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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Salute to the courage of teacher Srishti in the battle with Coronavirus, returned home after battling for 75 days

मंडी: कोरोना से जंग में सृष्टि की हिम्मत को सलाम, 75 दिन जूझने के बाद स्वस्थ होकर लौटीं घर

Wed, 25 Aug 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, जोगिंद्रनगर (मंडी)
अमर उजाला नेटवर्क, जोगिंद्रनगर (मंडी) Published by: Krishan Singh Updated Wed, 25 Aug 2021 05:00 AM IST
सार

सृष्टि जब संक्रमित हुईं। उससे पहले उन्हें कोरोना जैसा कोई लक्षण नहीं था। पीठ और सिर में दर्द थी। बात सात मई की है। नियमित जांच के लिए सृष्टि जोगिंद्रनगर अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल के बाहर स्वेच्छा से कोविड टेस्ट करवाया। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। चिकित्सकों ने दवाई दी और आईसोलेट होने के लिए कहा। 

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Salute to the courage of teacher Srishti in the battle with Coronavirus, returned home after battling for 75 days
कोरोना से जंग में सृष्टि की हिम्मत को सलाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना से जंग में सृष्टि की हिम्मत को सलाम तो बनता है। 75 दिन तक बीमारी से जूझने के बाद 30 साल की शिक्षिका स्वस्थ होकर घर लौटी हैं। कहते हैं किसी भी बीमारी से लड़ने की मजबूत इच्छा है तो दुआ के साथ कई बार दवा भी असर कर जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया सृष्टि ने। अब तक ऐसे कम ही मामले सामने आए हैं, जिसमें किसी मरीज ने इतने लंबे समय बाद कोरोना को हराया। सृष्टि जब संक्रमित हुईं। उससे पहले उन्हें कोरोना जैसा कोई लक्षण नहीं था। पीठ और सिर में दर्द थी। बात सात मई की है। नियमित जांच के लिए सृष्टि जोगिंद्रनगर अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल के बाहर स्वेच्छा से कोविड टेस्ट करवाया।

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रिपोर्ट पॉजिटिव आई। चिकित्सकों ने दवाई दी और आईसोलेट होने के लिए कहा। सृष्टि घर में आईसोलेट हो गईं। इसी बीच सांस लेने में दिक्कत होने लगी। फिर अस्पताल पहुंची को ऑक्सीजन लेवल कम हो गया। चिकित्सकों ने सृष्टि को उपचार के लिए नेरचौक के रती अस्पताल रेफर कर दिया। यहां हालत नहीं सुधरी। यहां से मेडिकल कॉलेज नेरचौक शिफ्ट कर दी गईं। यहां उपचार शुरू हुआ। इसी बीच एक रात सृष्टि की हालत काफी खराब हो गई। जांच में पता चला कि ऑक्सीजन स्तर 49 पहुंच गया है। एक पल चिकित्सकों को भी लगा कि सृष्टि की सांसें थम रही हैं। सृष्टि खुद बताती हैं कि एक समय सांसें थमने लगी थीं।
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उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और सोचा कि कुछ भी हो जाए, इस जंग को जीतना है। बाकी का काम चिकित्सकों ने किया। उनके लिए फरिश्ते बनकर आए चिकित्सकों ने कई बार पीठ पर हाथ से दबाव डाला और अचानक ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा। सांस भी आसानी से आने लगी। कई दिन के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उन्हें तीन हफ्ते तक मंडी अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में सामने आया कि फेफड़ों को नुकसान हुआ है। इलाज चलता रहा और सृष्टि मंगलवार को अस्पताल से घर पहुंच गई हैं। सृष्टि ने बताया कि कोरोना के बीच चिकित्सकों ने बहुत अच्छा काम किया है। उन्हें चिकित्सकों ने भी लड़ाई से लड़ने के लिए प्रेरित किया।

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