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Shimla News: जिले में बढ़ रहा सिंथेटिक ड्रग का ट्रेंड युवाओं के लिए खतरनाक

Tue, 04 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:59 PM IST
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Rising trend of synthetic drugs in the district poses a danger to the youth.
चिट्टे के साथ मेथामफेटामाइन, एलएसडी नशे की तस्करी बढ़ी, मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है सिंथेटिक ड्रग्स
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14 किलो अफीम और 15 किलो चरस की है बरामद
एक साल में 4 किलोग्राम से अधिक चिट्टा बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला शिमला में सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता प्रचलन चिंता का विषय बनता जा रहा है। आठ वर्षों से जिले में चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे थे, लेकिन अब एलएसडी (लाइसर्जिक एसिड डाइथाइलमाइड) और मेथामफेटामाइन (आइस) जैसे बेहद खतरनाक सिंथेटिक नशों की तस्करी के मामले भी बढ़ने लगे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन मादक पदार्थों का सेवन न केवल जानलेवा साबित हो सकता है, बल्कि इससे गंभीर मानसिक रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला पुलिस ने नशा तस्करी पर शिकंजा कसने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। जिले की सीमाओं पर नाकाबंदी बढ़ाई है। साथ ही सूचना तंत्र को मजबूत कर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़े नशा तस्करी नेटवर्क की पहचान की जा रही है। पुलिस मामलों की बैकवर्ड लिंकेज की गहन जांच कर मुख्य सप्लायरों तक पहुंचने और उन्हें गिरफ्तार करने पर विशेष फोकस कर रही है। पुलिस के अनुसार जिला शिमला में सबसे अधिक सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी पंजाब के रास्ते होती है।
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पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिये पंजाब में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थ पहुंचते हैं, जहां से अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से इन्हें हिमाचल सहित अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता है। पंजाब से भौगोलिक निकटता के कारण जिला शिमला भी इस तस्करी से प्रभावित हो रहा है। वर्ष 2026 में पुलिस ने बड़े पैमाने पर विभिन्न मादक पदार्थ बरामद किए हैं। अब तक चार किलोग्राम से अधिक चिट्टा, 14 किलोग्राम अफीम, 15 किलोग्राम चरस, पांच किलोग्राम से अधिक पोस्त, 11.6 ग्राम एलएसडी, करीब 60 ग्राम मेथामफेटामाइन (आइस) तथा 10 लाख से अधिक भांग के पौधे बरामद कर नष्ट किए जा चुके हैं। बरामद मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
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पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। अब केवल मामलों की संख्या बढ़ाने के बजाय बड़े सप्लायरों तक पहुंचने, बैकवर्ड लिंकेज की जांच, तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण और अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा आदतन तस्करों के खिलाफ पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।



कोट
पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन इस अभियान में आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है। जनता के सहयोग से ही समाज में फैल रही इस गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। दूसरे राज्यों में बैठे तस्करों तक भी लगातार पहुंच बनाई जा रही है।
-गौरव सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, शिमला
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