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Shimla News: शिमला के जंगलों में 440 वनस्पतियां और 300 वन्य जीव प्रजातियां

Thu, 21 May 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2026 11:59 PM IST
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Shimla forests have 440 plant and 300 wildlife species.
देवदार और बान के पेड़ दे रहे शुद्ध ऑक्सीजन, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से संरक्षण भी जरूरी
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150 साल पुराने देवदार के पेड़ भी हैं जंगलों में मौजूद

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस विशेष
दीक्षा सरोय
शिमला। रिज मैदान पर टहलते हुए जो ठंडी हवाएं आनंद देती हैं उसके पीछे हैं शिमला के जंगलों में पाई जाने वाली 440 वनस्पति प्रजातियां। इसके अलावा 300 वन्य जीव भी शिमला जिले के जंगलों में पाए जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाएगा। ऐसे में शिमला के जंगलों की प्राकृतिक सुंदरता को नहीं नकारा जा सकता है। शिमला के पास अंग्रेजों के समय लगाए 150 साल पुराने देवदार आज भी ग्रीन गार्ड बनकर खड़े हैं। लेकिन पर्यावरण बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा इन पर भी कम नहीं है। इसलिए इन्हें संरक्षित करना जरूरी है। वन विभाग के मुताबिक शिमला वन वृत्त में 440 से ज्यादा वनस्पति प्रजातियां रिकॉर्ड में हैं। इनमें देवदार, कैल, बान, मोरू, बुरांश, थुनेर और दर्जनों औषधीय पौधे शामिल हैं। जीवों की बात करें तो तेंदुआ, हिमालयी काला भालू, घोरल, काकड़ हिरण के साथ हिमालयी मोनाल, वेस्टर्न ट्रैगोपान, कोकलास फीजेंट पक्षियों की प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। तालरा, चायल और शिमला वाटर कैचमेंट सेंक्चुअरी इनका घर है। 1864 के बाद शिमला को समर कैपिटल बनाते वक्त अंग्रेजों ने रिज, जाखू और वाइसरीगल लॉज के आसपास सैकड़ों देवदार लगाए थे। 150 साल बाद भी इनमें से कई पेड़ ऊंचे खड़े हैं। एक वयस्क देवदार साल में 22 किलो कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है। यह हेरिटेज ट्री शिमला का तापमान 2-3 डिग्री कम रखते हैं। वाइल्ड लाइफ के शिमला डिवीजन के डीएफओ शाहनवाज भट्ट ने कहा कि शिमला में जितनी भी पक्षियों और जंगली जानवरों प्रजातियां हैं उनके संरक्षण के लिए विभाग निरंतर कार्यरत है।
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हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक विनीत जिस्टू ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने चाहिए और शिमला की जलवायु के लिए सबसे अच्छे बान और देशी प्रजातियाें के पौधे हैं। हमें बढ़ते तापमान को ध्यान में रखना चाहिए और इसी तरह के पौधे लगाने चाहिए ताकि तापमान को सामान्य रखा जा सके। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि सभी इस मानसून करीब तीन पौधे जरूर रोपें जिनकी वह जिम्मेदारी ले सकें।
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पक्षियों की यह प्रजातियां भी हैं शिमला में
शिमला में पक्षियों की 300 प्रजातियों हैं। इनमें पहाड़ी तीतर, भारतीय मोर, काला तीतर, जंगली मुर्गा, चीर तीतर, ओरिएंटल कछारी यानी फाख्ता, नीला कबूतर, चित्तीदार फाख्ता, एशियाई कोयल, बड़ा-बाज-कुक्कू, हिमालयी पपीहा, हिमालयी गिद्ध, काली चील, पहाड़ी स्कॉप्स उल्लू, बड़ा बसंता, हिमालयी कठफोड़वा, भूरे माथे वाला कठफोड़वा, केस्ट्रल, गुलाबी कंठी तोता शामिल है। इसके अलावा लंबी पूंछ वाला मिनिवेट, सफेद गले वाली नाचनी और यूरेशियाई जय के साथ कई खूबसूरत प्रजातियां शामिल हैं। इसके बलावा करीब 15 मामल यानी जानवरों में तेंदुआ, भालू, बंदर बन बिल्ला, शैल, साही, ऊज और फ्योंटा सहित अन्य शामिल हैं। वहीं सरीसृपों में गुनेरा, पानी वाला सांप, डोडू, चित्तिदार सांप, मक्की सांप, काले सिरा गुलबंद सांप, पहाड़ी छिपकली और छोटी छिपकली शामिल है।
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