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Drug Alert: हिमाचल में बनीं 45 समेत देशभर की 159 दवाओं के सैंपल फेल, बाजार से स्टाॅक वापस मंगवाया

Tue, 21 Jul 2026 10:58 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)।
संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 21 Jul 2026 10:58 PM IST
सार

ड्रग अलर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा की दवा कंपनियों की एलर्जी, संक्रमण, हार्ट, बुखार, दर्द, खांसी की दवा, अल्सर व उच्च रक्तचाप की दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

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Samples of 159 medicines from across the country including 45 manufactured in Himachal have failed tests; stoc
हिमाचल बनीं दवाओं के सैंपल फेल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल में बनीं 45 समेत देशभर की 159 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी जून के ड्रग अलर्ट में इसका खुलासा हुआ है। ड्रग अलर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा की दवा कंपनियों की एलर्जी, संक्रमण, हार्ट, बुखार, दर्द, खांसी की दवा,अल्सर व उच्च रक्तचाप की दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं। जांच के दौरान अधिकांश दवाएं डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय तत्व की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर फेल हुईं हैं।

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झाड़माजरी स्थित एक फार्मा इकाई की एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलनेट टैबलेट और एस्से परीक्षण में असफल पाई गई, जबकि सेफिक्सिम डिस्पर्सिबल टैबलेट भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। पशु उपयोग के लिवग्रो इंजेक्शन में सायनोकोबालामिन और राइबोफ्लेविन की गुणवत्ता भी सही नहीं पाई गई है। इसके अलावा पैरासिटामोल पीडियाट्रिक सस्पेंशन के दो बैच भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे बच्चों में उपयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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खांसी, एलर्जी और पाचन संबंधी दवाओं में एम्ब्रोक्सोल-टरब्यूटालिन-गुआइफेनेसिन सिरप, प्रोमेथाजिन सिरप, फिनाइलएफ्रिन-क्लोरफेनिरामिन सिरप तथा मोंटेलुकास्ट-लेवोसेटिरिजिन दवा भी कंटेंट संबंधी परीक्षण में फेल हुई हैं। राज्य ड्रग नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि फेल होने वाली दवा कंपनियों के खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। विभाग स्वयं भी इन दवाओं को सैंपल की जांच करेगी। खराब दवाओं के बाजार से स्टाॅक वापस मंगाने को कहा गया है।

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