सेब के तुड़ान के बाद बगीचों पर माइट और वूली एफिड का हमला, बागवानी विशेषज्ञों ने दी ये सलाह
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हिमाचल में सेब तुड़ान के बाद बगीचों पर स्कैब, माइट, वूली एफिड और कैंकर ने हमला बोल दिया है। सूखे मौसम में बगीचों का उचित प्रबंधन बागवानी विशेषज्ञों की राय से ही करने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुष्क मौसम में बागवान बगीचों में खाद डालने से परहेज करें। इससे बगीचों को नुकसान हो सकता है। सूखा बढ़ता जाएगा तो बागवानों की समस्याएं भी बढ़ती जाएंगी। मौसम साफ होते ही बागवान शिकायत करने लगे हैं कि उनके बगीचों में स्कैब, माइट वूली एफिड ने हमला कर दिया है। यह समस्य दिनप्रति दिन बढ़ने लगी है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि सूखे मौसम में बगीचों में खाद डालना घातक हो सकता है। बगीचों में जब तक नमी न हो, तब तक किसी भी प्रकार की खाद डालने से परहेज करें।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा कि स्कैब, माइट, स्केल और वूली एफिड के हमलों से बचाव के लिए समय रहते उपचार कर लें। झड़े हुए पत्तों को तौलियों में मिट्टी के नीचे दबा दें। सूखा रहते बगीचों में नाइट्रोजन खाद न डालें। यूरिया वहीं डाल सकते है, जहां पेड़ों पर 95 फीसदी पत्ते हैं। इसके लिए 2 किलो यूरिया और दो सौ लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। बीमारियों से बचाव के लिए अति शीघ्र 1 किलो नीला थोथा, 10 किलो चूना और एक लीटर अलसी का तेल या 750 ग्राम एचएमओ का घोल बनाकर जड़ों से लेकर प्रमुख शाखा तक लगाएं। 600 ग्राम कापर ऑक्सीक्लोराइड, दो लीटर एचएमओ को 198 लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाएं और प्रति पौधा दस लीटर छिड़काव करें। इससे पेड़ों को स्कैब, कैंकर, माइट, स्केल, वूली एफिड से बचाया जा सकेगा।