Shimla News: 300 भवन मालिकों को नगर निगम का नोटिस, रिहायशी इलाकों में दुकानों-ढाबों पर कार्रवाई की तैयारी
शिमला नगर निगम ने रिहायशी क्षेत्रों में बिना अनुमति संचालित दुकानों और ढाबों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। 300 से अधिक भवन मालिकों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर भवन के नक्शे और संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर 27 जुलाई तक सर्वे चलेगा। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करवाई जा सकती हैं।
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राजधानी के रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति दुकानें, ढाबे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे 300 भवन मालिकों से नगर निगम ने रिकॉर्ड तलब कर लिया है। निगम ने इन्हें नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर नक्शे समेत जवाब देने को कहा है। पांच दिन के भीतर नगर निगम की टीमों ने 18 वार्डों में जाकर 300 से ज्यादा भवन मालिकों को यह नोटिस थमाए हैं। इसमें पूछा है कि आखिर किसकी अनुमति लेकर रिहायशी क्षेत्र में बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसका जवाब नक्शे समेत नगर निगम की वास्तुकार शाखा में जमा करना होगा करनी होंगी। अचानक नोटिस जारी करने और रिकॉर्ड तलब किए जाने से शहर में हड़कंप मच गया है।
लोग पार्षदों से राहत की मांग कर रहे हैं। निगम के कई पार्षद भी मंगलवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचे और इस कार्रवाई को लेकर जानकारी ली। समरहिल वार्ड के पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने पूछा कि निगम किस नियम के तहत यह कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में कई लोग दशकों पुरानी दुकानें चला रहे हैं। ऐसे में अब निगम इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा। निगम प्रशासन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए शहर के रिहायशी क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इनमें बने कितने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, इसे चिह्नित किया जा रहा है। नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि 27 जुलाई तक यह सर्वे जारी रहेगा। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
वहीं शहर में सड़कों से सटे भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर मालिकों को राहत मिल सकती है। नगर निगम के अनुसार, सड़क से सटे इलाके या भवन पहले ही डेवलपमेंट प्लान में कमर्शियल एरिया के रूप में दर्शाए हैं। इन पर आदेशों का असर नहीं होगा। हालांकि जो रिहायशी कॉलोनियां हैं, वहां भवनों में चल रही दुकानों और ढाबों को बंद करना पड़ सकता है।
नगर निगम के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में तीन महीने के भीतर रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगमों को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। शिमला शहर में जांच के बाद जिन रिहायशी इलाकों में दुकानें, ढाबे खुले मिलेंगे, उन्हें बंद करना होगा। लोगों की परेशानी इसलिए भी बढ़ने वाली है क्योंकि यह लोग चेंज ऑफ लैंड यूज के तहत भी नगर निगम से अनुमति नहीं ले पाएंगे। रिहायशी इलाकों में इसकी मंजूरी लेने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निगम रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की छूट नहीं देता। यदि मंजूरी देनी भी है तो भवन मालिक को फायर एनओसी लेने समेत नक्शा पास करवाने जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
रिहायशी क्षेत्रों में कुल कितनी दुकानें, ढाबे आदि खुले हैं, इसकी जानकारी नगर निगम ने कूड़ा शुल्क और टैक्स शाखा से ली है। इनकी आईडी से नगर निगम के पास पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध हो गया है। अब चार टीमें इन आईडी और डेवलपमेंट प्लान के मैप को साथ लेकर वार्डों का निरीक्षण कर रही हैं। इसमें जो भवन बंद मिलेंगे, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। ऐसे में जो लोग सही जानकारी नहीं देंगे और रिकॉर्ड छिपाएंगे, उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
राजधानी में सात अजूबों की कलाकृतियां स्थापित करने को लेकर जारी विवाद के बीच मंगलवार को पूर्व पार्षद किमी सूद की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल महापौर सुरेंद्र चौहान से मिला। इस दौरान पूर्व पार्षद ने अपना मांगपत्र महापौर को सौंपा और अपने सुझाव दिए।
उन्होंने कहा कि इससे पार्क की ऐतिहासिक पहचान और प्राकृतिक आकर्षण बना रहेगा। सुझाव दिया कि सात अजूबों की प्रतिकृतियां शहर के बाहरी क्षेत्रों में लगाई जानी चाहिए। इससे उन क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ेगा और मालरोड की मूल पहचान भी सुरक्षित रहेगी। शहर का विकास संतुलित तरीके से होना चाहिए। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि शहर के सौंदर्यीकरण के लिए ही इन्हें स्थापित किया जा रहा है। इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। कहा कि कुछ लोग इसमें राजनीति कर रहे हैं। यह गलत है। निगम दो अजूबों को पार्क में स्थापित करेगा। इसकी प्रक्रिया अभी चल रही है।