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Shimla News: सिटी, ग्रामीण और तारादेवी डिपो से बाहर होंगी मिडी बसें
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एचआरटीसी की बीओडी के फैसले के लागू होने से तीनों डिपो से बाहर होंगी 55 बसें, झेलनी पड़ सकती हैं दिक्कतें
अकेले शिमला शहर में रोजाना चलती हैं 35 बसें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बीओडी) की बैठक में 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकीं मिडी बसों को बेड़े से बाहर करने का निर्णय लिया है। यह बसें जेएनएनयूआरएम योजना के तहत खरीदी थीं। इस फैसले से शहर की परिवहन व्यवस्था और निगम के शहर तथा जिला शिमला के तीनों डिपो के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
वर्तमान में शिमला शहरी डिपो, शिमला ग्रामीण और तारादेवी डिपो में 55 मिडी बसें चल रही हैं। स्क्रैप पॉलिसी के तहत इन बसों को हटाने से डिपो की सेवाएं प्रभावित होना तय है। हालांकि बीओडी की बैठक में इन मिडी बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उनकी जगह नई बसें खरीदकर बेड़े में शामिल करने की सहमति बनी है। इससे निगम को चरणों में ही इन बसों को हटाना होगा और 11 वर्ष पूरे करने वाली बसें पूरी तरह बाहर होंगी। परिवहन निगम इस फैसले को लागू करने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर रहा है जिसके सार्वजनिक होने पर ही मिडी बसों को हटाने की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
परिवहन निगम के लिए यह आवश्यक होगा कि वह मिडी बसों को बाहर करने से पहले उनके विकल्प के रूप में डिपो को नई बसें उपलब्ध करवाए। ऐसा होने पर ही विभिन्न रूटों पर दी जाने वाली परिवहन सेवाएं सुचारू रूप से चल सकेंगी। राजधानी शिमला के इन तीनों डिपो में सबसे अधिक 35 मिडी बसें शिमला शहरी डिपो के पास हैं, जो स्कूल के समय के अलावा शहर और आसपास के ग्रामीण रूटों पर सेवाएं दे रही हैं। शिमला शहर और इसके साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों पर यह मिडी बसें ही दौड़ती हैं। इन बसों के कलपुर्जों (स्पेयर पार्ट्स) की अनुपलब्धता भी इन्हें बाहर किए जाने का एक मुख्य कारण बताया जा रहा है।
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क्षेत्रीय प्रबंधकों की प्रतिक्रिया
शिमला शहरी डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुर वर्मा ने माना कि उनके डिपो में 35 मिडी बसें हैं, जिनमें से एक खराब है। वहीं शिमला ग्रामीण के क्षेत्रीय प्रबंधक पंकज ठाकुर ने बताया कि उनके डिपो में उपलब्ध 20 मिडी बसों में से दो खराब हैं और बाकी सभी रूटों पर चल रही हैं।दोनों अधिकारियों ने यह भी माना कि इन बसों को तभी हटाया जा सकेगा। इनकी जगह डिपो को नई बसें मिलेंगी, क्योंकि डिपो की परिवहन सेवाएं काफी हद तक इन्हीं बसों पर निर्भर हैं।
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अकेले शिमला शहर में रोजाना चलती हैं 35 बसें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बीओडी) की बैठक में 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकीं मिडी बसों को बेड़े से बाहर करने का निर्णय लिया है। यह बसें जेएनएनयूआरएम योजना के तहत खरीदी थीं। इस फैसले से शहर की परिवहन व्यवस्था और निगम के शहर तथा जिला शिमला के तीनों डिपो के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
वर्तमान में शिमला शहरी डिपो, शिमला ग्रामीण और तारादेवी डिपो में 55 मिडी बसें चल रही हैं। स्क्रैप पॉलिसी के तहत इन बसों को हटाने से डिपो की सेवाएं प्रभावित होना तय है। हालांकि बीओडी की बैठक में इन मिडी बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उनकी जगह नई बसें खरीदकर बेड़े में शामिल करने की सहमति बनी है। इससे निगम को चरणों में ही इन बसों को हटाना होगा और 11 वर्ष पूरे करने वाली बसें पूरी तरह बाहर होंगी। परिवहन निगम इस फैसले को लागू करने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर रहा है जिसके सार्वजनिक होने पर ही मिडी बसों को हटाने की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
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परिवहन निगम के लिए यह आवश्यक होगा कि वह मिडी बसों को बाहर करने से पहले उनके विकल्प के रूप में डिपो को नई बसें उपलब्ध करवाए। ऐसा होने पर ही विभिन्न रूटों पर दी जाने वाली परिवहन सेवाएं सुचारू रूप से चल सकेंगी। राजधानी शिमला के इन तीनों डिपो में सबसे अधिक 35 मिडी बसें शिमला शहरी डिपो के पास हैं, जो स्कूल के समय के अलावा शहर और आसपास के ग्रामीण रूटों पर सेवाएं दे रही हैं। शिमला शहर और इसके साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों पर यह मिडी बसें ही दौड़ती हैं। इन बसों के कलपुर्जों (स्पेयर पार्ट्स) की अनुपलब्धता भी इन्हें बाहर किए जाने का एक मुख्य कारण बताया जा रहा है।
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क्षेत्रीय प्रबंधकों की प्रतिक्रिया
शिमला शहरी डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुर वर्मा ने माना कि उनके डिपो में 35 मिडी बसें हैं, जिनमें से एक खराब है। वहीं शिमला ग्रामीण के क्षेत्रीय प्रबंधक पंकज ठाकुर ने बताया कि उनके डिपो में उपलब्ध 20 मिडी बसों में से दो खराब हैं और बाकी सभी रूटों पर चल रही हैं।दोनों अधिकारियों ने यह भी माना कि इन बसों को तभी हटाया जा सकेगा। इनकी जगह डिपो को नई बसें मिलेंगी, क्योंकि डिपो की परिवहन सेवाएं काफी हद तक इन्हीं बसों पर निर्भर हैं।