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Shimla News: लाल टमाटर फीका, दाम घटने से किसानों की चेहरे पड़े पीले
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टमाटर के दामों में प्रति क्रेट 200 रुपये की कमी, किसानों को मिल रहे महज 18 रुपये किलो दाम
सोलन और दिल्ली मंडियों में दाम घटने से दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। जिला शिमला के ग्रामीण क्षेत्रों में टमाटर के गिरते दाम किसानों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। एक सप्ताह से टमाटर 250 से 400 रुपये प्रति क्रेट बिक रहा है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
एक सप्ताह में टमाटर के दाम 100 से 200 रुपये प्रति क्रेट तक कम हुए हैं। एक क्रेट में करीब 20 से 22 किलो टमाटर आता है। ऐसे में किसानों को टमाटर के 20 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। पिछले वर्ष टमाटर की अच्छी पैदावार और बेहतर दाम मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ था लेकिन इस वर्ष हालात इसके विपरीत हैं। किसानों को खेतों से मंडियों तक टमाटर पहुंचाने में अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। जुन्गा क्षेत्र में टमाटर नकदी फसल के रूप में उगाया जाता है और इससे अधिकांश किसानों का वार्षिक खर्च चलता है।
क्षेत्र के अधिकांश किसान हाइब्रिड टमाटर की खेती करते हैं। हालांकि हिमसोना किस्म के टमाटर का बाजार भाव अपेक्षाकृत अच्छा रहता है, लेकिन इसकी खेती सीमित मात्रा में की जाती है।
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किसान प्रीतम सिंह ठाकुर, चुन्नीलाल ठाकुर, दाताराम ठाकुर और जबर सिंह ठाकुर ने बताया कि पानीपत, दिल्ली, चंडीगढ़ और सोलन की सब्जी मंडियों में हाइब्रिड टमाटर 200 से 300 रुपये प्रति क्रेट बिक रहा है। हिमसोना किस्म का भाव 400 से 450 रुपये प्रति क्रेट मिल रहा है। उनका कहना है कि परिवहन, मजदूरी और अन्य खर्च निकालने के बाद प्रति क्रेट केवल 50 से 100 रुपये की बचत हो रही है, जो उनकी मेहनत और लागत की तुलना में बेहद कम है।
अन्य राज्यों से बढ़ी आपूर्ति से गिरे दाम
आढ़ती विनोद कुमार ने बताया कि देश की विभिन्न मंडियों में बंगलुरू सहित अन्य राज्यों से टमाटर की आपूर्ति होने के कारण कीमतों में गिरावट आई है। ट्रांसपोर्टर प्रदीप ब्रागटा ने बताया कि इस वर्ष सीजन की शुरुआत में टमाटर 600 से 700 रुपये प्रति क्रेट तक बिक रहा था लेकिन एक सप्ताह में कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जुन्गा क्षेत्र की पंचायतों में सोलन की तर्ज पर टमाटर, फ्रासबीन और शिमला मिर्च का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। इस वर्ष लहसुन के अच्छे दाम मिलने से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है।
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सोलन और दिल्ली मंडियों में दाम घटने से दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। जिला शिमला के ग्रामीण क्षेत्रों में टमाटर के गिरते दाम किसानों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। एक सप्ताह से टमाटर 250 से 400 रुपये प्रति क्रेट बिक रहा है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
एक सप्ताह में टमाटर के दाम 100 से 200 रुपये प्रति क्रेट तक कम हुए हैं। एक क्रेट में करीब 20 से 22 किलो टमाटर आता है। ऐसे में किसानों को टमाटर के 20 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। पिछले वर्ष टमाटर की अच्छी पैदावार और बेहतर दाम मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ था लेकिन इस वर्ष हालात इसके विपरीत हैं। किसानों को खेतों से मंडियों तक टमाटर पहुंचाने में अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। जुन्गा क्षेत्र में टमाटर नकदी फसल के रूप में उगाया जाता है और इससे अधिकांश किसानों का वार्षिक खर्च चलता है।
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क्षेत्र के अधिकांश किसान हाइब्रिड टमाटर की खेती करते हैं। हालांकि हिमसोना किस्म के टमाटर का बाजार भाव अपेक्षाकृत अच्छा रहता है, लेकिन इसकी खेती सीमित मात्रा में की जाती है।
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किसान प्रीतम सिंह ठाकुर, चुन्नीलाल ठाकुर, दाताराम ठाकुर और जबर सिंह ठाकुर ने बताया कि पानीपत, दिल्ली, चंडीगढ़ और सोलन की सब्जी मंडियों में हाइब्रिड टमाटर 200 से 300 रुपये प्रति क्रेट बिक रहा है। हिमसोना किस्म का भाव 400 से 450 रुपये प्रति क्रेट मिल रहा है। उनका कहना है कि परिवहन, मजदूरी और अन्य खर्च निकालने के बाद प्रति क्रेट केवल 50 से 100 रुपये की बचत हो रही है, जो उनकी मेहनत और लागत की तुलना में बेहद कम है।
अन्य राज्यों से बढ़ी आपूर्ति से गिरे दाम
आढ़ती विनोद कुमार ने बताया कि देश की विभिन्न मंडियों में बंगलुरू सहित अन्य राज्यों से टमाटर की आपूर्ति होने के कारण कीमतों में गिरावट आई है। ट्रांसपोर्टर प्रदीप ब्रागटा ने बताया कि इस वर्ष सीजन की शुरुआत में टमाटर 600 से 700 रुपये प्रति क्रेट तक बिक रहा था लेकिन एक सप्ताह में कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जुन्गा क्षेत्र की पंचायतों में सोलन की तर्ज पर टमाटर, फ्रासबीन और शिमला मिर्च का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। इस वर्ष लहसुन के अच्छे दाम मिलने से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है।