Shimla: आग में जले मकान पर बीमा कंपनी को बड़ा झटका, उपभोक्ता आयोग ने 1.25 करोड़ रुपये क्लेम देने का दिया आदेश
शिमला जिला उपभोक्ता आयोग ने आग से नष्ट हुए मकान के बीमा दावे पर बीमा कंपनी को 1.25 करोड़ रुपये का क्लेम देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 9 प्रतिशत ब्याज, 75 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश भी दिए हैं। आदेश का पालन 45 दिनों में करना होगा।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को मकान जलने के मामले में पीड़ित को बीमा क्लेम देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित को 1.25 करोड़ रुपये का क्लेम देने का आदेश दिया है। इस क्लेम राशि पर शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही अदालत ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 75,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये जुर्माने के एवज में देने का आदेश दिया है। कंपनी को यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करना होगा।
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी का रुख पूरी तरह से अनुचित था। आयोग ने कहा उपभोक्ता ने आग से हुए नुकसान से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज पहले ही उपलब्ध करवा दिए थे। कंपनी की ओर से दस्तावेजों की मांग करना केवल क्लेम को टालने की एक चाल थी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियों को तकनीकी आधार पर वास्तविक दावों को खारिज नहीं करना चाहिए। परिवार के अन्य सदस्यों ने शपथ पत्र देकर स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें क्लेम मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए कंपनी का यह तर्क भी खारिज कर दिया था कि उपभोक्ता को केवल हिस्सा मिलना चाहिए।
अपीलीय प्राधिकरण शिमला यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने ग्लेन मैरी विला में किरायेदार की बेदखली से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मकान मालिक को भवन की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए परिसर की आवश्यकता है तो किरायेदार को खाली करना होगा। साथ ही किरायेदार को बकाया किराया जोकि 1,18,776 रुपये निर्धारित किया था का भुगतान 30 दिन के भीतर करने का आदेश दिया है। मकान मालकिन कुसुम सूद ने इस बारे याचिका दायर कर कहा था कि उनका भवन लगभग 100 साल पुराना है। इसमें मरम्मत, सीवरेज लाइनों को बदलने और अन्य महत्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता है। अपीलकर्ता अनिल अरोड़ा ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। संवाद
एनडीपीएस मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। विशेष सत्र न्यायाधीश फैमिली कोर्ट शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने सुनवाई के दौरान आरोपी के बार-बार अदालत में पेश न होने और ट्रायल में देरी के कारणों को आधार बनाते हुए यह सख्त रुख अपनाया है। आरोपी दिलबर खान के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत ट्रायल चल रहा है। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी पहले भी जमानत शर्तों का उल्लंघन कर चुका है। आरोपी कई बार सुनवाई की तारीखों पर अदालत में पेश नहीं हुआ था। अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। आरोपी ने दलील दी थी कि आरोपी की पत्नी अगले एक सप्ताह में बच्चे को जन्म देने वाली है। आरोपी ने तर्क दिया कि उसकी अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी की ओर से परिवार की स्थिति के दावों को पुष्ट करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।