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Shimla News: एचपीयू में एसएफआई ने फूंका कंगना का पुतला
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प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित टिप्पणी का विरोध
जनप्रतिनिधियों का दायित्व छात्रों की समस्याएं सुनना : कंगणा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में वीरवार को जंतर-मंतर नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के विरोध में एसएफआई ने प्रदर्शन किया और उनका पुतला फूंका। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
छात्रों ने टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे पूरे छात्र समुदाय का अपमान बताया। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में छात्र एकता, लोकतांत्रिक अधिकारों और शिक्षा बचाने के समर्थन में नारे लगाए गए। एसएफआई एचपीयू इकाई के सचिव मुकेश कुमार और अध्यक्ष आशीष चौहान ने कहा कि देशभर के छात्र शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व छात्रों की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान का प्रयास करना है, न कि उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना। छात्र नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना संविधान प्रदत्त अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हैं। छात्रों ने कंगना रनौत से अपनी कथित टिप्पणी वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि छात्र समुदाय के सम्मान पर इस तरह की टिप्पणियां जारी रहीं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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जनप्रतिनिधियों का दायित्व छात्रों की समस्याएं सुनना : कंगणा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में वीरवार को जंतर-मंतर नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के विरोध में एसएफआई ने प्रदर्शन किया और उनका पुतला फूंका। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
छात्रों ने टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे पूरे छात्र समुदाय का अपमान बताया। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में छात्र एकता, लोकतांत्रिक अधिकारों और शिक्षा बचाने के समर्थन में नारे लगाए गए। एसएफआई एचपीयू इकाई के सचिव मुकेश कुमार और अध्यक्ष आशीष चौहान ने कहा कि देशभर के छात्र शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व छात्रों की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान का प्रयास करना है, न कि उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना। छात्र नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना संविधान प्रदत्त अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हैं। छात्रों ने कंगना रनौत से अपनी कथित टिप्पणी वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि छात्र समुदाय के सम्मान पर इस तरह की टिप्पणियां जारी रहीं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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