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Shimla News: छोटा शिमला में बनेगा अंडर पास, डेंटल कॉलेज का बदला नाम
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मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी, अंडरपास बनाने से पैदल चलने वालों को मिलेगी सुविधा
राजीव गांधी डेंटल कॉलेज के नाम से जाना जाएगा कॉलेज एवं अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। छोटा शिमला में अंडरपास बनने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। इससे यहां पर लोगों को चलने में आसानी हो जाएगी। वर्तमान में भी भी भीड़भाड़ वाले स्थान को देखते हुए सचिवालय की दीवार को भी पीछे किया जाने का कार्य चला हुआ है ताकि लोगों को चलने में ओर आसानी हो जाए। इसी के चलते मंत्रिमंडल में अंडरपास का निर्माण करने का निर्णय लिया है ताकि लोग आसानी से आवाजाही कर सके। वहीं, प्रदेश के डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के नाम में भी बदलाव किया है। अब राजीव गांधी डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के नाम से जाना जाएगा। दंत कॉलेज दांतों में दर्द, मसूड़ों की बीमारी, टेढ़े-मेढ़े दांतों और मुंह से जुड़ी दूसरी समस्याओं के उपचार के लिए लंबे समय से सेवाएं दे रहा है। वर्ष 1994 में 20 विद्यार्थियों की प्रवेश क्षमता के साथ शुरू हुए इस संस्थान में अब बीडीएस और एमडीएस की पढ़ाई के साथ दंत चिकित्सा की विभिन्न विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। वर्तमान में कॉलेज में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। कॉलेज के लिए डेंटल चेयर, डेंटल इम्प्लांट किट, ऑपरेशन थिएटर के लिए उपकरण, ओरल पैथोलॉजी विभाग में माइक्रोस्कोप और ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी विभाग समेत अन्य सुविधा उपलब्ध है। कॉलेज में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी, प्रोस्थोडॉन्टिक्स, ऑर्थोडॉन्टिक्स, पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री, पीरियडॉन्टिक्स, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एवं एंडोडॉन्टिक्स और पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री शामिल हैं। मुस्कान परियोजना के तहत 65 वर्ष और इससे अधिक आयु के बुजुर्गों को मुफ्त कृत्रिम दांत लगाने की सुविधा भी दी जाती है।
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राजीव गांधी डेंटल कॉलेज के नाम से जाना जाएगा कॉलेज एवं अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। छोटा शिमला में अंडरपास बनने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। इससे यहां पर लोगों को चलने में आसानी हो जाएगी। वर्तमान में भी भी भीड़भाड़ वाले स्थान को देखते हुए सचिवालय की दीवार को भी पीछे किया जाने का कार्य चला हुआ है ताकि लोगों को चलने में ओर आसानी हो जाए। इसी के चलते मंत्रिमंडल में अंडरपास का निर्माण करने का निर्णय लिया है ताकि लोग आसानी से आवाजाही कर सके। वहीं, प्रदेश के डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के नाम में भी बदलाव किया है। अब राजीव गांधी डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के नाम से जाना जाएगा। दंत कॉलेज दांतों में दर्द, मसूड़ों की बीमारी, टेढ़े-मेढ़े दांतों और मुंह से जुड़ी दूसरी समस्याओं के उपचार के लिए लंबे समय से सेवाएं दे रहा है। वर्ष 1994 में 20 विद्यार्थियों की प्रवेश क्षमता के साथ शुरू हुए इस संस्थान में अब बीडीएस और एमडीएस की पढ़ाई के साथ दंत चिकित्सा की विभिन्न विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। वर्तमान में कॉलेज में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। कॉलेज के लिए डेंटल चेयर, डेंटल इम्प्लांट किट, ऑपरेशन थिएटर के लिए उपकरण, ओरल पैथोलॉजी विभाग में माइक्रोस्कोप और ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी विभाग समेत अन्य सुविधा उपलब्ध है। कॉलेज में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, ओरल मेडिसिन एवं रेडियोलॉजी, प्रोस्थोडॉन्टिक्स, ऑर्थोडॉन्टिक्स, पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री, पीरियडॉन्टिक्स, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एवं एंडोडॉन्टिक्स और पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री शामिल हैं। मुस्कान परियोजना के तहत 65 वर्ष और इससे अधिक आयु के बुजुर्गों को मुफ्त कृत्रिम दांत लगाने की सुविधा भी दी जाती है।