फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Shimla Municipal Corporation suffers setback, ordered to pay Rs 1.11 lakh with interest

Shimla News: नगर निगम शिमला को झटका, 1.11 लाख ब्याज सहित चुकाने के आदेश

Sat, 26 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
Shimla Municipal Corporation suffers setback, ordered to pay Rs 1.11 lakh with interest
नाले के निर्माण में सुनाया अहम फैसला
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने नगर निगम शिमला को एक ठेकेदार की बकाया राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के 2007 के फैसले को खारिज करते हुए ठेकेदार महेश सूद के पक्ष में 1,11,968 रुपये की रिकवरी डिक्री पारित की है।
अदालत ने आदेश दिया है कि मुकदमा दायर करने की तिथि से लेकर राशि की वास्तविक वसूली तक निगम को छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज और मुकदमे का खर्च भी चुकाना होगा। मामले के अनुसार नगर निगम शिमला ने 28 मई 2001 को ठेकेदार महेश सूद को टुटू स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास रेलवे लाइन से नालागढ़ रोड तक नाले के जीर्णोद्धार एवं सुधार का कार्य आवंटित किया था। कार्य पूरा करने के लिए एक महीने का समय तय किया था लेकिन भारी बारिश और मजदूरों की कमी के कारण निगम ने आवेदन की समय सीमा बढ़ाकर 30 नवंबर 2001 कर दी थी। ठेकेदार ने यह कार्य 10 अक्तूबर 2001 को ही पूरा कर दिया था। इसके बावजूद निगम ने ठेकेदार का अंतिम बिल और 6,900 रुपये की धरोहर राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) रोक ली थी।
विज्ञापन


ठेकेदार ने बकाया 1,05,068 रुपये और सिक्योरिटी राशि की वसूली के लिए वर्ष 2005 में दीवानी मुकदमा दायर किया था। वर्ष 2007 में सिविल जज कोर्ट नंबर-6 शिमला ने ठेकेदार का दावा खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ ठेकेदार ने जिला अदालत में अपील की। पूर्व में जिला अदालत ने अपील स्वीकार की थी लेकिन नगर निगम द्वारा हाईकोर्ट में नियमित द्वितीय अपील दायर करने के बाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में मामले को नए सिरे से फैसले के लिए जिला अदालत को वापस भेजा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुनवाई के दौरान नगर निगम ने दलील दी थी कि ठेकेदार ने समय पर कार्य पूरा नहीं किया और शेष कार्य विभाग ने खुद करवाया था।


निगम ने यह भी कहा कि ठेकेदार को चेक के जरिये भुगतान कर पूरा हिसाब चुकता कर दिया गया था। हालांकि जिला अदालत ने रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के बाद पाया कि मेजरमेंट बुक में कार्य पूरा होने की तिथि 10 अक्तूबर 2001 दर्ज है और निगम विभागीय स्तर पर शेष कार्य करवाने का कोई भी साक्ष्य या खर्च का ब्योरा पेश नहीं कर सका। अदालत ने सभी साक्ष्यों के आधार पर ठेकेदार की अपील मंजूर करते हुए नगर निगम शिमला को संपूर्ण बकाया राशि ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article