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प्रतिष्ठित बागवान हरिचंद रोच बोले- लदानी और आढ़ती के हाथ में मोल-भाव की ताकत

Fri, 27 Aug 2021 02:18 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 27 Aug 2021 02:18 AM IST
सार

रोच ने कहा कि सेब एक ऐसी फसल है, जिसका भंडारण एक साल तक कर सकते हैं। जब बागवान सेब बेचते हैं तो उसकी पैकिंग, परिवहन आदि की लागत उन्हीं को देनी होती है, जबकि अन्य औद्योगिक उत्पादों में यह खरीदारों पर पासऑन होती है।

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Reputed horticulturist Harichand Roach said that Negotiation power in the hands of Ladani and Agent
प्रतिष्ठित बागवान हरिचंद रोच - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के कोटगढ़ के 85 वर्षीय प्रतिष्ठित सेब बागवान हरिचंद रोच वर्ष 1956-57 से सेब उत्पादन का काम कर रहे हैं। विदेशों से प्रदेश में सेब की नई किस्में लाने वालों में भी रोच का नाम अग्रणी है। उन्होंने कहा कि वह सेब की चार से पांच हजार पेटियां उगाते हैं। लदानी और आढ़ती के हाथ में मोल-भाव की ताकत होती है। यह सेब बागवान के पास नहीं है। बागवान थोड़े से वक्त में ही सेब बेचेंगे, जबकि व्यापारी नौ महीने बेचेंगे। एपीएमसी एक्ट भी किसानों के खिलाफ है। इसमें स्टोर करने की सुविधा का प्रावधान होना चाहिए। 

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रोच ने कहा कि सेब एक ऐसी फसल है, जिसका भंडारण एक साल तक कर सकते हैं। जब बागवान सेब बेचते हैं तो उसकी पैकिंग, परिवहन आदि की लागत उन्हीं को देनी होती है, जबकि अन्य औद्योगिक उत्पादों में यह खरीदारों पर पासऑन होती है। इस बार तो सेब वालों को रेट भी कपंनियों ने घटाकर 18 प्रतिशत कम कर दिए हैं। 20 से 25 प्रतिशत इनपुट लागत बढ़ गई है। अब दवाओं पर भी सब्सिडी पहले जैसी नहीं है। लागत से ही तय है कि सेब वालों को इस साल कम से कम 40 फीसदी कम मिलेगा। भंडारण क्षमता भी शून्य है। बारिशें और कोरोना भी रेट गिरने के कारण बताए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर मंडियां लाकर अनर्थ किया गया है, क्योंकि इनके साथ माल नहीं बिकने की स्थिति में स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। 
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आढ़तियों की रणनीति, पहले महंगा खरीदो, फिर सस्ता खरीदकर जमाखोरी करो: चौहान 
हिमाचल के जाने-माने बागवान और एप्पल ब्लूम पत्रिका के संपादक संजीव चौहान ने कहा कि यह आढ़तियों और व्यापारियों की रणनीति है कि निचले क्षेत्रों का महंगा खरीदो और इससे सेब बागवानों को आकर्षित करो तथा इसके बाद मिडल और ऊंची सेब बेल्ट के लोगों का सेब सस्ते दामों मेें खरीदकर स्टोर करो। निचले क्षेत्रों के सेब में इथरल की स्प्रे होने के कारण यह स्टोर करना संभव नहीं है। ऊपरी क्षेत्रों में सेब की फसल पर रंग की स्प्रे इथरल का छिड़काव नहीं होता है। ये स्टोर कर इसे बाद में बेचते हैं। चंडीगढ़, जिरकपुर, दिल्ली, मुंबई आदि में भी सीए स्टोर बुक हो चुके हैं। वहां जमाखोरी हो रही है। इससे भी रेट गिर रहे हैं। 
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