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Shimla News: विवाद के बाद बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासियों का पंजीकरण शुरू
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नेपाल के लोगों की सबसे अधिक संख्या, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में आते हैं प्रवासी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण का मामला तूल पकड़ने के बाद जिला पुलिस ने बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी लोगों की पंजीकरण प्रक्रिया एक बार फिर शुरू कर दी है। इसको लेकर दुकानों और घरों में जाकर लोगों को बाकायदा फार्म वितरित किए जा रहे हैं। यह फार्म भरकर सभी प्रवासियों को पुलिस स्टेशन में जमा करवाना होगा।
गौर हो कि हाल के विवाद के लोगों ने बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के पंजीकरण और शहर की सड़कों पर अवैध रूप से रेहड़ी-फड़ी सजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि जिला पुलिस नियमित रूप से बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की पंजीकरण प्रक्रिया को अंजाम देती है, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर जिले में बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी लोग मजदूरी समेत अन्य कार्यों के लिए आते हैं।
जिले में 14,000 से अधिक प्रवासी
जिले में 14,000 से अधिक प्रवासी पुलिस के पास पंजीकृत हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या नेपाल से आने वाले मजदूरों की है। इसके बाद बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग मिस्त्री, लकड़ी की कारीगिरी, ढुलाई, सेब के बगीचों की देखभाल समेत अन्य कार्यों के लिए आते हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों का पंजीकरण इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी भी तरह की आपराधिक घटना को अंजाम देने पर अगर वे प्रदेश छोड़कर फरार हो जाते हैं, तो उनके संबंध में पूरी जानकारी होने पर पकड़ा जा सकता है। इसको देखते हुए उपायुक्त शिमला की ओर से हर तीन महीने के बाद नियमित अंतराल में प्रवासी लोगों के पंजीकरण को लेकर अधिसूचना जारी की जाती है।
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कोट्स
जिले में 14,000 से अधिक प्रवासी मजदूर पुलिस के पास पंजीकृत हैं। नियमित अंतराल के बाद कानून व्यवस्था के मद्देनजर पंजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। इसके अलावा इनका केवाईसी भी किया जाता है। -संजीव कुमार गांधी, पुलिस अधीक्षक, शिमला
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण का मामला तूल पकड़ने के बाद जिला पुलिस ने बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी लोगों की पंजीकरण प्रक्रिया एक बार फिर शुरू कर दी है। इसको लेकर दुकानों और घरों में जाकर लोगों को बाकायदा फार्म वितरित किए जा रहे हैं। यह फार्म भरकर सभी प्रवासियों को पुलिस स्टेशन में जमा करवाना होगा।
गौर हो कि हाल के विवाद के लोगों ने बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के पंजीकरण और शहर की सड़कों पर अवैध रूप से रेहड़ी-फड़ी सजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि जिला पुलिस नियमित रूप से बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की पंजीकरण प्रक्रिया को अंजाम देती है, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर जिले में बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी लोग मजदूरी समेत अन्य कार्यों के लिए आते हैं।
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जिले में 14,000 से अधिक प्रवासी
जिले में 14,000 से अधिक प्रवासी पुलिस के पास पंजीकृत हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या नेपाल से आने वाले मजदूरों की है। इसके बाद बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग मिस्त्री, लकड़ी की कारीगिरी, ढुलाई, सेब के बगीचों की देखभाल समेत अन्य कार्यों के लिए आते हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों का पंजीकरण इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी भी तरह की आपराधिक घटना को अंजाम देने पर अगर वे प्रदेश छोड़कर फरार हो जाते हैं, तो उनके संबंध में पूरी जानकारी होने पर पकड़ा जा सकता है। इसको देखते हुए उपायुक्त शिमला की ओर से हर तीन महीने के बाद नियमित अंतराल में प्रवासी लोगों के पंजीकरण को लेकर अधिसूचना जारी की जाती है।
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जिले में 14,000 से अधिक प्रवासी मजदूर पुलिस के पास पंजीकृत हैं। नियमित अंतराल के बाद कानून व्यवस्था के मद्देनजर पंजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। इसके अलावा इनका केवाईसी भी किया जाता है। -संजीव कुमार गांधी, पुलिस अधीक्षक, शिमला