एनजीटी के फैसले को लेकर एकजुट हुए 36 संगठन, सरकार ने बनाई कमेटी
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शिमला नागरिक सभा ने कालीबाड़ी हाल में एनजीटी के फैसले को लेकर अधिवेशन का आयोजन किया। अधिवेशन में शिमला शहर और साथ लगते इलाकों से करीब 36 संगठनों ने भाग लिया और अपने विचार रखे।
एनजीटी के फैसले को लेकर संघर्ष के लिए सभी संगठनों ने मिलकर शिमला जन संघर्ष समिति का गठन किया है। गोविंद चतरांटा को समिति का संयोजक चुना गया है। समिति सरकार पर एनजीटी के फैसले पर प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखने के लिए दबाव बनाएगी।
शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि एनजीटी का निर्णय शिमला शहर की जनता पर तानाशाही है। इस निर्णय को लेते समय नगर निगम और प्रदेश सरकार तथा स्टेक होल्डरों को विश्वास में नहीं लिया गया, न ही राय ली गई।
इन बाशिंदों को भी होगा नुकसान
इस निर्णय से शिमला प्लानिंग एरिया के अंतर्गत आने वाली इर्द गिर्द की दर्जनों पंचायतों के बाशिंदों को भी नुकसान होगा। गोविंद चतरांटा ने कहा कि उपनगरीय जनकल्याण समन्वय समिति इस मुद्दे को लेकर 22 सालों से संघर्ष कर रही है।
एनजीटी का फैसला आने के बाद अब लोगों को टीसीपी की कार्यप्रणाली को लेकर जागरूक करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिमला शहर को लेकर डेवलपमेंट प्लान आखिर क्यों फाइनल नहीं हुआ, यह भी बड़ा सवाल है।
वन टाइम सेटलमेंट को हमेशा क्यों टाल दिया गया? एज इज वेयर इज की तर्ज पर डीम नियमितीकरण की मांग उठाई जाएगी। संजौली के रवि कुमार ने कहा कि किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच आपसी रजामंदी से हुए करार भी इस फैसले की जद में आएंगे। शिमला नागरिक सभा ने सरकार से मांग की है कि इस निर्णय के खिलाफ कानूनी पहलुओं को जांचा परखा जाए।
कार्यक्रम में ये जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
नगर निगम की समरहिल से पार्षद शैली शर्मा, पूर्व पार्षद राजीव ठाकुर, बल्देयां वार्ड से जिला परिषद सदस्य अनीता देवी, चायली वार्ड से जिला परिषद सदस्य राजेश शर्मा, ग्राम पंचायत नेरी के प्रधान देवेंद्र ठाकुर, दुधालटी पंचायत के उप प्रधान कुंदन शर्मा, ढली पंचायत के प्रधान जीत सिंह कंवर, मशोबरा पंचायत के प्रधान बीआर गर्ग आदि ने भाग लिया।
इसके अलावा नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कपिल शर्मा, गोबिंद चतरांटा, सुभाष वर्मा, राजीव सूद, सुरेंद्र बाटला, सुशील ठाकुर, कमलेश ठाकुर, श्याम लाल, रणधीर वर्मा, बिंदु जोशी, रीना तनवर, पीएल पाहवा, आरके गुप्ता, एडवोकेट राजेश कोश, रवि कुमार, जेपी गर्ग, कर्म चंद भाटिया, राजा अग्रवाल,
एडवोकेट रवि शंकर, सतपाल शेखरी, राकेश सिंघा, डॉ ओंकार शाद, डॉ कुलदीप तनवर, डॉ राजेंद्र चौहान, बलबीर पराशर, जियानंद शर्मा, सत्यवान, दिनित देंटा, नोबल, अनिल नेगी, किशोरी ढटवालिया, उत्तम चौहान, बाबू राम, रमाकांत मिश्रा, सोनिया, आशु भारती, कलावती, मथुरा दास, अशोक ठाकुर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इस दिन होगी उपनगरीय जनकल्याण समिति की बैठक
एनजीटी के फैसले को लेकर बुधवार को उपनगरीय जनकल्याण समन्वय समिति की बैठक सुबह ग्यारह बजे कालीबाड़ी हाल में बुलाई गई है। गोविंद चतरांटा ने बताया कि इस बैठक में आगामी संघर्ष को लेकर रूपरेखा तय की जाएगी।
अधिवेशन में इन संस्थाओं ने की शिरकत
अधिवेशन में शिमला नागरिक सभा, उप नगरीय जनकल्याण समिति, आवासीय जन कल्याण समिति टूट, शिमला जन विकास मंच टुटू, गुड़िया न्याय मंच, जनकल्याण संघर्ष मोर्चा, व्यापार मंडल टुटू, कामनापूर्णी गौरक्षा कमेटी, इंजनघर वेलफेयर सोसाइटी, बाबा साहेब अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी, वाल्मीकि धर्म प्रचार समिति, पहचान वूमेन वेलफेयर सोसाइटी, संत श्री रविदास धर्म सभा, दलित शोषण मुक्ति सभा, होटल मालिक एसोसिएशन, मदद सेवा ट्रस्ट, पेंशनर एसोसिएशन, ऑल इंडिया लॉएर्ज यूनियन, सेव लाइफ मिशन, शिमला बाइसेंटेनियल ग्रुप, राष्ट्रीय आजाद मंच, समता आंदोलन, हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति, सीटू, हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, जनवादी नौजवान सभा, एसएफआई, सीपीआईएम, बहुजन समाज पार्टी, एनसीपी सहित 36 संगठनों ने भाग लिया।
कमेटी बनाएगी नफा नुकसान की रिपोर्ट
प्रदेश सरकार राजधानी शिमला में भवन निर्माण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले की समीक्षा करेगी। इस मामले को लेकर मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार सदस्यीय रिव्यू कमेटी गठित की गई यह कमेटी एनजीटी के फैसले से हो रहे फायदे और नुकसान पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगामी रणनीति तैयार करेगी। प्रधान सचिव विधि की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, नगर निगम शिमला के आयुक्त और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिमुडा को शामिल किया गया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि रिव्यू कमेटी एनजीटी के फैसले की हर पहलू से समीक्षा करेगी। एनजीटी के जिन फैसलों से जनता को नुकसान नहीं हो रहा है, उन्हें कैसे लागू किया जाना है? इसकी रूपरेखा तैयार करेगी। फैसले से हो रहे नुकसान को किस तरह से कम किया जाना है?
इसका भी समाधान तलाशने का काम कमेटी करेगी। कानूनी तौर पर फैसलों को लागू करना कितना आसान है? फैसले लागू करने से कौन से चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं? इसको लेकर भी रिव्यू कमेटी रिपोर्ट तैयार करेगी। कमेटी द्वारा रिपोर्ट तैयार किए जाने पर सरकार आगामी रणनीति तैयार करेगी।
समीक्षा कमेटी की पहली बैठक
मुख्य सचिव की ओर से गठित की गई कमेटी की पहली बैठक सोमवार को राज्य सचिवालय में होगी। इस बैठक में कमेटी के सदस्यों को उनके कामकाज से अवगत करवाते हुए रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा होगी।
सरकार के पास हैं दो विकल्प
- एनजीटी के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करे।
डेवलेपमेंट प्लान की टेंडरिंग को मांगेंगे मंजूरी
बैठक में फैसला लिया गया कि शिमला प्लानिंग एरिया के लिए बनाए जाने वाले डेवलेपमेंट प्लान का टेंडर जारी करने के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी मांगी जाएगी।
16 नवंबर को एनजीटी ने सुनाए ये मुख्य फैसले
- शिमला में कोर, ग्रीन और फॉरेस्ट एरिया में किसी भी तरह के नए भवन निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध
- शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिल से अधिक भवन निर्माण पर रोक
- सड़कों से तीन मीटर की दूरी के भीतर निर्माण कार्य पर प्रतिबंध
- बिना मंजूरी पेड़ काटने, जमीन की कटिंग पर पांच लाख जुर्माना
- अवैध निर्माण तीन सप्ताह में गिराए जाएं, भवन नियमित करवाने को आवेदन करने वालोें से वसूला जाए मुआवजा
- 35 से 45 डिग्री से ज्यादा निर्माण करने पर रोक