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संयुक्त किसान मंच: सेब के समर्थन मूल्य के लिए ‘जवाब दो सरकार' अभियान शुरू
Sun, 24 Oct 2021 12:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 24 Oct 2021 12:29 PM IST
सार
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि उपचुनावों से पहले जवाब दो सरकार अभियान शुरू किया गया है। ऐसे क्षेत्रों में जहां उपचुनाव हो रहे हैं, वहां लोगों को पर्चे बांट कर सरकार की किसान विरोधी नीति से अवगत करवाया जाएगा।
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संयुक्त किसान मंच
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में किसानों-बागवानों के हितों की लड़ाई लड़ने वाले संयुक्त किसान मंच ने सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए उपचुनावों के बीच ‘जवाब दो सरकार’ अभियान शुरू कर दिया है। शनिवार को बाकायदा सोशल मीडिया पर इसे लेकर पोस्टर लांच किया गया है। जुब्बल-कोटखाई, फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्रों सहित मंडी लोकसभा क्षेत्र में कल से यह पोस्टर लगाने का अभियान शुरू होगा। 26 अक्तूबर से इन सभी चुनाव क्षेत्रों में आम लोगों को पर्चे बांटे जाएंगे। पहले ही दिन हजारों समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मंच का पोस्टर शेयर किया है।
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मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि मंच की कार्यकारिणी की बैठक में सरकार के किसान-बागवान विरोधी रवैये के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय हुआ था। इसी कड़ी में उपचुनावों से पहले जवाब दो सरकार अभियान शुरू किया गया है। ऐसे क्षेत्रों में जहां उपचुनाव हो रहे हैं, वहां लोगों को पर्चे बांट कर सरकार की किसान विरोधी नीति से अवगत करवाया जाएगा। इसके लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के अलावा मंडी संसदीय सीट के तहत आने वाले रामपुर, कुल्लू, किन्नौर और करसोग में संयुक्त किसान मंच की इकाइयां गठित हैं। इन सभी क्षेत्रों में मंच जागरूकता अभियान चलाएगा।
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इसलिए नाराज हैं बागवान
दो माह पहले 24 अगस्त को सरकार को मांग पत्र भेजा गया। 13 सिंतबर को ब्लॉक, तहसील, उपमंडल व जिला स्तर पर प्रदर्शन हुए। 27 सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आह्वान पर संयुक्त किसान मंच ने अपनी मांगों को लेकर बंद व प्रदर्शन किए। बावजूद इसके सरकार ने सुध नहीं ली। सरकार की अनदेखी से आहत मंच ने किसान विरोधी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष तेज करने का फैसला लिया है।
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सरकार से मांगा इन सवालों का जवाब
सेब के लिए समर्थन मूल्य की मांग क्या नाजायज है?
सभी फसलों के लिए एमएसपी मांगना क्या गलत है?
दो महीने बाद भी किसानों-बागवानों को बातचीत के लिए न बुलाने की सरकार की नीति क्या सही है?