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Shimla News: आइजीएमसी में स्क्रब टायफस का पहला मामला, मरीज मेडिसिन वार्ड में भर्ती
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चिकित्सकों की देखरेख में है सोलन का रहने वाला व्यक्ति, बुखार व शरीर दर्द की समस्या के बाद पहुंचा था अस्पताल
आईजीएमसी में संदिग्ध मरीजों के किए जा रहे स्क्रब टायफस के टेस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आईजीएमसी में स्क्रब टायफस का पहला मामला सामने आया है। व्यक्ति बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल आया था। चिकित्सकों की ओर से टेस्ट करवाने पर व्यक्ति पॉजिटिव निकला है। वर्तमान में व्यक्ति को मेडिसिन वार्ड में चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है। व्यक्ति सोलन का रहने वाला है। मामला आने के बाद चिकित्सक भी अलर्ट हो गए हैं और लोगों से सावधानियां बरतने का आग्रह किया है।
बता दें कि बीते दिनों से स्क्रब टायफस जैसे लक्षणों की शिकायत लेकर मरीज आईजीएमसी शिमला पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों की ओर से टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। जब चिकित्सक मरीजों से जानकारी लेते हैं तो पता चलता है कि वे खेतों में कामकाज के बाद बुखार व शरीर में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल आए। हालांकि बीते दिनों हुए टेस्ट में संदिग्धों की रिपोर्ट निगेटिव भी आई है लेकिन हाल ही में एक व्यक्ति स्क्रब टायफस से पीड़ित उपचार के लिए अस्पताल में आया है।
दूसरी ओर, बदलते मौसम के बीच आईजीएमसी में वायरल से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी इजाफा होना शुरू हो गया है, जिनमें खेतों में कार्य करने वाले लोग भी शामिल हैं। बरसात में बारिश के बाद स्क्रब टायफस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अस्पताल में पीड़ित उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी गंभीर मामलों को उपचार के लिए आईजीएमसी रेफर किया जाता है, जिसके लिए डॉक्टरों ने पूरी तैयारी कर रखी है।
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इनसेट
स्क्रब टायफस के लक्षण
स्क्रब टायफस आरेशिया सुशुमुशी कीट के काटने से होता है। यह घास में पाया जाता है। स्क्रब टायफस की चपेट में 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग अधिक आते हैं। इसमें संक्रमित व्यक्ति को 104 से 105 डिग्री सेल्सियस तक बुखार हो सकता है। जोड़ों में दर्द व कंपकपी के साथ बुखार आना, शरीर में जकड़न, शरीर का टूटा हुआ लगना इसके लक्षण हैं। अधिक संक्रमण होने पर गर्दन, बाजू के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां हो सकती हैं। काले रंग के चकत्ते बनते हैं।
इनसेट
बचाव के उपाय
-आसपास जल जमा न होने दें।
-हमेशा साफ और पूरे कपड़े पहनें।
-घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें।
-खेतों में काम करते समय हाथ व पैरों को अच्छे से ढककर रखें।
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आईजीएमसी में संदिग्ध मरीजों के किए जा रहे स्क्रब टायफस के टेस्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आईजीएमसी में स्क्रब टायफस का पहला मामला सामने आया है। व्यक्ति बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल आया था। चिकित्सकों की ओर से टेस्ट करवाने पर व्यक्ति पॉजिटिव निकला है। वर्तमान में व्यक्ति को मेडिसिन वार्ड में चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है। व्यक्ति सोलन का रहने वाला है। मामला आने के बाद चिकित्सक भी अलर्ट हो गए हैं और लोगों से सावधानियां बरतने का आग्रह किया है।
बता दें कि बीते दिनों से स्क्रब टायफस जैसे लक्षणों की शिकायत लेकर मरीज आईजीएमसी शिमला पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों की ओर से टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। जब चिकित्सक मरीजों से जानकारी लेते हैं तो पता चलता है कि वे खेतों में कामकाज के बाद बुखार व शरीर में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल आए। हालांकि बीते दिनों हुए टेस्ट में संदिग्धों की रिपोर्ट निगेटिव भी आई है लेकिन हाल ही में एक व्यक्ति स्क्रब टायफस से पीड़ित उपचार के लिए अस्पताल में आया है।
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दूसरी ओर, बदलते मौसम के बीच आईजीएमसी में वायरल से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी इजाफा होना शुरू हो गया है, जिनमें खेतों में कार्य करने वाले लोग भी शामिल हैं। बरसात में बारिश के बाद स्क्रब टायफस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अस्पताल में पीड़ित उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी गंभीर मामलों को उपचार के लिए आईजीएमसी रेफर किया जाता है, जिसके लिए डॉक्टरों ने पूरी तैयारी कर रखी है।
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स्क्रब टायफस के लक्षण
स्क्रब टायफस आरेशिया सुशुमुशी कीट के काटने से होता है। यह घास में पाया जाता है। स्क्रब टायफस की चपेट में 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग अधिक आते हैं। इसमें संक्रमित व्यक्ति को 104 से 105 डिग्री सेल्सियस तक बुखार हो सकता है। जोड़ों में दर्द व कंपकपी के साथ बुखार आना, शरीर में जकड़न, शरीर का टूटा हुआ लगना इसके लक्षण हैं। अधिक संक्रमण होने पर गर्दन, बाजू के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां हो सकती हैं। काले रंग के चकत्ते बनते हैं।
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बचाव के उपाय
-आसपास जल जमा न होने दें।
-हमेशा साफ और पूरे कपड़े पहनें।
-घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें।
-खेतों में काम करते समय हाथ व पैरों को अच्छे से ढककर रखें।