इतिहास बना गांधी हत्या मुकदमे का गवाह कोर्ट
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मिंटो कोर्ट भवन के राख होने से महात्मा गांधी और उनके हत्यारे नात्थू राम गोडसे से जुड़ा इतिहास भी खत्म हो गया। तत्कालीन समय में पीटरहॉफ के तहत ही मिंटो कोर्ट आता था।
यह भवन गोडसे के खिलाफ गांधी हत्या मामले में सुनवाई का गवाह रहा। गांधी की हत्या के बाद देश में संयुक्त पंजाब की हाईकोर्ट इसी ऐतिहासिक भवन में थी।
यहां 2 मई 1949 को महात्मा गांधी की हत्या की सुनवाई शुरू हुई। गोडसे को मिंटो कोर्ट में बतौर आरोपी पेश किया गया। 21 जून, 1949 को गोडसे को फांसी की सजा सुनाई गई।
इसके बाद अंबाला जेल में गोडसे को फांसी पर लटकाया गया था। 1968 में मिंटो कोर्ट को दीपक प्रोजेक्ट (बीआरओ) के सुपुर्द किया गया। तब से यहां इनका कार्यालय चल रहा है।
आग ने कई किए कई सवाल सवाल खड़े
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दफ्तर (दीपक प्रोजेक्ट) में शनिवार रात लगी आग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। टेलीफोन एक्सचेंज उपकरण की खरीदारी पर सीबीआई ने यहां छापामारी की थी और रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया था।
बीआरओ का लेखाजोखा जिस कमरे में था, वह कमरा भी आग की चपेट में आ गया। दफ्तर में सिर्फ पांच फाइलें बची हैं। कंप्यूटर में फीड डाटा आग से नष्ट हो गया है।
सीबीआई ने फरवरी 2012 में ये मामला अपने शिमला थाने में दर्ज किया था। इसमें सीमा सड़क संगठन में टेलीफोन उपकरण की खरीद और अन्य वस्तुओं की खरीदारी में अनियमितताएं बरतने के आरोप थे।
मामला दर्ज करने के बाद सीबीआई ने इस भवन से रिकॉर्ड कब्जे में लिया था। अक्तूबर 2013 में इस मामले का चालान कोर्ट में पेश किया गया। इसमें दो सैन्य अधिकारियों को चार्जशीट किया गया।
इसी दफ्तर से बीआरओ की सड़क निर्माण का पूरा कंट्रोल
हिमाचल में इस वक्त बीआरओ के 20 से ज्यादा सड़कों पर काम चल रहा है। जेएंडके की सीमा तक बीआरओ डबल लेन बनाने पर काम कर रहा है।
सड़कों के निर्माण कार्य का पूरा कंट्रोल इस दफ्तर से होता था। प्रतिदिन रोड संबंधित प्रोग्रेस रिकॉर्ड दिल्ली और चंडीगढ़ भेजा जाता है।
पीटरहॉफ भवन के तहत मिंटो कोर्ट पूर्व में आता था, इसी पीटरहॉफ भवन में 1981 में भयंकर आग लगी थी। उस समय पीटरहॉफ प्रदेश का राजभवन था। आग लगने के समय भवन में मौजूद तत्कालीन राज्यपाल अमीनुद्दीन अहमद खान बाल- बाल बचे थे।
इस घटना के बाद राजभवन ब्रेनस कोर्ट में शिफ्ट किया गया। पीटरहॉफ भवन का 1991-92 में पुनर्निर्माण कर इसे हिमाचल प्रदेश स्टेट गेस्ट हाउस बनाया गया। शिमला में ब्रिटिश कार्यकाल की आज भी 91 ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं।