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Shimla News: एचपीयू की स्वायत्तता के समर्थन में 270 कर्मियों ने किए हस्ताक्षर
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अधिनियम में संशोधन के विरोध में अभियान तेज
काले बिल्ले लगाकर विरोध जता रहे हैं कर्मचारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की स्वायत्तता को लेकर गैर शिक्षक कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। विश्वविद्यालय स्वायत्तता बचाओ संघर्ष मंच के हस्ताक्षर अभियान के तहत अब तक 270 कर्मचारी अपनी सहमति दर्ज करवा चुके हैं।
मंच ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1970 में प्रस्तावित विभिन्न संशोधनों को विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया है। मंच के बैनर तले कर्मचारी 27 अक्तूबर से काले बिल्ले लगाकर विरोध जता रहे हैं। इसके साथ विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णायक संस्था कार्यकारिणी परिषद की शक्तियां और अधिमान पहले की तरह बरकरार रहने चाहिए। कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय वित्त समिति की अध्यक्षता कुलपति ही करें और समिति की सिफारिशों को कार्यकारिणी परिषद से अनुमोदित करवाया जाए। गैर शिक्षक कर्मचारियों मंच के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बताया कि विभिन्न संवर्गों में शुरुआती श्रेणियों के रिक्त पदों को भरने की मांग भी उठाई है। संघर्ष मंच ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाने का आग्रह किया है। मंच अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बैठक कर आगामी रणनीति तय करेगा।
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काले बिल्ले लगाकर विरोध जता रहे हैं कर्मचारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की स्वायत्तता को लेकर गैर शिक्षक कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। विश्वविद्यालय स्वायत्तता बचाओ संघर्ष मंच के हस्ताक्षर अभियान के तहत अब तक 270 कर्मचारी अपनी सहमति दर्ज करवा चुके हैं।
मंच ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1970 में प्रस्तावित विभिन्न संशोधनों को विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया है। मंच के बैनर तले कर्मचारी 27 अक्तूबर से काले बिल्ले लगाकर विरोध जता रहे हैं। इसके साथ विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णायक संस्था कार्यकारिणी परिषद की शक्तियां और अधिमान पहले की तरह बरकरार रहने चाहिए। कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय वित्त समिति की अध्यक्षता कुलपति ही करें और समिति की सिफारिशों को कार्यकारिणी परिषद से अनुमोदित करवाया जाए। गैर शिक्षक कर्मचारियों मंच के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बताया कि विभिन्न संवर्गों में शुरुआती श्रेणियों के रिक्त पदों को भरने की मांग भी उठाई है। संघर्ष मंच ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाने का आग्रह किया है। मंच अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बैठक कर आगामी रणनीति तय करेगा।
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