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पर्यटक नगरी नारकंडा से हाटू पीक तक बनेगा रोपवे
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3.10 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 173 करोड़, पीपीपी मोड से होगा निर्माण
हर मौसम में हाटू मंदिर पहुंच सकेंगे लोग
हर साल हजारों सैलानी पहुंचते हैं हाटू पीक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला शिमला की पर्यटक नगरी नारकंडा से हाटू पीक तक का सफर अब और आसान होगा। रोपवे ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कार्पोरेशन यहां रोपवे का निर्माण करवाएगा। इस प्रोजेक्ट के टेंडर कॉल कर लिए हैं। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनने वाले इस रोपवे से लोग और सैलानी नारकंडा से हाटू पीक तक पहुंच सकेंगे। हाटू पीक पर प्राचीन मंदिर भी है।
28 अप्रैल को प्री बिड बैठक रखी है। इसके बाद टेंडर के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। योजना के अनुसार 28 मई तक टेंडर के आवेदन लिए जाएंगे। यदि कंपनियां निर्माण के लिए आगे आती हैं तो जुलाई माह में निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। पीपीपी मोड पर बनने वाले इस रोपवे पर करीब 173 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हर साल शिमला आने वाले हजारों सैलानी नारकंडा भी पहुंचते हैं।
बर्फबारी के सीजन में यहां सैलानियों का जमावड़ा लगता है। नारकंडा से करीब आठ किलोमीटर दूर हाटू पीक सैलानियों के लिए बड़ा आकर्षण का केंद्र रहता है। हाटू मंदिर के लिए स्थानीय लोग भी पहुंचते हैं। लेकिन सर्दियों में हिमपात के चलते हाटू मंदिर जाना मुश्किल होता है। दिसंबर से फरवरी तक ज्यादातर दिन यहां आवाजाही बंद रहती है। रोपवे बनने के बाद नारकंडा से लोग सीधे हाटू मंदिर पहुंच सकेंगे। यह रोपवे करीब 3.10 किमी लंबा होगा। हर मौसम में इसमें आवाजाही संभव हो सकेगी।
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जल्द काम शुरू होने की उम्मीद
रोपवे अथॉरिटी ने साल 2019 के अंत में भी इस मेगा प्रोजेक्ट के टेंडर कॉल किए थे। लेकिन उस समय यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। अब उम्मीद है कि इस बार इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हो जाएगा। शहर में भी रोपवे का जाल बिछाने की योजना है लेकिन यह प्रोजेक्ट भी तीन साल से फाइलों में ही घूम रहा है।
हाटू पीक से दिखता है कुल्लू, किन्नौर और सतलुज नदी
हाटू मंदिर काफी प्राचीन है। यह मंदिर काफी खूबसूरत है और इसमें लकड़ी की नक्काशी देखने लायक है। हाटू पीक से जनजातीय जिला किन्नौर और कुल्लू के कई इलाके दिखाई देते हैं। सतलुज नदी का नजारा भी यहां से नजर आता है।
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हर मौसम में हाटू मंदिर पहुंच सकेंगे लोग
हर साल हजारों सैलानी पहुंचते हैं हाटू पीक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला शिमला की पर्यटक नगरी नारकंडा से हाटू पीक तक का सफर अब और आसान होगा। रोपवे ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कार्पोरेशन यहां रोपवे का निर्माण करवाएगा। इस प्रोजेक्ट के टेंडर कॉल कर लिए हैं। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनने वाले इस रोपवे से लोग और सैलानी नारकंडा से हाटू पीक तक पहुंच सकेंगे। हाटू पीक पर प्राचीन मंदिर भी है।
28 अप्रैल को प्री बिड बैठक रखी है। इसके बाद टेंडर के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। योजना के अनुसार 28 मई तक टेंडर के आवेदन लिए जाएंगे। यदि कंपनियां निर्माण के लिए आगे आती हैं तो जुलाई माह में निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। पीपीपी मोड पर बनने वाले इस रोपवे पर करीब 173 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हर साल शिमला आने वाले हजारों सैलानी नारकंडा भी पहुंचते हैं।
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बर्फबारी के सीजन में यहां सैलानियों का जमावड़ा लगता है। नारकंडा से करीब आठ किलोमीटर दूर हाटू पीक सैलानियों के लिए बड़ा आकर्षण का केंद्र रहता है। हाटू मंदिर के लिए स्थानीय लोग भी पहुंचते हैं। लेकिन सर्दियों में हिमपात के चलते हाटू मंदिर जाना मुश्किल होता है। दिसंबर से फरवरी तक ज्यादातर दिन यहां आवाजाही बंद रहती है। रोपवे बनने के बाद नारकंडा से लोग सीधे हाटू मंदिर पहुंच सकेंगे। यह रोपवे करीब 3.10 किमी लंबा होगा। हर मौसम में इसमें आवाजाही संभव हो सकेगी।
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जल्द काम शुरू होने की उम्मीद
रोपवे अथॉरिटी ने साल 2019 के अंत में भी इस मेगा प्रोजेक्ट के टेंडर कॉल किए थे। लेकिन उस समय यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। अब उम्मीद है कि इस बार इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हो जाएगा। शहर में भी रोपवे का जाल बिछाने की योजना है लेकिन यह प्रोजेक्ट भी तीन साल से फाइलों में ही घूम रहा है।
हाटू पीक से दिखता है कुल्लू, किन्नौर और सतलुज नदी
हाटू मंदिर काफी प्राचीन है। यह मंदिर काफी खूबसूरत है और इसमें लकड़ी की नक्काशी देखने लायक है। हाटू पीक से जनजातीय जिला किन्नौर और कुल्लू के कई इलाके दिखाई देते हैं। सतलुज नदी का नजारा भी यहां से नजर आता है।