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Shimla News: जंगलों में गुच्छी की तलाश शुरू
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आसमानी बिजली ओर बादलों की गड़गड़ाहट से स्वयं उगती है गुच्छी
मार्च से मई तक होता है उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार गुच्छी की तलाश शुरू हो गई है। ग्रामीण सुबह से घर से निकलकर दिन भर जंगलों की खाक छान रहे हैं। जुन्गा के दुर्गा सिंह ठाकुर ने बताया कि गुच्छी के उगने का उचित समय हर वर्ष फाल्गुन से बैशाख माना जाता है। आग से झुलसे जंगल, नमी और घास के बीच गुच्छी मशरूम ज्यादा उगती है।
गुच्छी का वैज्ञानिक नाम मार्किला एस्क्यूपलैंटा है। प्रदेश के शिमला, चंबा और मनाली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गुच्छी अधिक मात्रा में उगती है। इसे स्थानीय भाषा में चेंऊ, रोंटू, छतरी, चटमोर और डूंगरू कहा जाता है।
गुच्छी मशरूम मार्च से मई तक प्राकृतिक रूप से उगती है। बारिश से पहले आसमानी बिजली की तेज किरणों और बादलों के गड़गड़ाहट से गुच्छी जंगलों में स्वयं उगती है। सबसे अहम बात यह है कि गुच्छी बिना खाद और बीज के ही उगती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र तल से 1,500 से 3,500 मीटर की ऊंचाई तक गुच्छी पाई जाती है। इसके लिए 14 से 17 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता रहती है।
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इन दिनों लोग गुच्छियां एकत्रित करने के लिए पूरे दिन जंगलों में डेरा जमाए हुए हैं। लोग सुबह घर से गुच्छी की तलाश में जंगल जा रहा हैं। वे दिन का भोजन भी साथ ले जाते हैं। कई दिनों तक ग्रामीण जंगल में गुच्छी की तलाश में रहते हैं। गुच्छी ढूंढना बेहद मुश्किल काम है। लोगों को विशेषकर फाल्गुन माह में तेज बिजली और बादलों की गड़गड़ाहट होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। गुच्छी को जंगल से लाकर घर पर सुखाया जाता है। इसकी माला पिरोकर घर में टांगी जाती है। सूखकर गुच्छी का वजन बहुत कम रह जाता है।
बता दें कि खुले बाजार में गुच्छी की कीमत 30 से 35 हजार प्रतिकिलो बताई जाती है। भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, इटली सहित कई देशों में इसकी बहुत मांग रहती है।
हृदय रोगियों के लिए संजीवनी
आयुर्वेद विशेषज्ञ डाॅ. अनु शर्मा ने बताया गुच्छी चमत्कारी और औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसमें आयरन, विटामिन बी और सी के अतिरिक्त अमीनो एसिड और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें लो फैट और हाई एंटी ऑक्सिडेंटस फाइबर होते हैं। विशेषकर हृदय रोगियों के लिए गुच्छी मशरूम संजीवनी है। पहाड़ों पर प्रकृति के स्पर्श से उगने वाली गुच्छी आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है। गुच्छियां जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगती है। कुदरत ने न ही इसका बीज बनाया है और न ही उपयुक्त स्थान। एक रिपोर्ट के अनुसार निदेशालय खुंब अनुसंधान केंद्र चंबाघाट सोलन में गुच्छी मशरूम पर वैज्ञानिकों द्वारा शोध किया जा रहा है ताकि इसका उत्पादन घर पर ही हो सके।
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मार्च से मई तक होता है उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार गुच्छी की तलाश शुरू हो गई है। ग्रामीण सुबह से घर से निकलकर दिन भर जंगलों की खाक छान रहे हैं। जुन्गा के दुर्गा सिंह ठाकुर ने बताया कि गुच्छी के उगने का उचित समय हर वर्ष फाल्गुन से बैशाख माना जाता है। आग से झुलसे जंगल, नमी और घास के बीच गुच्छी मशरूम ज्यादा उगती है।
गुच्छी का वैज्ञानिक नाम मार्किला एस्क्यूपलैंटा है। प्रदेश के शिमला, चंबा और मनाली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गुच्छी अधिक मात्रा में उगती है। इसे स्थानीय भाषा में चेंऊ, रोंटू, छतरी, चटमोर और डूंगरू कहा जाता है।
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गुच्छी मशरूम मार्च से मई तक प्राकृतिक रूप से उगती है। बारिश से पहले आसमानी बिजली की तेज किरणों और बादलों के गड़गड़ाहट से गुच्छी जंगलों में स्वयं उगती है। सबसे अहम बात यह है कि गुच्छी बिना खाद और बीज के ही उगती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र तल से 1,500 से 3,500 मीटर की ऊंचाई तक गुच्छी पाई जाती है। इसके लिए 14 से 17 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता रहती है।
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इन दिनों लोग गुच्छियां एकत्रित करने के लिए पूरे दिन जंगलों में डेरा जमाए हुए हैं। लोग सुबह घर से गुच्छी की तलाश में जंगल जा रहा हैं। वे दिन का भोजन भी साथ ले जाते हैं। कई दिनों तक ग्रामीण जंगल में गुच्छी की तलाश में रहते हैं। गुच्छी ढूंढना बेहद मुश्किल काम है। लोगों को विशेषकर फाल्गुन माह में तेज बिजली और बादलों की गड़गड़ाहट होने का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। गुच्छी को जंगल से लाकर घर पर सुखाया जाता है। इसकी माला पिरोकर घर में टांगी जाती है। सूखकर गुच्छी का वजन बहुत कम रह जाता है।
बता दें कि खुले बाजार में गुच्छी की कीमत 30 से 35 हजार प्रतिकिलो बताई जाती है। भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, इटली सहित कई देशों में इसकी बहुत मांग रहती है।
हृदय रोगियों के लिए संजीवनी
आयुर्वेद विशेषज्ञ डाॅ. अनु शर्मा ने बताया गुच्छी चमत्कारी और औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसमें आयरन, विटामिन बी और सी के अतिरिक्त अमीनो एसिड और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें लो फैट और हाई एंटी ऑक्सिडेंटस फाइबर होते हैं। विशेषकर हृदय रोगियों के लिए गुच्छी मशरूम संजीवनी है। पहाड़ों पर प्रकृति के स्पर्श से उगने वाली गुच्छी आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है। गुच्छियां जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगती है। कुदरत ने न ही इसका बीज बनाया है और न ही उपयुक्त स्थान। एक रिपोर्ट के अनुसार निदेशालय खुंब अनुसंधान केंद्र चंबाघाट सोलन में गुच्छी मशरूम पर वैज्ञानिकों द्वारा शोध किया जा रहा है ताकि इसका उत्पादन घर पर ही हो सके।