हिमाचल के 23 कॉलेजों को केंद्र सरकार ने दिए 90-90 लाख रुपये
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हिमाचल के 23 डिग्री कॉलेजों को केंद्र सरकार ने रूसा ग्रांट की दूसरी किस्त के 90-90 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने हिमाचल को रूसा ग्रांट के तहत 20.70 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
23 कॉलेजों को बीते साल अक्तूबर में रूसा ग्रांट की 50-50 लाख रुपये की पहली किस्त जारी हुई थी। इन कॉलेजों ने समय पर ग्रांट को खर्च किया। बीते महीने प्रदेश रूसा निदेशालय ने सभी कॉलेजों के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट केंद्र सरकार को भेजे थे।
इसी आधार पर अब भारत सरकार ने 23 कॉलेजों को दूसरी किस्त जारी की है। इस ग्रांट को कंस्ट्रक्शन, कैंपस डेवलेपमेंट और उपकरण खरीद पर खर्च किया जाएगा। इसी साल इस किस्त को खर्च करना पड़ेगा, तभी कॉलेजों को 60-60 लाख रुपये की तीसरी किस्त जारी होगी। कॉलेजों को रूसा ग्रांट के तहत दो-दो करोड़ रुपये मिलने हैं।
इन कॉलेजों को जारी हुई ग्रांट
डिग्री कॉलेज धर्मशाला, आरकेएमवी शिमला, कोटशेरा शिमला, सेंट बीड्ज शिमला, बैजनाथ, बिलासपुर, नादौन, घुमारवीं, अर्की, दौलतपुर चौक, करसोग, ढलियारा, जोगिंद्रनगर, पालमपुर, सरकाघाट, हमीरपुर, ऊना, चुवाड़ी, नालागढ़, रामपुर बुशैहर, चंबा, सीमा रोहडू़ और डिग्री कॉलेज नाहन।
ग्रांट खर्च करने के लिए गाइड लाइन तय
35 प्रतिशत राशि कंस्ट्रक्शन पर खर्च होगी। इसके तहत नए क्लास रूम, मल्टीपर्पज हाल, कैंटीन आदि
35 प्रतिशत राशि कॉलेज भवनों की मरम्मत, जीर्णोद्धार, नई लैब बनाने, वाईफाई सुविधा देने पर खर्च होगी
30 प्रतिशत राशि उपकरणों की खरीद, स्मार्ट क्लास रूम, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय को आधुनिक बनाने को और ई रिसोर्स लाइब्रेरी बनाने पर खर्च होगी
सराहां कॉलेज को मिले साढे़ पांच करोड़
जिला सिरमौर के सराहां कॉलेज को केंद्र सरकार ने न्यू मॉडल कॉलेज बनाने के लिए साढ़े पांच करोड़ की रूसा ग्रांट जारी की है। कॉलेज की भूमि को लेकर औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के चलते बीते एक साल से ग्रांट फंसी हुई थी। जिला चंबा के लील कोठी कॉलेज को न्यू मॉडल कॉलेज के तहत ग्रांट के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। यहां कॉलेज की भूमि अभी सरकार के नाम नहीं हुई है।
एचपीयू की लापरवाही से फंसे 12 करोड़
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) प्रशासन की लापरवाही से केंद्र ने ग्रांट जारी नहीं की है। एचपीयू प्रशासन ने अभी तक साढ़े सात करोड़ की ग्रांट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भारत सरकार को नहीं भेजा है।
एचपीयू को अभी तक पांच करोड़ और ढाई करोड़ की दो किस्तें जारी हो चुकी हैं। अगर एचपीयू प्रशासन ने समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेजा होता तो 12.5 करोड़ की तीसरी किस्त जारी होनी थी। केंद्र से एचपीयू को 20 करोड़ की ग्रांट मिलनी है।