सिम बंद होते ही खाली हो गया बैंक खाता: 33 यूपीआई ट्रांजेक्शन में 11 लाख पार, ठगों ने अपनाया ठगी का नया तरीका
शिमला के चिड़गांव में साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां बुजुर्ग के बैंक खाते से 33 अनधिकृत यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए 11.04 लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित के मुताबिक, 5 सितंबर को अचानक उसका मोबाइल सिम बंद हो गया था। कॉल और मैसेज आना बंद होने के बाद उसे बैंक खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली। पुलिस को सिम क्लोनिंग के जरिए ठगी का शक है।
विस्तार
अगर आपका सिम अचानक काम करना बंद कर दे तो सावधान हो जाएं। यह साइबर ठगों का हथकंडा हो सकता है जिससे आपका बैंक खाता खाली हो सकता है। इसे सिम क्लोनिंग कहा जाता है। ऐसी ही मामला जिला शिमला के चिड़गांव क्षेत्र में सामने आया है जहां पर साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग के 11.04 लाख की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
हुईं 33 यूपीआई लेन-देन
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्जकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार स्थानीय निवासी बुजुर्ग ने पुलिस में शिकायत दी है कि उनका खाता यूको बैंक चिड़गांव में है। शिकायतकर्ता के मुताबिक 5 से 18 सितंबर 2026 के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों ने उनके खाते से बिना जानकारी और अनुमति के 33 अनधिकृत यूपीआई लेन-देन किए। इन ट्रांजेक्शन के जरिये कुल 11,04,799.61 रुपये की राशि निकालकर या अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
न फोन आया न कोई कॉल आई
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने स्वयं इनमें से कोई लेन-देन नहीं किया और न ही किसी अन्य व्यक्ति को खाते से ट्रांजेक्शन करने के लिए अधिकृत किया था। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर को उनका मोबाइल सिम ने अचानक काम करना बंद कर दिया। इसके बाद उनके मोबाइल पर न तो कॉल आ रही थी और न ही कोई संदेश प्राप्त हो रहा था। इसके बाद जब उन्होंने मामले की जांच पड़ताल की तो उन्हें बैंक से जानकारी मिली कि उनके खाते से 11.04 लाख रुपये की राशि निकल गई है।
पुलिस लगा रही इस बात का पता
बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि अज्ञात बैंक खातों में 33 ट्रांजेक्शन के जरिये यह रकम ट्रांसफर की गई है। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर अनधिकृत यूपीआई लेन-देन और सिम बंद होने की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और ठगी को किस तरीके से अंजाम दिया गया।
सिम क्लोनिंग कैसे काम करती है?
-डाटा निकालना: हैकर्स विशेष हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर टूल की मदद से आपके सिम कार्ड के गुप्त यूनिक आइडेंटिफायर (एसयूआईडी) और ''की'' की नकल करते हैं।
-नेटवर्क को धोखा देना: क्लोन किए गए सिम में मूल सिम जैसी ही जानकारी होती है, जिससे टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क दोनों को एक ही ग्राहक मान लेता है।
-नियंत्रण पाना: इसके बाद असली यूजर का सिम काम करना बंद कर देता है या नेटवर्क चला जाता है, और सारा कंट्रोल हैकर के पास चला जाता है।
-बैंक धोखाधड़ी: आपके बैंक खातों से ओटीपी का इस्तेमाल करके अवैध तरीके से पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
-निजी डाटा की चोरी: सोशल मीडिया अकाउंट या ईमेल को हैक किया जा सकता है।
-फर्जी कॉल और मैसेज: आपके नंबर का इस्तेमाल करके किसी को भी कॉल या संदेश भेजे जा सकते हैं।
एक्सपर्ट बोले, सिम बंद होते ही सर्विस प्रोवाइडर और बैंक को करें सूचित
साइबर विशेषज्ञ अजय ने बताया कि सिम क्लोनिंग के जरिये साइबर ठग नकली सिम जनरेट कर देते हैं। ओटीपी रिसेट करने के बाद साइबर अपराधी बैंक खातों से रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इसे आइडेंटिटी थेफ्ट भी कहा जाता है। अगर आपकी सिम अचानक बंद हो जाए तो बिना समय गंवाए अपने सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करें। इसके साथ ही बैंक से संपर्क करके ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और डेबिट और क्रेडिट कार्ड को लॉक करवाएं जिससे की आपके खाते से किसी प्रकार का अवैध लेनदेन न हो। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी कॉल करके सूचित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमें इस तरह के अपराधों से बचने के लिए अपने दस्तावेज सिर्फ बहुत जरूरी होने पर ही अन्य लोगों से साझा करने चाहिए।