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Shimla News: डीएनए मिसमैच के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना गलत
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कंपनी को वाहन के नुकसान पर भुगतान का आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने डीएनए सैंपल के मिसमैच और चालक बदलने (ड्राइवर इम्प्लांट) के आरोप के आधार पर वाहन का बीमा क्लेम (मुआवजा) खारिज करने को सेवा में गंभीर कमी करार दिया है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को शिकायतकर्ता के दावे का कुल नुकसान के आधार पर 60 दिन के भीतर निपटारा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुख्य देय राशि पर शिकायत दर्ज करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 15 हजार रुपये मुकदमा व्यय अदा करने के निर्देश दिए हैं। तहसील कुमारसैन के गांव शनान (कोट) निवासी रोशनी देवी ने आयोग में शिकायत दायर कर बताया था कि उनका वाहन एचडीएफसी एर्गो से बीमित था। 10 दिसंबर 2021 को उनका बेटा संजय अपने दोस्तों के साथ अमृतसर से शिमला लौट रहा था।
इस दौरान फगवाड़ा रोड पर उनकी गाड़ी एक अन्य वाहन से टकरा गई। हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोगों को चोटें आईं। आपसी सहमति के चलते मौके पर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज नहीं करवाई। इसके बाद बीमा कंपनी को हादसे की सूचना देकर क्लेम दाखिल किया लेकिन कंपनी ने इसे मंजूर नहीं किया। बाद में लोकपाल के निर्देश पर मुंबई फॉरेंसिक लैब की ओर से कार सवारों के रक्त के नमूने और क्षतिग्रस्त वाहन के एयरबैग पर लगे खून के धब्बों के नमूने लिए गए। फॉरेंसिक रिपोर्ट में एयरबैग पर मिले खून का डीएनए कार में सवार लोगों के नमूनों से मेल नहीं खाया। इस आधार पर बीमा कंपनी ने दावा खारिज करते हुए तर्क दिया कि हादसे के समय संजय ड्राइविंग सीट पर नहीं था और तथ्यों को छिपाकर चालक बदला था।
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आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद बीमा कंपनी के इस कदम को अनुचित ठहराया। पीठ ने पाया कि हादसा 10 दिसंबर 2021 को हुआ था जबकि वर्कशॉप में खड़ी गाड़ी के एयरबैग से नमूने 4 फरवरी 2022 को लिए गए। कार में सवार लोगों के रक्त के नमूने करीब एक साल बाद वर्ष 2023 में एकत्र किए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि वर्कशॉप में लंबे समय तक खुले में खड़े वाहन से लिए नमूनों के दूषित होने की पूरी संभावना रहती है। सर्वेक्षक की रिपोर्ट में मरम्मत का खर्च वाहन के बीमित घोषित मूल्य (आईडीवी) 2,86,278 रुपये के 75 प्रतिशत से अधिक पाया गया।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला
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शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने डीएनए सैंपल के मिसमैच और चालक बदलने (ड्राइवर इम्प्लांट) के आरोप के आधार पर वाहन का बीमा क्लेम (मुआवजा) खारिज करने को सेवा में गंभीर कमी करार दिया है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को शिकायतकर्ता के दावे का कुल नुकसान के आधार पर 60 दिन के भीतर निपटारा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुख्य देय राशि पर शिकायत दर्ज करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 15 हजार रुपये मुकदमा व्यय अदा करने के निर्देश दिए हैं। तहसील कुमारसैन के गांव शनान (कोट) निवासी रोशनी देवी ने आयोग में शिकायत दायर कर बताया था कि उनका वाहन एचडीएफसी एर्गो से बीमित था। 10 दिसंबर 2021 को उनका बेटा संजय अपने दोस्तों के साथ अमृतसर से शिमला लौट रहा था।
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इस दौरान फगवाड़ा रोड पर उनकी गाड़ी एक अन्य वाहन से टकरा गई। हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोगों को चोटें आईं। आपसी सहमति के चलते मौके पर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज नहीं करवाई। इसके बाद बीमा कंपनी को हादसे की सूचना देकर क्लेम दाखिल किया लेकिन कंपनी ने इसे मंजूर नहीं किया। बाद में लोकपाल के निर्देश पर मुंबई फॉरेंसिक लैब की ओर से कार सवारों के रक्त के नमूने और क्षतिग्रस्त वाहन के एयरबैग पर लगे खून के धब्बों के नमूने लिए गए। फॉरेंसिक रिपोर्ट में एयरबैग पर मिले खून का डीएनए कार में सवार लोगों के नमूनों से मेल नहीं खाया। इस आधार पर बीमा कंपनी ने दावा खारिज करते हुए तर्क दिया कि हादसे के समय संजय ड्राइविंग सीट पर नहीं था और तथ्यों को छिपाकर चालक बदला था।
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आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद बीमा कंपनी के इस कदम को अनुचित ठहराया। पीठ ने पाया कि हादसा 10 दिसंबर 2021 को हुआ था जबकि वर्कशॉप में खड़ी गाड़ी के एयरबैग से नमूने 4 फरवरी 2022 को लिए गए। कार में सवार लोगों के रक्त के नमूने करीब एक साल बाद वर्ष 2023 में एकत्र किए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि वर्कशॉप में लंबे समय तक खुले में खड़े वाहन से लिए नमूनों के दूषित होने की पूरी संभावना रहती है। सर्वेक्षक की रिपोर्ट में मरम्मत का खर्च वाहन के बीमित घोषित मूल्य (आईडीवी) 2,86,278 रुपये के 75 प्रतिशत से अधिक पाया गया।