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इस हाई प्रोफाइल मामले में सेशन कोर्ट से बरी हुए पूर्व डीजीपी भंडारी

Sun, 26 Nov 2017 12:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 26 Nov 2017 12:04 PM IST
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Shimla Session court acquitted Former DGP ID Bhandari
पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी - फोटो : File Photo

हिमाचल प्रदेश के हाई प्रोफाइल फोन टैपिंग मामले में आरोपी पूर्व डीजी पुलिस आईडी भंडारी सेशन कोर्ट से बरी हो गए हैं। निचली अदालत के बाद सत्र न्यायालय से बरी होने के बाद डीजी ने कहा कि जिन लोगों के कारण उनकी साख गिरी, परेशान रहे और पद से हटाया गया उन्हें वे छोड़ेंगे नहीं।

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वकीलों से सलाह लेकर झूठे आरोप लगाने वाले पुलिस और अन्य अधिकारियों पर मानहानि का केस कर सकते हैं। भंडारी ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट में जाने के सवाल पर कहा कि उस समय मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ कई बयान दिए थे। उसे देखते हुए उनके खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। 
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पूर्व डीजी भंडारी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पांच वर्ष पहले वीरभद्र सिंह के सीएम पद की शपथ लेने से एक दिन पहले सीआईडी मुख्यालय में तत्कालीन मुख्यसचिव, गृहसचिव और डीआईजी स्तर के अधिकारियों ने अवैध रूप से दबिश दी। उस समय वे सीआईडी के प्रमुख थे। आरोप लगाया गया कि फोन टैपिंग की कुछ सीआईडी तोड़ी गई हैं।
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अवैध तरीके से फोन टैप हुए हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। भंडारी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को अवगत करवाया कि फोन टैपिंग की प्रक्रिया वैधानिक और नियमसंगत तरीके से होती है। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से 14 सौ फोन टैपिंग की बात झूठी साबित हुई केवल दो फोन टैप हुए, जिसमें एक तिब्बती नागरिक का था तो दूसरा कोई सब्जी वाला था।

भंडारी ने आरोप लगाया कि सीएम के आदेश पर उन पर केस बनाए गए और वे केवल अकेले आरोपी बनाए गए। उन्होंने कहा कि खुद को इस मामले से अलग करने की निचली अदालत में याचिका दी। निचली अदालत ने कहा कि मामला झूठा है और 25 मई 2016 को बरी किया।

इसके बाद एक एक पुलिस अधिकारी ने इसके खिलाफ  फिर सेशन कोर्ट में केस किया। पांच दिन पहले 20 नवंबर को कोर्ट का फैसला उनके हक में आया है। अब वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और इसके लिए वे कानूनविदों से चर्चा कर रहे हैं।

ये था मामला

Shimla Session court acquitted Former DGP ID Bhandari

24 दिसंबर, 2012 की रात पुलिस के सीआईडी मुख्यालय में उच्च अधिकारियों ने दबिश दी। कंप्यूटर सेल से उपकरण उठाकर लेकर गए। उस समय वे सीआईडी के प्रमुख थे। आरोप लगाया गया कि कुछ वीवीआईपी की अवैध फोन टैपिंग की गई और सरकार बदलते ही रिकॉर्डिंग की सीडीज तोड़ दी गईं।

इसके बाद डीसी शिमला ने सीआईडी  के डीजी की अलमारी सील करवाई। इसके बाद सरकार ने फोन टैपिंग केस की छानबीन शुरू करवाई। डीजीपी पर आरोप था कि 14 सौ फोन टैप किए गए हैं। डीजीपी को अकेले आरोपी बताकर मुकदमा दर्ज हुआ। भंडारी को डीजी पुलिस से हटाकर डीजी होमगार्ड तैनात किया गया।

वीरभद्र सरकार में सरकारी तंत्र बेहाल 
भंडारी ने कहा कि कांग्रेस के मौजूदा कार्यकाल में सिस्टम का स्तर जितना गिरा है, उतना पहले कभी नहीं गिरा। उन्होंने कहा कि पुलिस में तबादले एक सिस्टम के तहत होते हैं, लेकिन अब कोई सिस्टम नहीं है।

उनका कहना था कि सरकार ने एचपीएस रैंक के अफसरों को अहम पदों पर बैठाया, जबकि आईपीएस मुख्यालय में लगाए रखे। भंडारी ने कहा कि 30 वर्ष की सेवा के बाद आज उनकी स्थिति यह है कि उनकी पेंशन जारी नहीं की गई।

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