बर्फ-बारिश से 60 जगहों पर धंसी 400 करोड़ रुपये से बनी सड़क
400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही 50 किलोमीटर लंबी ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क करीब 60 स्थानों पर धंस गई है। हालिया बर्फबारी के सीजन में सड़क की हालत बदतर हो गई है। आगामी मानसून के सीजन में इस सड़क पर आवाजाही करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
यह हाल तब है जब इस सड़क का निर्माण कार्य अभी जारी है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2007 में चीन की कंपनी ने शुरू किया था। चीन की कंपनी के हटने के बाद सरकार ने वर्ष 2013 में सी एंड सी कंपनी को निर्माण का जिम्मा सौंपा।
वर्ष 2018 में खराब गुणवत्ता के चलते में सीएंडसी कंपनी को भी बाहर कर दिया गया। ऐसे में सड़क पर आवाजाही के लिए निर्भर लोगों को आने वाले बरसात के मौसम की चिंता सताने लगी है।
बागवानों की लाइफलाइन है यह सड़क
करोड़ों की लागत वाली सड़क से बड़े क्षेत्र को रोड कनेक्टिविटी की सुविधा मिलती है। इस इलाके में बागवानी लोगों का मुख्य व्यवसाय है। ऐसे में बागवानों के लिए यह सड़क लाइफलाइन की तरह है, जिसकी बदहाली से उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार
सड़क की बदहाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसका निर्माण सीएंडसी कंपनी ने किया है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता जांच का पूरा जिम्मा सरकारी तंत्र पर था। स्टेट रोड प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर से लेकर लोक निर्माण विभाग के सचिव तक ने कई बार मौके पर दौरे किए। सरकार के कई इंजीनियर भी साइट पर तैनात रहते थे। बावजूद इसके जगह-जगह से सड़क धंसने से सरकारी तंत्र सवालों के घेरे में आ गया है।
अमर उजाला भी उठा चुका है कई सवाल
ठियोग-हाटकोटी सड़क की गुणवत्ता को लेकर अमर उजाला पहले से कई बार मामला उठा चुका है, लेकिन अफसरशाही ने मामले की अनदेखी जारी रखी। इसके बाद हिमपात और बारिश के सामने सड़क की गुणवत्ता के तमाम दावों ने दम तोड़ दिया।
क्या कहते हैं विधायक
सरकार के मुख्य सचेतक एवं जुब्बल कोटखाई के विधायक नरेंद्र बरागटा का कहना है कि सरकार से सड़क निर्माण की जांच का आग्रह पहले ही किया गया है। शीघ्र मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मामला दोबारा उठाया जाएगा। इसमें जो भी अफसर व कर्मचारी दोषी होंगे उन पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।