सांसद ने शाह को लिखी चिट्ठी, सर शर्म से झुका
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व्यापम और राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक हुए घोटाले पर भाजपा सांसद शांता कुमार ने अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ नेता ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर कहा कि आज अखबारों के पहले पेज और सभी चैनलों जिस तरह की कहानियां लिख रहे हैं उससे किसी भी भारतीय का निराश हताश होना स्वभाविक है।
भाजपा के कार्यकर्ता आज सिर झुका कर चल रहे हैं। भाजपा सांसद शांता कुमार ने अमित शाह को लिखे दो पेज के पत्र में कहा बड़ी शान के साथ पार्टी अपनी एक साल की उपलब्धियों का जश्न मना रही है कि अचानक राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक भाजपा की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही है। मप्र के व्यापम घोटाले ने हम सब का सिर शर्म से नीचा कर दिया है।
सत्ता में आने के बाद धूमिल हुई पार्टी की छवि
उन्होंने लिखा- मुझे याद है 1951-52 में भारतीय जनसंघ बनने के बाद सबसे अधिक जोर मूल्य आधारित राजनीति पर दिया जाता था। हम धीरे धीरे सत्ता में आए। सत्ता में आने पर बहुत कुछ बदला। मूल्यों की राजनीति से भी कहीं कहीं सत्ता की राजनीति में समझौते करने शुरू किए। उस सब के बाद भी हम बाकी राजनीतिक दलों की तुलना में अलग दिखते रहे।
लेकिन सत्ता की राजनीति में अलग पहचान वाली हमारी पार्टी की पहचान को धीरे-धीरे धूमिल करने की कोशिश अवश्य की। उन्होंने आगे लिखा- केन्द्र में कांग्रेस की 10 साल की सरकार से देश की जनता निराश थी। ऐसे में नरेन्द्र मोदी के व्यक्तिगत जीवन का प्रकाश और गुजरात के विकास की कहानी सब ओर फैली। उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने से पूरे देश में आशा की किरण जगी।
हमारी गलती कि जानते हुए भी नहीं रोका
शांता कुमार ने कहा कि व्यापम घोटाले के आरोप से पार्टी की छवि पर दाग लग रहा है। हमारी ही गलती रही कि समय रहते हुए इन मामलों पर पता होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसका खामियाजा पार्टी को देश भर में चुकाना पड़ रहा है।
शांता ने कहा कि पार्टी पर कई प्रदेशों में आरोप लग रहे हैं। अगर समय रहते इन आरोपों की जांच की गई होती तो आज हालात कुछ और होते। अगर हम इसे रोकने में सफल न रहे तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा। शांता कुमार के इस पत्र बम से पार्टी के भीतर बड़ी खलबली मच सकती है। वहीं, शांता खुद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं। अब देखना है कि पार्टी उनकी इन बातों को कैसे लेती है।
लोकपाल की तर्ज पर संगठन में बने आचार समिति
शांता ने अपने पत्र में कहा है कि संगठन को सुचारु रुप से चलाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी नई आचार समिति की गठन करे। उन्होंने सुझाव दिया कि संगठन में आचार समिति का गठन किया जाना चाहिए।
इस समिति में पार्टी के ऐसे अनुभवी कार्यकर्ताओं को लिया जाए, जिन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया हो। केंद्र और राज्य स्तर पर यह समिति एक लोकपाल का काम करे। समिति में इतना साहस होना चाहिए कि सत्ता में बैठे नेताओं को सही समय पर उनकी गलती का अहसास करवा सके।