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रहें बेफिक्र, सुरक्षित है शिमला-कालका रेलवे ट्रैक
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 25 Dec 2015 10:25 PM IST
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शिमला-कालका रेल ट्रैक पूरी तरह से सुरक्षित है। कुछ हफ्ते पहले इस ट्रैक पर हुए हादसे का कारण ओवरस्पीड था। देश में 77 रेलवे की लाइनों को डबलिंग और ट्रिपलिंग करने के प्रोजेक्टों का प्रस्ताव है। इस पर जल्द काम किया जाएगा। इन प्रोजेक्टों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बजट का भी पूरा प्रबंध है। भविष्य में इन प्रोजेक्टों के काम पूरा होने से रेलों के जाम में सुधार आएगा।
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साथ ही यात्रियों का समय भी बचेगा। यह जानकारी रेलवे बोर्ड के सचिव गंगाराम अग्रवाल ने शिमला रेलवे स्टेशन कार्यालय में पत्रकारों के साथ औपचारिक बातचीत में कही। हिमाचल में रेलवे के विस्तार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में रेलवे बोर्ड के डीआरएम अंबाला दिनेश कुमार ने कहा कि पंजाब के लोगों के कारण चंडीगढ़ से बद्दी रेल ट्रैक और बिलासपुर-भानुपल्ली योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
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बताया कि इन दोनों रेलवे ट्रैक का सर्वे हो चुका है। जिन लोगों की निजी भूमि से रेलवे पटरी बिछाई जानी है, वहां अधिकांश लोग जमीन देने से मना कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड के अधिकारी जमीन मालिकों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि यह प्रोजेक्ट जल्द सिरे चढ़ सके। इस दौरान सीनियर डीसीएम अंबाला प्रवीण गौर, सीनियर डीईएन अंबाला डीएस मीणा, सीनियर डीएमई विकास आनंद और रामनिवास और अलोक कुमार मौजूद रहे।
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ओवर स्पीड से हुआ था रेल हादसा
रेलवे बोर्ड के सचिव ने बताया कि कुछ दिन पहले शिमला-कालका रेल ट्रैक पर हुआ हादसा ओवरस्पीड की वजह से हुआ था। शिमला के रेलवे स्टेशन में शुक्रवार को बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता रेलवे बोर्ड सचिव गंगाराम अग्रवाल ने की। रेलवे बोर्ड सचिव और डीआर एम अंबाला दिनेश कुमार ने शुक्रवार को पटरियों और पुलों के रखरखाव का निरीक्षण किया।
उन्होंने पाया कि सुरक्षा के नजर से रेल और रेलवे ट्रैक पूरी तरह महफूज हैं। यात्रियों को हर तरह की उचित सुविधाएं दी जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान एक जगह पर रास्ते में उन्हें कूड़े के ढेर नजर आए, इसकी सफाई के तुरंत आदेश दिए गए। बताया कि पटरियों और पुलों के रखरखाव की रेलवे बोर्ड के मंडल से बात भी की है।
देश की वित्तीय हालात कमजोर
रेलवे बोर्ड के सचिव ने कहा कि देश की वित्तीय हालत कमजोर है। देश में रेलवे के बड़े प्रोजेक्टों की अधिक मात्रा में जरूरत है। साथ ही स्टाफ की ट्रेनिंग और तय शेडयूल के मुताबिक ट्रेनों की आवाजाही हो।