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ग्रेडिंग नहीं, अंकों से होगा स्कूली बच्चों का मूल्यांकन
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 04 Feb 2016 10:34 PM IST
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक ग्रेडिंग की जगह अंकों से स्कूली बच्चों का मूल्यांकन करने की तैयारी शुरू हो गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में सतत समग्र मूल्यांकन का स्वरूप बदला जाएगा। बच्चों ने जो सीखा है, उसका मूल्यांकन पढ़ने के दौरान ही करने की वकालत की गई है। वीरवार को शिक्षा निदेशालय में एक कार्यशाला हुई। एनसीईआरटी से आए विशेषज्ञों ने विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों और अधिकारियों को मूल्यांकन के तरीके सिखाए। रचनात्मक और योगात्मक तरीके से स्कूली बच्चों का मूल्यांकन करने की तैयारी है।
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राज्य परियोजना कार्यालय लालपानी ने वीरवार को प्रदेश में लागू सतत समग्र मूल्यांकन प्रक्रिया के विषय में कार्यशाला का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता एनसीईआरटी नई दिल्ली से आए मुख्य प्रारंभिक शिक्षा विभाग प्रो. अनूप राजपूत ने की। इसमें प्रदेश में लागू सतत समग्र मूल्यांकन को सुचारु रूप से चलाने के लिए भाग ले रहे प्रतिभागियों से जरूरी सुझाव लिए गए।
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प्रतिभागियों ने माना कि हर बच्चे के सीखने के स्तर को सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन होना चाहिए। वर्तमान में हो रहे मूल्यांकन में समस्या है कि स्कूलों में चैक लिस्ट रजिस्टर को शिक्षक ठीक से भर नहीं पा रहे। यह भी संशय है कि इसे कब-कब भरना है।
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कार्यशाला में माना गया कि यह स्कूलों में ज्यादा सफल नहीं रहा एवं बच्चों का मूल्यांकन पहले से चल रहे ग्रेडिंग प्रणाली के स्थान पर अंकों से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। नई प्रणाली से मूल्यांकन करने से शिक्षकों को सहूलियत होगी और आकलन का काम भी सरल हो जाएगा।
कार्यशाला में उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग, कई जिलों के परियोजना अधिकारी, संकुल मुख्य अध्यापक-अध्यापिका, खंड स्रोत समन्वयक, जिलों से आए समन्वयक, शिक्षक, अध्यापक संघ के प्रतिनिधि और राज्य परियोजना कार्यालय से विभिन्न समन्वयक मौजूद रहे।