रहण करने पर दी बधाई
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने पर शिव प्रताप शुक्ला को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि राज्यपाल के रूप में शुक्ला का कार्यकाल उपलब्धियों से परिपूर्ण होगा। राज्य को उनके व्यापक अनुभवों का भरपूर लाभ मिलेगा।
देवभूमि में नशे के लिए कोई जगह नहीं : शुक्ला
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल देवभूमि है और यहां नशे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह बुराई तेजी से हमारी युवा पीढ़ी, देश के भविष्य को अपने शिकंजे में ले रही है। दुखद स्थिति यह है कि आज दूरदराज के क्षेत्रों में भी नशा अपने पांव पसार रहा है, जिसे रोकने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कानून और पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर काम करता है, लेकिन इसके लिए समाज को जागरूक करने की भी आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से नशामुक्ति के अभियान को और व्यापक बनाकर प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
राज्यपाल ने जाखू में टेका माथा
हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने शनिवार को राजभवन में शपथ लेने के बाद जाखू हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना की। वह रोपवे से होते हुए मंदिर पहुंचे। मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने हनुमान के समक्ष शीश नवाया। इस दौरान लेडी गर्वनर जानकी शुक्ला भी उनके साथ रहीं। राज्यपाल ने भी भगवान हनुमान से प्रदेश के नागरिकों पर अपनी अपार कृपा बरसाने और सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। राज्यपाल के रूप में राजभवन के बाहर यह पहली यात्रा थी।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला का जीवन परिचय
शिव प्रताप शुक्ला का जन्म गोरखपुर जनपद के ग्राम रूद्रपुर पोस्ट-खजनी में 1 अप्रैल 1952 को हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ग्राम-रूद्रपुर खजनी एवं कक्षा 9 से विधि स्नातक की शिक्षा गोरखपुर में प्राप्त की। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के रूप में भी कार्य किया। वह 1983 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 1989 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में गोरखपुर नगर विधानसभा क्षेत्र से प्रथम बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए।
इसके उपरांत वर्ष 1991 में दोबारा निर्वाचित हुए। उत्तर प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में प्रारंभिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा एवं भाषा विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का कार्यभार संभाला। उन्होंने बागवानी विभाग, खेलकूद, युवा कल्याण एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के दायित्व का निर्वहन भी किया।
वह वर्ष 1993 में दोबारा विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 1996 में चौथी बार विधानसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह की सरकार में कारागार विधि एवं न्याय एवं ग्रामीण विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
10 जून 2016 को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए। 3 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में वित्त राज्यमंत्री का दायित्व संभाला। उन्होंने 4 जुलाई, 2022 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन सुनिश्चित किया।