तिब्बत ने बढ़ाई टेंशन, वैज्ञानिक बोले- आ सकता है नौ तीव्रता का भूकंप
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हिमालय क्षेत्र में नौ तीव्रता का भूकंप आने की पूरी संभावना है। यदि वर्तमान में इतनी तीव्रता का भूकंप आता है, तो हिमालय क्षेत्र में हो रहे बिना नियोजन के भवनों का निर्माण और मल्टीप्लेक्स के कारण नुकसान अधिक होगा। भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलूरू के जाने-माने भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. सीपी राजेंद्रन ने यह बात कही।
वह हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के अस्थायी शैक्षणिक संस्थान शाहपुर में पर्यावरण विज्ञान विभाग की संगोष्ठी में बतौर वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कांगड़ा में 1905 में आए भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान जनसंख्या कम होने के बावजूद 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। ऐसे में यदि अब ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप आता है, तो नुकसान अधिक होगा।
टेक्टोनिक प्लेटों के बीच हो रहा टकराव खतरनाक
उन्होंने कहा कि हिमालय, प्लेट टेक्टोनिक बलों का सबसे नाटकीय परिणाम है। तिब्बत में नम्च बरवा सिंटैक्सिस और भारत में नंगा पर्वत सिंटैक्सिस के बीच 2400 किमी की दूरी पर चल रहीं गतिविधियां महाद्वीपीय टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव का परिणाम हैं। संगोष्ठी में भूकंपीय तनाव के विभिन्न भौगोलिक मॉडलों पर चर्चा की गई।
साथ ही भूकंप और सुनामी की समस्या को समझने के लिए विभिन्न उपकरणों के बारे में जानकारी दी। सीयू के पर्यावरण विभाग के डीन डॉ. दीपक पंत ने कहा कि हिमाचल में सभी ओर अवैध गैर वैज्ञानिक निर्माण हो रहा है। इसके बारे में कोई भी चिंतित नहीं है।
भूकंप आने पर इसके भयंकर परिणाम होंगे। संगोष्ठी में विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुश्ताक अहमद, सहायक प्रोफेसर डॉ. दिलबाग राणा, डॉ. अनुराग, डॉ. शैलेंद्र, विभाग के शोधार्थी वरुण धीमान, अंविता शील, आनंद गिरि, तेंजिन और अन्य विद्यार्थियों ने भाग लिया।