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शोध में खुलासा: उद्योगों का वातावरण कर रहा सेहत खराब, फेफड़े फेल होने और कैंसर का खतरा

Tue, 05 Mar 2024 10:45 AM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Tue, 05 Mar 2024 10:45 AM IST
सार

 दरअसल 10 उद्योगों में हवा की शुद्धता पर किए गए शोध में सामने आया है कि कई फैक्टरियों का वातावरण कामगारों की सेहत के लिए ठीक नहीं हैं। 

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Research reveals: Industrial environment is worsening health, risk of lung failure and cancer
उद्योग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उद्योगों में काम करने वाले कामगार किस तरह के माहौल में काम करते हैं और इससे उनकी सेहत पर क्या असर पड़ता है, इस पर बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल 10 उद्योगों में हवा की शुद्धता पर किए गए शोध में सामने आया है कि कई फैक्टरियों का वातावरण कामगारों की सेहत के लिए ठीक नहीं हैं। इससे फेफड़े फेल होने और कैंसर जैसी बीमारी का खतरा भी हो सकता है। वहीं क्षय रोग समेत अन्य बीमारियां भी लग सकती हैं। इसका खुलासा जिला स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एके सिंह की रिपोर्ट में हुआ है। शोध के दौरान उद्योगों में कई प्रकार की खामियां भी सामने आई हैं। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी भेजी जाएगी।

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शोध में पाया गया है कि कि यदि उद्योगों के भीतर का वातावरण ठीक हो जाए तो इस प्रकार की दिक्कतों और भयानक बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस शोध को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र नई दिल्ली ने भी सराहा है। दरअसल प्रदेश के 10 उद्योगों में हवा की शुद्धता के बारे में जानने के लिए यह शोध किया गया। यह शोध करीब दो वर्ष तक चला। इसके आधार पर डाटा तैयार किया गया है। इस शोध में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। कई उद्योगों में पाया गया कि जरूरत से ज्यादा छोटे कमरे में अधिक कामगारों से कार्य करवाया जा रहा है, जहां पर वेंटिलेशन नहीं थी। वहीं कई जगह कूड़ा-कर्कट भी उद्योगों के आसपास जलाया जा रहा है।

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कई स्थानों पर उद्योगों के भीतर प्रयोग में लाने वाली मशीनरी में भी धुआं उठता है। इसमें पाया गया कि अगर इसी वातावरण में कुछ वर्षों तक कामगार कार्य करते रहे तो इन्हें भयानक बीमारियां घेर सकती हैं। इसमें सबसे अधिक खतरा फेफड़ों के फेल होने का है। यह शोध इलेक्ट्राॅनिक, प्लास्टिक का सामान, स्क्रू बनाने वाले और फार्मा उद्योगों में किया गया। बीमारी के बाद कामगारों की कर दी जाती है छुट्टीशोध के दौरान पाया गया कि बीमारी के दौरान कामगारों की छुट्टी कर दी जाती है। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कतें आती हैं। शोध में पाया गया कि अगर कोई गंभीर बीमारी हो जाए तो संबंधित कामगार को अधिकतम दो हफ्ते की छुट्टी देने से भी काम चल सकता है। क्योंकि इस अवधि में टीबी समेत कई अन्य प्रकार का बैक्टीरिया कम हो जाता है और फैलने की आशंका भी कम हो जाती है।

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सात स्तरों पर उद्योगों को देना होगा ध्यान-क्रॉस वेंटिलेशन
-छोटे कक्ष को बड़े हॉल में तबदील करना।
-एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सिस्टम लगाना।
-धुआं रहित वातावरण तैयार करना।
-धुआं करने वाली मशीनों की समय पर मरम्मत।
-हवा शुद्ध करने के लिए स्पाइडर, एलोवेरा, स्नेक प्लांट लगाना।
-उद्योगों से निकलने वाले वेस्ट को सही प्रकार से ठिकाने लगाना।

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उद्योगों में वातावरण शुद्धता को लेकर एक शोध किया गया है। इसमें कई प्रकार के खुलासे हुए हैं। प्रदेश के करीब 10 उद्योगों में शोध किया गया है। अगर उद्योगों का वातावरण ठीक हो जाए तो कामगारों को बीमारियां नहीं लगेंगी। इस शोध को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र नई दिल्ली ने भी चुना है। इस शोध को नौणी विवि के पर्यावरण विज्ञान के एचओडी डॉ. एसके भारद्वाज की मदद से पूरा किया गया है।-डॉ. एके सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्वास्थ्य)।

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