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Shimla News: मटमैला पानी आने से पीलिया का खतरा बढ़ा, अब तक 11 मामले आए
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आईजीएमसी में झंझीड़ी, फागली, न्यू शिमला और समरहिल से आए पीलिया से ग्रसित मरीज, चार नए मरीज वीरवार को आए
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात के बीच पेयजल योजनाओं से मटमैला पानी आने से शहर में पीलिया का खतरा बढ़ गया है। बच्चे और बड़े पीलिया से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
आईजीएमसी में वीरवार को भी चार नए मामले पीलिया के आए हैं। अब तक 11 लोग पीलिया से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। यह मामले झंझीड़ी, फागली, न्यू शिमला और समरहिल से आए हैं। हालांकि अभी तक इन क्षेत्रों में क्लस्टर नहीं बना है।राहत की बात यह है कि अब तक सामने आए पीलिया के मामलों में मरीज ज्यादा गंभीर नहीं हैं। फिर भी चिकित्सकों ने मरीजों को निगरानी में रखा है। वहीं मामले सामने आने के बाद चिकित्सकों ने लोगों को सतर्क किया है। साथ ही लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है, ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके। बीते दिनों हुई बारिश के बाद से अस्पतालों में पेट दर्द के मरीज पहुंचने शुरू हो गए थे। इसके बाद सोमवार से आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल में चिकित्सकों ने एहतियात के तौर पर मरीजों के टेस्ट करवाने शुरू किए। सोमवार से आईजीएमसी में जांच के दौरान कई मरीज पीलिया से पीड़ित पाए गए हैं।
दस मिनट तक उबालें पानी
मानसून के दौरान शरीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। बरसात के मौसम में होने वाली अधिकांश बीमारियां पानी से फैलती हैं। ऐसे में फिल्टर या उबला हुआ पानी पीना आवश्यक है। बरसात के मौसम में जल स्रोतों में गाद की समस्या आने लगती है। गंदगी का स्वास्थ्य पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन इससे मौजूद कीटाणु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। एसजेपीएनएल ने शहर के लोगों से आग्रह किया है कि वह पानी को 10 मिनट तक उबालने के बाद ही पिएं।
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पीलिया से ऐसे करें बचाव
गले-सड़े फल और सब्जियां खाने से परहेज करें।
आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखें।
बाहरी खाने से परहेज करें।
खुले में शौच न करें।
पानी को फिल्टर या फिर उबालकर ही पिएं।
झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें, तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
इनसेट
बरसात में पानी मटमैला होने से लोग पीलिया की चपेट में आना शुरू हो जाते हैं। लोगों से आग्रह है कि पीलिया के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें। चिकित्सकों की सलाह के बाद ही दवाओं का सेवन करें।
-डॉ. सतीश, प्रोफेसर एवं मेडिसिन विशेषज्ञ, आईजीएमसी
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात के बीच पेयजल योजनाओं से मटमैला पानी आने से शहर में पीलिया का खतरा बढ़ गया है। बच्चे और बड़े पीलिया से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
आईजीएमसी में वीरवार को भी चार नए मामले पीलिया के आए हैं। अब तक 11 लोग पीलिया से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। यह मामले झंझीड़ी, फागली, न्यू शिमला और समरहिल से आए हैं। हालांकि अभी तक इन क्षेत्रों में क्लस्टर नहीं बना है।राहत की बात यह है कि अब तक सामने आए पीलिया के मामलों में मरीज ज्यादा गंभीर नहीं हैं। फिर भी चिकित्सकों ने मरीजों को निगरानी में रखा है। वहीं मामले सामने आने के बाद चिकित्सकों ने लोगों को सतर्क किया है। साथ ही लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है, ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके। बीते दिनों हुई बारिश के बाद से अस्पतालों में पेट दर्द के मरीज पहुंचने शुरू हो गए थे। इसके बाद सोमवार से आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल में चिकित्सकों ने एहतियात के तौर पर मरीजों के टेस्ट करवाने शुरू किए। सोमवार से आईजीएमसी में जांच के दौरान कई मरीज पीलिया से पीड़ित पाए गए हैं।
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दस मिनट तक उबालें पानी
मानसून के दौरान शरीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। बरसात के मौसम में होने वाली अधिकांश बीमारियां पानी से फैलती हैं। ऐसे में फिल्टर या उबला हुआ पानी पीना आवश्यक है। बरसात के मौसम में जल स्रोतों में गाद की समस्या आने लगती है। गंदगी का स्वास्थ्य पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन इससे मौजूद कीटाणु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। एसजेपीएनएल ने शहर के लोगों से आग्रह किया है कि वह पानी को 10 मिनट तक उबालने के बाद ही पिएं।
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पीलिया से ऐसे करें बचाव
गले-सड़े फल और सब्जियां खाने से परहेज करें।
आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखें।
बाहरी खाने से परहेज करें।
खुले में शौच न करें।
पानी को फिल्टर या फिर उबालकर ही पिएं।
झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें, तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
इनसेट
बरसात में पानी मटमैला होने से लोग पीलिया की चपेट में आना शुरू हो जाते हैं। लोगों से आग्रह है कि पीलिया के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें। चिकित्सकों की सलाह के बाद ही दवाओं का सेवन करें।
-डॉ. सतीश, प्रोफेसर एवं मेडिसिन विशेषज्ञ, आईजीएमसी