एसडीएम कोर्ट पहुंचा रामलोक मंदिर विवाद, फैसले पर फिलहाल रोक
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रामलोक मंदिर पर कब्जे का फैसला अब एसडीएम कोर्ट में होगा। तहसीलदार कंडाघाट की ओर से मंदिर को सरकार के अधीन लेने और कब्जाधारकों पर एक लाख 6 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के फैसले पर रामलोक मंदिर के मुख्य पुजारी अमरदास समेत अन्य ने एसडीएम कोर्ट में दस्तक दे दी है।
इसके बाद अब इस पूरे मामले पर तहसीलदार के फैसले को फिलहाल रोक दिया गया है और अब यह फैसला रामलोक मंदिर पर लागू नहीं होगा। भविष्य में एसडीएम कोर्ट में मामला आगे बढ़ेगा और वहां से आए फैसले को ही मान्यता दी जाएगी। तब तक बावा अमरदास मंदिर में मुख्य पुजारी के रूप में ही मौजूद रहेंगे।
रूड़ा में करोड़ों रुपये की लागत से भव्य रामलोक मंदिर की स्थापना की गई है। इसमें अष्टधातु से बनी विशालकाय मूर्तियां स्थापित हैं। रूड़ा में रामलोक मंदिर में कई नेताओं की आस्था रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर, कौल सिंह ठाकुर, कर्नल धनी राम शांडिल, पूर्व वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया समेत कई अफसर इस मंदिर में हाजिरी लगाते रहे हैं।
ग्रामीणों ने मंदिर निर्माण में सरकारी भूमि के इस्तेमाल का हवाला देकर तहसीलदार कंडाघाट के पास केस दर्ज किया था। इस मामले की पहले उपायुक्त सोलन के पास भी शिकायत की गई थी। इस केस की सुनवाई करते हुए ही तहसीलदार ने मंदिर को सरकार के अधीन लेने का फैसला सुनाया था।
एसडीएम कोर्ट से होगा फैसला : तहसीलदार
तहसीलदार कंडाघाट ओपी मेहता ने बताया कि मंदिर के मुख्य पुजारी और अन्य एसडीएम कोर्ट में चले गए हैं। अपील के बाद अब एसडीएम कार्यालय से ही रामलोक मंदिर के संबंध में नया आदेश लागू होगा।
जब तक यह मामला सुनवाई में रहेगा तब तक उनका फैसला स्टे में रहेगा। ऐसे में न तो रामलोक मंदिर के कर्ताधर्ताओं जुर्माना लिया जा सकता है और न ही मंदिर का सरकारी अधिग्रहण हो सकता है।