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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Shanta Kumar Statement, Only Nehru was Responsible for India Defeat againest China in 1962.

'चीन युद्ध में भारत की हार के लिए सेना नहीं, नेहरू थे जिम्मेदार'

Thu, 03 Nov 2016 09:09 AM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला Updated Thu, 03 Nov 2016 09:09 AM IST
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Shanta Kumar Statement, Only Nehru was Responsible for India Defeat againest China in 1962.

अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा के बाद तिब्बत के 14वें धर्मगुरु दलाईलामा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे को केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद तिलमिलाए चीन के कूटनीतिक हंगामे के बीच भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सीएम शांता कुमार ने अपनी पुस्तक हिमालय पर लाल छाया के जरिये 1962 में भारत-चीन युद्ध में हार का ठीकरा सेना की बजाय तत्कालीन नेहरू सरकार पर फोड़ा है।

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वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद हिमालय पर लाल छाया शीर्षक से लिखी गई पुस्तक का विमोचन शांता कुमार ने 50 वर्ष बाद चीन के कथित अलगाववादी और दुश्मन दलाईलामा से करवाकर अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय राजनीति में सियासी हंगामे के आसार खड़े कर दिए हैं।

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'नेहरू सरकार की लापरवाही से हुई थी हार'

Shanta Kumar Statement, Only Nehru was Responsible for India Defeat againest China in 1962.

भाजपा नेता शांता ने हिमालय पर लाल छाया शीर्षक की पुस्तक में 1962 के भारत चीन युद्ध में भारत की करारी हार के लिए तत्कालीन पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकार को दोषी ठहराया है।

शांता ने पुस्तक में लिखा है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास की वह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जिसने पर्वताधिराज हिमालय को लहूलुहान कर दिया था। वर्ष 1962 में भारत पर पड़ोसी देश चीन ने आक्रमण कर दिया था।

इसमें भारतीय सेना की शर्मनाक पराजय हुई थी। यह हार सेना की नहीं हुई थी, बल्कि तत्कालीन सरकार की लापरवाही से हुई थी। भारत सरकार पंचशील के भ्रम में और हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे में मस्त रही और पड़ोसी मुल्क ने आक्रमण कर दिया।

जिस सेना ने कई युद्घ जीते वही चीन से हार गई

Shanta Kumar Statement, Only Nehru was Responsible for India Defeat againest China in 1962.

340 पन्नों की इस पुस्तक में 28 अध्याय हैं। इनमें चीन के साम्राज्यवादी विस्तार के इतिहास से लेकर तिब्बत की हत्या, भारत-चीन सीमा विवाद, हार क्यों और किसकी, विदेशनीति, वर्तमान और भविष्य जैसे महत्वपूर्ण अध्याय हैं।

शांता ने लिखा है कि जिस सेना के पराक्रम से मित्र देशों ने दो विश्व युद्धों में विजय हासिल की थी। भारत की वही बहादुर सेना 1962 में चीन से बुरी तरह परास्त हो गई। उधर,  सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान और चीन के साथ बिगड़े सियासी संबंधों के बीच पुस्तक के विमोचन अवसर पर शांता ने वर्तमान में चीन और पाकिस्तान की दोस्ती को भारत के सबसे बड़ा खतरा बताया।

उन्होंने इसके लिए भारत सरकार को सचेत किया है। वहीं, चीन की बर्बरता की बयां करने वाली शांता की पुस्तक के विमोचन का आग्रह स्वीकार कर दलाईलामा ने भी चीन को मंच से कूटनीतिक करारा जवाब दिया है।

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