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शिमला: किशाऊ परियोजना पर 15 को लगेगी मुहर, छह राज्यों के बीच होगा समझौता; दिल्ली को मिलेगा हिमाचल का पानी

Mon, 14 Sep 2026 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 14 Sep 2026 05:58 AM IST
सार

ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी राज्यों के प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक करार को अंतिम रूप देंगे।
 

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Shimla: Kishau project to get the green light on the 15th; agreement to be signed among six states.
यहां प्रस्तावित है परियोजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की महत्वपूर्ण किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण की दिशा में 15 सितंबर को नई दिल्ली में बड़ा कदम उठाया जाएगा। ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी राज्यों के प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक करार को अंतिम रूप देंगे।

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हिमाचल प्रदेश की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आरडी नजीम बैठक में भाग लेंगे। वह परियोजना में हिमाचल के हितों और राज्य की भूमिका को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। समझौता हस्ताक्षर समारोह 15 सितंबर को दोपहर 12 से 1 बजे तक कर्तव्य भवन नई दिल्ली में आयोजित होगा।
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करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना ऊपरी यमुना बेसिन की सबसे बड़ी जल एवं ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी। परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे बहुउद्देशीय लाभ सुनिश्चित करना है।
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समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले दोनों राज्य हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान देंगे। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को परियोजना के जल घटक की लागत वहन नहीं करनी पड़ेगी।


इससे दोनों पर्वतीय राज्यों को आर्थिक राहत मिलेगी और बिजली उत्पादन से अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त होगा। काफी समय से लंबित इस परियोजना पर राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

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