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Shimla News: फीस वृद्धि के खिलाफ एचपीयू में एसएफआई का धरना प्रदर्शन
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फीस में कर दी है 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी
छात्र संगठन ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस वृद्धि के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की विश्वविद्यालय इकाई ने बुधवार को प्रदर्शन किया। संगठन के सचिव मुकेश कुमार और अध्यक्ष योगराज सिंघानिया ने 28 मार्च 2026 को कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में लिए फीस बढ़ोतरी के फैसले को छात्र विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
धरने के दौरान मुकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 से 15 प्रतिशत तक फीस में वृद्धि की है, जबकि संबद्ध महाविद्यालयों में इससे भी अधिक बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा परीक्षा फीस में करीब 40 प्रतिशत तक इजाफा किया है जिससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। अध्यक्ष योगराज सिंघानिया ने कहा कि इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य शिक्षा को सुलभ बनाना था लेकिन वर्तमान निर्णय इसके विपरीत है और शिक्षा को व्यवसाय की तरह संचालित किया जा रहा है।
एसएफआई नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय हर साल फीस से करीब 90 करोड़ रुपये एकत्र करता है इसके बावजूद छात्रों को पर्याप्त कक्षाएं और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। विवि प्रशासन का तर्क है कि प्रदेश सरकार से मिलने वाले बजट में कटौती के कारण आय के अन्य स्रोत बढ़ाने के लिए फीस में वृद्धि की गई है। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन विश्वविद्यालय और प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन छेड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
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छात्र संगठन ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस वृद्धि के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की विश्वविद्यालय इकाई ने बुधवार को प्रदर्शन किया। संगठन के सचिव मुकेश कुमार और अध्यक्ष योगराज सिंघानिया ने 28 मार्च 2026 को कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में लिए फीस बढ़ोतरी के फैसले को छात्र विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
धरने के दौरान मुकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 से 15 प्रतिशत तक फीस में वृद्धि की है, जबकि संबद्ध महाविद्यालयों में इससे भी अधिक बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा परीक्षा फीस में करीब 40 प्रतिशत तक इजाफा किया है जिससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। अध्यक्ष योगराज सिंघानिया ने कहा कि इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य शिक्षा को सुलभ बनाना था लेकिन वर्तमान निर्णय इसके विपरीत है और शिक्षा को व्यवसाय की तरह संचालित किया जा रहा है।
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एसएफआई नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय हर साल फीस से करीब 90 करोड़ रुपये एकत्र करता है इसके बावजूद छात्रों को पर्याप्त कक्षाएं और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। विवि प्रशासन का तर्क है कि प्रदेश सरकार से मिलने वाले बजट में कटौती के कारण आय के अन्य स्रोत बढ़ाने के लिए फीस में वृद्धि की गई है। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन विश्वविद्यालय और प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन छेड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
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