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सेहत के लिए जबरदस्त है ‘रेड लव’, हिमाचली बागवान भी उगाने लगे

Wed, 21 Mar 2018 02:00 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 21 Mar 2018 02:00 PM IST
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Red love apple farming in himachal pradesh

स्विट्जरलैंड के सेब की खास किस्म ‘रेड लव’ हिमाचल पहुंच गई है। यह सेब बाहर से तो लाल होता ही है, भीतर से भी टमाटर की पूरी तरह लाल होता है। इसके फूल भी लाल रंग के ही होते हैं। इसकी साइनवुड यानी कलम को भी काटा जाए तो उसमें भी भीतर खून की तरह लाल रंग दिखता है।

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बागवानों का दावा है कि हिमाचल पहुंची सेब की यह किस्म भारत में पहली बार उगाई जा रही है। हिमाचल के कुछ बागवानों के बगीचों में सेब की इस किस्म में इस साल पहली बार फल उगेंगे। इस सेब की खासियत यह है कि इसमें सामान्य सेब से 40 फीसदी ज्यादा एंटी ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे यह किस्म स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है।
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रेड लव किस्म सबसे पहले स्विट्जरलैंड के एक नर्सरी मालिक मारकस कोबेल्ट ने तैयार की। यह वर्ष 2010 में जब तैयार की गई तो इसने खूब सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद सेब यूरोपीय देशों में उगाया जाने लगा।
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यूरोप के रास्ते यह किस्म अब हिमाचल में भी पहुंच चुकी है। हिमाचल के कुछ सेब बागवानों के पास इस किस्म के दर्जन भर पौधे पहुंचे तो पिछली सर्दियों में उन्होंने इससे साइनवुड निकालकर इसकी स्थानीय सेब किस्मों के पेड़ों पर कलमें कर टॉप ग्राफ्टिंग की। 

शौक से उगा सकते हैं, मगर मार्केट की परख बाकी

Red love apple farming in himachal pradesh

अब इसकी पहली फसल भी आने वाली है। बखोल गांव के प्रगतिशील बागवान संजीव चौहान ने कहा कि उनके पास भी सेब की यह किस्म आ चुकी है। उन्होंने कुछ बागवानों से इसकी साइनवुड प्राप्त की।

कुछ प्रगतिशील बागवानों ने इसके पौधे ट्रायल के लिए यूरोप से मंगवाए हैं। इसकी कलमें कर अब इस किस्म के कई पेड़ तैयार कर लिए गए हैं। इस सीजन में उम्मीद है कि इस पर फ ल भी उग आएंगे। उन्होंने कहा कि यह किस्म आने वाले वक्त में बड़े स्तर पर उगाई जाएगी।

‘विदेशों से मंगवाई जा रही अन्य किस्मों की तरह ही अगर सेब बागवानों ने यह किस्म मंगवाई है तो ठीक है। बागवान शौक के लिए इस किस्म को उगा सकते हैं, मगर ये उपयोगी होगी कि नहीं। भारत की मंडियों में इस सेब के उतरने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता है। भारत के ज्यादातर लोग दवा के नाम पर फलों को कम खाते हैं।

वे तो बस फल समझकर ही खाते हैं। यहां वही सेब किस्म ज्यादा चलती है जो लोगों में प्रचलित हो। ऐसे में रेड डिलिशियस किस्में ही ज्यादा चलन में हैं। देखना होगा कि रेड लव किस्म मार्केट में कितनी खरी उतरती है।’ - डा. विजय सिंह ठाकुर, उद्यान वैज्ञानिक एवं पूर्व कुलपति, डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी। 

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