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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Selling liquor has cost the corporation dearly; first, the grant was cut, and now, crores of rupees in cess will also be lost.

Shimla News: शराब बेचना निगम को पड़ा महंगा, पहले ग्रांट कटी, अब सेस के करोड़ों रुपये भी नहीं मिलेंगे

Mon, 28 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 11:59 PM IST
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Selling liquor has cost the corporation dearly; first, the grant was cut, and now, crores of rupees in cess will also be lost.
अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
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शराब और बिजली पर लगने वाले सेस के छह करोड़ रुपये पर सरकार ने चलाई कैंची, घाटे की भरपाई के तौर पर काटा पैसा
नगर निगम को पिछले साल चलाने पड़े थे शराब के ठेके
सेस का पैसा काटने पर निगम ने सरकार के सामने रखा पक्ष

अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में रातोंरात ठेके खड़े कर शराब बेचना नगर निगम को महंगा पड़ गया है। शराब बिक्री से हुए घाटे को पूरा करने के लिए पहले नगर निगम की ग्रांट में कटौती की गई। अब शराब और बिजली से मिलने वाले करोड़ों रुपये के सेस पर भी सरकार ने कैंची चला दी है।

सेस (उपकर) से मिलने वाला करीब छह करोड़ रुपये अब नगर निगम को नहीं मिलेगा। शहर में नगर निगम को दिए गए शराब के ठेकों में जो घाटा हुआ है, उसकी क्षतिपूर्ति के तौर पर निगम के खाते से यह पैसा काटा है। हालांकि नगर निगम ने इसका विरोध भी किया है। महापौर सुरेंद्र चौहान ने इस बारे में सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा है। शहर में शराब की बिक्री पर नगर निगम सेस वसूलता है। अभी प्रति बोतल दो रुपये सेस वसूला जा रहा है। सेस की यह राशि आबकारी विभाग के पास जमा होती है। विभाग इसे वित्तीय वर्ष के अंत में नगर निगम को जारी करता है। पिछले कई साल का करीब तीन करोड़ रुपये सेस बिजली बोर्ड से नगर निगम को मिलना था लेकिन सरकार ने इसे शराब बिक्री के घाटे की भरपाई के तौर पर निगम के खाते से काट लिया। इसी तरह बिजली पर लगने वाले प्रति यूनिट दस पैसे सेस की राशि भी नगर निगम को नहीं मिलेगी। बिजली बोर्ड से निगम को पिछले वर्षों का करीब तीन करोड़ रुपये सेस मिलना था लेकिन अब यह पैसा भी नहीं मिलेगा। इस तरह करीब छह करोड़ रुपये अटकने से निगम को नुकसान झेलना पड़ा है। मंगलवार को होने वाली मासिक बैठक में भाजपा इस मुद्दे पर नगर निगम को घेर सकती है।
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सरकार के समक्ष रखा है अपना पक्ष
नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार के निर्देश पर निगम ने शराब के ठेके चलाए हैं। निगम ने लाइसेंस फीस भी जमा करवा दी है। इसके बावजूद सेस का जो पैसा काटा गया है, उसे नगर निगम को देने के लिए सरकार के समक्ष पक्ष रखा है। केंद्र ने भी नगर निगम की ग्रांट में इस बार 33 करोड़ रुपये की कटौती की है। निगम इस बारे में भी केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेगा।
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रातोंरात बनाए थे ठेके, अब झेलना पड़ा घाटा
सरकार के निर्देश पर पिछले साल नगर निगम को ढली, बालूगंज, टुटीकंडी, कनलोग, लंबीधार, मशोबरा, खलीनी, कच्चीघाटी, तारादेवी, शोघी, न्यू शिमला सेक्टर-3, विकासनगर, कसुम्पटी, अपर कैथू, लक्कड़ बाजार बस स्टैंड के दो ठेकों और लक्कड़ बाजार में ठेकों के संचालन का जिम्मा मिला था। इनमें से कई जगह पर निगम की अपनी दुकानें भी नहीं थीं। इसके लिए रातोंरात लोहे के ढांचे खड़े कर ठेके भी तैयार किए गए। बाद में कुछ महीने निगम को शराब की बिक्री करनी पड़ी, जब घाटा हुआ तो निगम के करोड़ों रुपये कट गए।
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